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90 हजार तक में बिक रही रेमेडिसविर, आईएमए ने कहा- प्रमाणित नहीं है दवा

कोरोना संक्रमित होने के बाद सांस लेने में तकलीफ की वजह से हरिनिवास पांडेय प्रयागराज के प्रीति हॉस्पिटल में भर्ती थे। हॉस्पिटल ने ऑक्सीजन की कमी का हवाला देकर डिस्चार्ज कर दिया तो उन्हें फाफामऊ के प्राची अस्पताल में भर्ती करवाया गया। कल डॉक्टरों ने मरीज के परिजनों से कहा कि छह रेमेडिसविर इंजेक्शन चाहिए। दो पहली डोज में दी जाएगी और फिर बाकी चार इंजेक्शन 24 घंटे के अंतराल पर लगाए जाएंगे। मरीज 7 दिन से ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम पर है और उनका ऑक्सीजन लेवल 80 के आस-पास बना हुआ है। परिजनों ने इलाहाबाद के तमाम मेडिकल स्टोर पर रेमेडिसविर ढूंढा, लेकिन हर जगह आउट ऑफ स्टॉक। एक परिचित डॉक्टर से संपर्क किया तो पता चला 90 हजार रुपये में बाज़ार में बिक रहा है। किसी तरह लखनऊ के एजेंट के माध्यम से 18 हजार रुपये में एक रेमेडिसविर इंजेक्शन मिला। एक आदमी भागकर लखनऊ गया और वहां से ब्लैक रेट में खरीद कर ले आया।

ये सिर्फ़ एक मरीज की या इलाहाबाद की कहानी नहीं है। लखनऊ से लेकर दिल्ली और गुजरात से लेकर महाराष्ट्र तक हर जगह जीवन रक्षक एंटीवॉयरल रेमेडिसविर आउट ऑफ स्टॉक है, जिसके चलते इसकी कालाबाजारी ज़ोरों पर चल रही है। प्रशासन के तमाम एहतियातों और और सरकार के दावों के उलट जीवन रक्षक एंटीवॉयरल इंजेक्शन रेमेडिसविर की कालाबाज़ारी ज़ोरों पर है। आलम ये है कि देश में रेमेडिसविर की एक इंजेक्शन 18 हजार से लेकर 90 हजार रुपये तक में बेची जा रही है। मरीज के परिजन प्रयागराज से गुजरात का सफ़र सिर्फ़ रेमेडिसविर की चंद डेज लाने के लिए कर रहे हैं।

क्या है रेमडेसिवर का आज का रेट
वहीं दूसरी ओर बाज़ार में नकली रेमेडिसविर इंजेक्शन बनाकर बेचा जा रहा है। लखनऊ के आशियाना में कल समाजवादी नेता शिल्पी चौधरी और कुछ अन्य समाजसेवी महिलाओं ने नकली रेमेडिसविर इंजेक्शन बेचने वाले को पकड़कर लखनऊ पुलिस के हवाले कर दिया है। शिल्पी चौधरी के मुताबिक उन्होंने अमीनाबाद के एक एजेंट से बात करके करीब एक दर्जन रेमेडिसविर इंजेक्शन खरीदे। ये इंजेक्शन उन तक एक एजेंट के जरिये पहुंचाया गया। इसमें कई इंजेक्शन नकली थे। कल शुक्रवार को उन्होंने एजेंट को दोबारा बुलाया साथ ही आशियाना थाने की पुलिस को सूचित करके बुला लिया, जिसके चलते नकली रेमेडिसविर बेचने वाला पुलिस के हत्थे चढ़ गया। उसकी गाड़ी से भी कई रेमेडिसविर बरामद किए गए। पुलिस उसे लेकर थाने पहुंची तो उसका फोन घनघनाने लगा। फोन पर डॉक्टर एजेंट से पूछ रहे थे कि आज रेमेडिसविर का रेट क्या है।

आशियाना प्रभारी निरीक्षक ने कहा है कि जांच जारी है जल्द ही नकली रेमेडिसविर इंजेक्शन और इसकी कालाबाजारी में कई बड़े नामों का खुलासा किया जायेगा। कोरोना संबंधी औषधियों की कालाबाजारी को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस कार्रवाई कर रही है। ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट व रासुका के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

ADG (कानून व्यवस्था) उत्तर प्रदेश प्रशांत कुमार ने बताया है कि अब तक कुल 29 व्यक्ति गिरफ़्तार किए जा चुके है, जिनके पास से 668 रेमेडिसविर इंजेक्शन बरामद किए गए हैं। लखनऊ में नकली इंजेक्शन बेचने के मामले में एक गिरोह पकड़ा है। इसके बाद मेरठ समेत कई जनपदों में छापा मारा गया। मेरठ में लालकुर्ती, सदर बाजार दिल्ली गेट समेत कई थाना क्षेत्रों में शुक्रवार को छापा मारा गया।

देहली गेट पुलिस ने दो आरोपी पकड़ लिए और उनकी निशानदेही पर एक इंजेक्शन भी बरामद कर लिया है, जोकि कालाबाजारी में आया है। कालाबाजारी का मेरठ जिले में भी बड़ा नेटवर्क है। बताया गया है कि आरोपियों ने कई राज खोले हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों को लगने वाले इंजेक्शन ब्लैक में बेचे जा रहे हैं, जिसकी कई गुना कीमत लोगों से वसूली जा रही है। पुलिस देर रात तक दोनों आरोपियों से पूछताछ करती रही। उनकी निशानदेही पर शहर में कई जगह छापा भी मारा। पुलिस का कहना है कि अभी जांच में कई और राज खुल सकते हैं।

पूछताछ में आरोपियों ने अस्पताल की सांठगांठ से यह इंजेक्शन ब्लैक में बेचने की बात कही। इसके चलते पुलिस दोनों आरोपियों के साथ संचालक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने की बात कह रही है। मेरठ में इंजेक्शन की कालाबाजारी की सूचना लखनऊ तक पहुंच रही है। दो दिन पहले लखनऊ में भी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ था। उनके खिलाफ कार्रवाई भी हुई थी। बताया गया कि काफी मात्रा में पुलिस ने नकली इंजेक्शन बरामद किए थे। पुलिस ने देर रात लखनऊ को भी रिपोर्ट भेज दी। इस मामले में आरोपियों पर रासुका की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।

वहीं कल रेमडेसिवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले चार लोगों को ठाकुरगंज पुलिस ने दबोच लिया है। पकड़े गए आरोपियों में दो डॉक्टर और दो एजेंट हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से 34 इंजेक्शन और 4, 69000 के नकदी इंजेक्शन बरामद किए हैं। गिरोह के सदस्यों के बारे में जानकारी के लिए पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।

एरा मेडिकल कॉलेज के पास से चार लोगों को इंजेक्शन की अवैध खेप के साथ दबोच लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से 34 इंजेक्शन बरामद किए। साथ ही उनके पास से 469000 की नकदी बरामद की है। एडीसीपी पश्चिम राजेश श्रीवास्तव के मुताबिक पकड़े गए आरोपियों में दो डॉक्टर गोंडा के दुर्जनपुर के रहने वाले हैं। इनमें डॉक्टर सम्राट पांडेय और सरफराजगंज ठाकुरगंज का डॉ. अतहर शामिल हैं। पुलिस के हाथ इनके दो एजेंट भी लगे हैं। एक उन्नाव के बांगरमऊ का रहने वाला विपिन कुमार दूसरा सरफराजगंज का तहजीब उल हसन है। पुलिस के मुताबिक राजधानी में इंजेक्शन की कालाबाजारी करने का गिरोह सक्रिय हैं। पुलिस इस गिरोह के पर्दाफाश के लिए लगी है।

19000 से 30000 तक बेचते थे इंजेक्शन
प्रभारी निरीक्षक ठाकुरगंज सुनील दुबे ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की गई तो पता चला कि रेमेडिसविर इंजेक्शन 19000 से 30000 रुपये तक के दाम पर बेचते थे।

वहीं दिल्ली क्राइम ब्रांच की दो टीमों ने चार लोगों को गिरफ़्तार किया है। मोनिका भारद्वाज, डीसीपी क्राइम ब्रांच, दिल्ली ने बताया है कि गिरफ्तार आरोपियों के पास से कुल 81 रेमेडिसविर इंजेक्शन बरामद किए गए हैं। मामले में जांच जारी है। इसमें दिल्ली, पंजाब और महाराष्ट्र तक के लोग शामिल हैं।

सरकार ने उत्पादन बढ़ाने का आश्वासन दिया
कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा रेमेडिसविर इंजेक्शन की किल्लत देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि कोविड बीमारी में काम आने वाली प्रमुख दवाई रेमेडिसविर का उत्पादन और आपूर्ति को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं तथा अगले महीने की शुरुआत तक इसकी आपूर्ति 38.80 लाख यूनिट प्रति माह से बढ़कर 74 लाख यूनिट हो जाएगी।

इसके साथ ही मंत्रालय ने राज्यों से इसकी अबाधित आपूर्ति और परिवहन सुनिश्चित करने को कहा। देश में अभी इस दवाई की कमी महसूस की जा रही है।गृह सचिव ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और फार्मास्युटिकल विभाग ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को 21 अप्रैल से 30 अप्रैल तक अंतरिम आवंटन के बारे में सूचित किया है। यह लाइसेंस प्राप्त सभी घरेलू निर्माताओं द्वारा रेमेडिसविर की आपूर्ति के लिए है।

भल्ला ने कहा कि कोविड दवाओं की आपूर्ति की दैनिक आधार पर निगरानी और समन्वय के लिए राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण और भारतीय औषधि महानियंत्रक के माध्यम से फार्मास्यूटिकल्स विभाग, रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत एक निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने शुक्रवार को कहा कि सरकार एंटीवायरल दवा रेमेडिसविर का उत्पादन बढ़ाकर जल्दी ही तीन लाख शीशी प्रतिदिन करने के लिए काम किया जा रहा है, ताकि देश में कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच इस दवा की आपूर्ति बढ़ाई जा सके। देश में कोविड-19 संक्रमण के मामले बड़े पैमाने पर बढ़ने के साथ ही रेमेडिसविर की मांग भी कई गुना बढ़ गई है।

मंडाविया ने ट्वीट किया कि 12 अप्रैल के बाद से रेमेडिसविर के उत्पादन के लिए 25 नए विनिर्माण स्थलों को मंजूरी दी गई है। उत्पादन क्षमता अब प्रति माह 90 लाख शीशियों तक पहुंचने वाली है, जो पहले 40 लाख शीशी प्रति माह थी। उन्होंने कहा कि सरकार दैनिक आधार पर स्थिति की निगरानी कर रही है और देश में दवा की आपूर्ति बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करने की जरूरत है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने बताया गैरज़रूरी
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने रेमेडिसविर इंजेक्शन को कोरोना के इलाज में गैर जरूरी करार दिया है। साथ ही अपील की है कि डॉक्टर इस दवा को आंख मूंद कर न लिखें। आईएमए के जिला सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल ने इसे लेकर शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी की। आईएमए के सभी सदस्यों से उन्होंने कहा है कि कोरोना के इलाज के दौरान डॉक्टर धड़ल्ले से रेमेडिसविर इंजेक्शन का परामर्श दे रहे हैं। यह दवा कहीं से भी प्रमाणित नहीं है। इसको लेकर जो रिसर्च हुए हैं उनके कोई ठोस परिणाम भी नहीं आए हैं। इसके बाद भी जबरदस्त तरीके से रेमेडिसविर इंजेक्शन मरीजों के लिए लिखी जा रही है। इसकी वजह से इंजेक्शन की डिमांड शहर में अचानक बढ़ गई है।

जायडस कंपनी का नया एंटीवॉयरल Virafin को मिली मंजूरी
वहीं देश में हर दिन कोरोना के रिकॉर्ड तोड़ मामले सामने आने के बीच भारत सरकार की ओर से बड़ा कदम उठाया गया है। आज शुक्रवार को भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) की ओर से Zydus कंपनी की Virafin को मंजूरी दे दी गई है।वहीं दवा कंपनी जायडस का दावा है कि इसके इस्तेमाल के बाद 7 दिन में 91.15 फीसदी कोरोना पीड़ितों का RT-PCR टेस्ट नेगेटिव आया है। इस एंटीवायरल ड्रग के इस्तेमाल से कोरोना मरीजों को राहत मिलती है और लड़ने की ताकत मिलती है।

कंपनी का दावा है कि कोरोना होने के शुरुआती वक्त में अगर Virafin दी जाती है, तो मरीज को कोरोना से उबरने में मदद मिलेगी और कम तकलीफ होगी। अभी ये ड्रग्स सिर्फ डॉक्टर की सलाह के बाद ही किसी मरीज को दी जाएगी, इन्हें अस्पतालों में उपलब्ध कराया जाएगा।

कंपनी ने इस ड्रग का भारत के करीब 25 सेंटर्स पर ट्रायल किया था, जिसमें अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं। यही कारण है कि इस ड्रग को लेने के सात दिन बाद कोरोना मरीज में अंतर देखने को मिले हैं और RT-PCR कोविड टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आई है।

वहीं दूसरी ओर देश के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कोरोना पीड़ितों से अस्पताल न जाने की अपील करते हुए कहा है कि देशवासियों से मेरा निवेदन है कि सब धैर्य बनाकर रखें। जिसे ज़रूरत है वे ही अस्पताल जाएं। 98-99% मरीजों को शायद अस्पताल जाने की ज़रूरत भी नहीं पड़ती है। वे घर में ही ठीक हो सकते हैं और अधिकांश मरीज घर में भी ठीक हो रहे हैं। ज़रूरत पड़ने पर ही अस्पताल जाएं।

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This post was last modified on April 25, 2021 10:54 pm

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