Saturday, November 27, 2021

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सात महीने पहले ही लिख दी गई थी दिशा रवि की गिरफ्तारी की पटकथा

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ग्रेटा थनबर्ग टूलकिट मामले की जांच कर रही दिल्ली की स्पेशल सेल ने 21 साल की एक्टिविस्ट दिशा रवि को कल गिरफ्तार किया है। उन्हें बेंगलुरु से पकड़ा गया रविवार को पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 5 दिन की रिमांड पर लिया गया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि दिशा रवि ने वॉट्सऐप ग्रुप बनाया था और उसके जरिए टूलकिट डॉक्यूमेंट एडिट करके वायरल किया। वह टूल किट डॉक्यूमेंट का मसौदा तैयार करने वाले षड्यंत्रकारियों के साथ काम कर रही थीं। दिशा रवि पर आरोप है कि इसके जरिए इन लोगों ने देश के खिलाफ बड़ी साजिश तैयार की थी। लेकिन कहानी इतनी भर नहीं है। दिशा रवि की गिरफ्तारी की पटकथा आज से 7 महीने पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और गृहमंत्रालय ने लिखी थी।

बता दें कि आज से ठीक सात महीने पहले यानि जुलाई 2020 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया था कि वो ‘फ्राइडे फॉर फ्यूचर’ वेबसाइट को ब्लॉक करे और इसके संचालकों पर आतंकवाद निरोधी क़ानून के तहत कार्रवाई करे।

दिल्ली पुलिस द्वारा 7 जुलाई 2020 को जारी किये गये नोटिस में बताया गया था कि पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कंप्लेन किया है कि ‘फ्राईडे फॉर प्यूचर’ द्वारा उनके ईमेल पर एक ही विषय “इनव्यारोनमेंट इम्पैक्ट एसेसमेंट (EIA) 2020” से ढेरों ईमेल भेजा गये हैं। उनकी शिकायत पर हमने फ्राईडेज फॉर फ्यूचर वेबसाइट को चेक किया है इसमें भारत की शांति और संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने वाली ग़ैरक़ानूनी गतिविधियां हैं।    

दरअसल 21 वर्षीय दिशा रवि ‘फ्राइडे फॉर फ्यूचर’ कैम्पेन की सह संस्थापक हैं और अंतरराष्ट्रीय क्लाइमेट चेंज एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग की ही तरह दिशा रवि भी क्लाइमेट एक्टिविस्ट हैं। दिशा रवि फ्राइडे फॉर फ्यूचर कैम्पेन से 2018 से जुड़ी हैं, इस कैम्पेन के जरिए दुनिया भर में पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर मुहिम चलाई जा रही है। फ्राइडे फॉर फ्यूचर वही कैम्पेन है जिसके जरिए ग्रेटा थनबर्ग ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरी हैं।

उपरोक्त तथ्यों से जाहिर है कि फ्राईडेज फॉर फ्यूचर वेबसाइट और संगठन केंद्र सरकार के निशाने पर पिछले 7 महीने से है। अब किसान आंदोलन को सपोर्ट करने वाले ‘टूल किट’ के बहाने दिशा रवि को सरकार ने दमन के फंदे में फांस लिया है।

अब बात करते हैं टूल किट की। टूलकिट दरअसल एक डिजिटल डॉक्यूमेंट है जिसमें सोशल मीडिया पर आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए तौर तरीके होते हैं। दरअसल इस टूलकिट में बताया गया था किसान आंदोलन में सोशल मीडिया पर समर्थन कैसे जुटाए जाएं। हैशटैग का इस्तेमाल किस तरह से किया जाए और प्रदर्शन के दौरान क्या किया जाए और क्या नहीं, सब जानकारी इसमें मौजूद थी। पहली बार अमेरिका में ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के दौरान इसका नाम सामने आया था।

जनवरी महीने में किसान आंदोलन के समर्थन में स्वीडन की पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने एक डॉक्यूमेंट शेयर करते हुए ट्वीट किया। ट्वीट में आंदोलन कैसे करना है, इसकी जानकारी वाले टूलकिट को साझा किया गया। टूल किट में किसान आंदोलन को बढ़ाने के लिए हर जरूरी कदम के बारे में बताया गया है। ट्वीट में कौन सा हैशटैग लगाना है, क्या करना है, कैसे बचना है, इसकी जानकारी दी गयी।

क्या था पर्यावरण प्रभाव आकलन मसौदा (EIA-2020)

मार्च 2020 में पर्यावरण मंत्रालय ने मसौदा पर्यावरण प्रभाव आकलन (इनवारोमेंट इम्पैक्ट एसेसमेंट, EIA अधिसूचना जारी की थी और इस पर जनता से सुझाव आमंत्रित किये गए थे। जिसका कई पर्यावरण एक्टिविस्ट, संगठनों, वैज्ञानिकों, समाज सेवियों और राजनीतिक दलों ने विरोध किया था। जाहिर है पर्यावरण एक्टिविस्ट होने के नाते EIA 2020 मसौदे  का विरोध करने वालों में दिशा रवि और उनका कैंपेन फ्राइडे फॉर फ्यूचर भी शामिल था। और इसके खिलाफ़ सोशल मीडिया पर हैशटैग ‘विदड्रॉईआईए2020’ (ईआईए2020 वापस लो) ट्रेंड किया था। और पर्यावरण मंत्रालय को ईमेल भेजे गये थे।

ईआईए 2020 क्या है? पर्यावरण प्रभाव आकलन या ईआईए वह प्रक्रिया या अध्ययन है जो पर्यावरण पर प्रस्तावित औद्योगिक/अवसंरचनात्मक परियोजना के प्रभाव की भविष्यवाणी करता है।  यह प्रस्तावित गतिविधि/परियोजना को उचित निरीक्षण के बिना अनुमोदित होने या खाते में प्रतिकूल परिणाम लेने से रोकता है।

सरकार के उक्त ड्रॉफ्ट का विभिन्न एक्टिविस्ट समाजसेवी पर्यावरण संगठनों और राजनीतिक दलों ने विरोध किया था।  एक पत्र लिखकर इस ड्रॉफ्ट को वापस लेने की मांग की गई थी। पत्र में कई व्यक्तियों, शोधकर्ताओं, पारिस्थितिकविदों, संरक्षणवादियों और संबद्ध पेशेवरों द्वारा हस्ताक्षर किए। वहीं सह-हस्ताक्षरकर्ताओं में नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ़, प्रोजेक्ट टाइगर, वन सलाहकार समिति, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और विभिन्न राज्य वन्यजीव बोर्ड्स के पूर्व सदस्य शामिल थे।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 23 मार्च 2020 को पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2020 का ड्राफ्ट जारी किया था और यह 11 अप्रैल को भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुआ था। दस्तावेजों से पता चलता है कि अधिसूचना प्रकाशित होने के सिर्फ़ 10 दिन के भीतर यानी कि 20 अप्रैल तक मंत्रालय को कुल 1,190  ईमेल प्राप्त हुए थे, जिसमें से 46 ईमेल में लोगों ने सुझाव दिया था और बाकी के 1,144 ईमेल में अधिसूचना को तत्काल वापस लेने की मांग की गई थी।

फेसबुक पोस्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ईआईए 2020 मसौदे के लिये सरकार की निंदा करते हुए कहा था कि यह न सिर्फ “अपमानजनक” बल्कि “खतरनाक” भी है। इसमें पर्यावरण की सुरक्षा के लिहाज से लंबी लड़ाई के बाद हासिल हुए फायदों को न सिर्फ पलटने की क्षमता है बल्कि इसमें पूरे भारत में पर्यावरण के लिहाज से व्यापक विनाश और बर्बादी फैलाने की भी क्षमता है। इस पर विचार कीजिए। ‘स्वच्छ भारत’ का दिखावा करने वाली हमारी सरकार के मुताबिक, अगर यह मसौदा अधिसूचना अमल में आती है तो ‘रणनीतिक तरीके से’ कोयला खनन और अन्य खनिजों के खनन जैसे बेहद प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को पर्यावरण प्रभाव आकलन की जरूरत नहीं रहेगी।”

विशेषज्ञों के मुताबिक EIA-2020 मसौदे में बी1 और बी2 कैटेगरी में आने वाली परियोजनाओं के लिए आम लोगों की राय से जुड़े हुए नियमों को काफी लचीला बना दिया गया और रणनीतिक मानी जाने वाली परियोजनाओं के लिए इन नियमों में ढील दी गई। बी2 की लिस्ट में खनन और छोटी सड़क परियोजनाएं जैसे काम आते हैं। इन परियोजनाओं को ईसी (एनवायरंमेंटल क्लियरेंस या पर्यावरण मंजूरी) से बाहर कर दिया गया।

नया ड्राफ्ट प्रक्रियात्मक पर्यावरणीय अधिकारों को कमजोर करता है।  “ईआईए अधिसूचना 2006 के तहत वर्तमान में लागू सार्वजनिक परामर्श प्रक्रियाएं पहले से ही असंतोषजनक हैं, लेकिन ड्राफ्ट अधिसूचना उनके दायरे को और अधिक सीमित कर देती है।  यह परियोजना प्रभावित व्यक्तियों के लिए प्रासंगिक जानकारी तक पहुंच को भी कम करता है।

पर्यावरण एक्टिविस्ट दिशा रवि की गिरफ्तारी की निंदा 

बेंगलुरु की 21 वर्षीय जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि की गिरफ्तारी पर देश विदेश के राजनेताओं, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, लेखकों और कवियों ने भी कड़ी आलोचना की है।

कांग्रेस पार्टी के पूर्व मंत्री जयराम रमेश ने ट्वीट करते हुए लिखा, “पूरी तरह से अत्याचार है! ये अनुचित उत्पीड़न और धमकी है। मैं दिशा रवि के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करता हूं।” 

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा, “सवाल ये है कि वो कब गिरफ्तार होंगे जो भारत की राष्ट्रीय एवं सामाजिक एकता को खंडित करने के लिए सुबह-शाम जनता के बीच घृणा व विभाजन को जन्म देने के लिए शाब्दिक ‘टूलकिट’ जारी करते रहते हैं। भाजपा सरकार बताए कि शिकायत करने पर भी वो इन ‘टूलकिटजीवियों’ पर कार्रवाई क्यों नहीं करती?”

वहीं देश के पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा,- “माउंट कार्मेल कॉलेज की 21 वर्षीया छात्रा और जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि राष्ट्र के लिए खतरा बन गई है, तो इसका मतलब है कि भारतीय राज्य बहुत ही कमजोर नींव पर खड़ा है।”

उन्होंने दूसरे ट्वीट में कहा है- “इस देश में किसानों का समर्थन करने के लिए जारी किया गया एक टूलकिट चीनी सैनिकों के घुसपैठ से भी खतरनाक हो गया है। भारत बचकानी और बकवास हरकतें कर रहा है और यह दुखद है कि दिल्ली पुलिस उत्पीड़कों का हथियार बन गई है।”

सीपीआई महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि –“मोदी सरकार को लगता है कि सेडिशन के तहत किसानों की एक बेटी को गिरफ्तार करके वह किसानों के आंदोलन को कमजोर कर सकती है। लेकिन वास्तव में ये देश के युवाओं को जागृत करेगा और लोकतंत्र के लिए संघर्ष को मजबूत करेगा।” 

वहीं, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी दिशा की गिरफ्तारी पर लिखा, “एक्टिविस्ट जेल में बंद हैं, जबकि टेररिस्ट जमानत पर हैं। आश्चर्य है कि हमारे अधिकारी पुलवामा हमले की सालगिरह को कैसे मनाएंगे? आपके पास इस हेडलाइन के पेयर का जवाब है?”

वकील और अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की भांजी मीना हैरिस ने कहा है, ”भारतीय अधिकारियों ने एक अन्य युवा महिला कार्यकर्ता, 21 साल की दिशा रवि को गिरफ्तार किया है, क्योंकि उसने सोशल मीडिया पर एक टूलकिट पोस्ट की थी कि कैसे किसानों के प्रदर्शन का समर्थन करें। घटनाओं के अनुक्रम के बारे में इस थ्रेड को पढ़ें और पूछें कि एक्टिविस्ट्स को सरकार की ओर से टारगेट और चुप क्यों किया जा रहा है।”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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