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किसान-सरकार वार्ता का सातवां चक्र: चंद उम्मीदों के बीच निराशाओं का गहरा घटाटोप

मोदी सरकार के विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 34 वां दिन है। इससे पहले पांच दौर की बातचीत विफल हो चुकी है और सरकार किसी भी सूरत में इन नये कानूनों को वापस लेने के मूड में नहीं है जबकि किसानों की मुख्य मांग यही है। इससे पहले सरकार ने किसान नेताओं को वार्ता के लिए जो पत्र भेजा था उसके जवाब में किसानों ने 29 दिसंबर को सुबह 11 बजे का समय दिया था जिसे बदल कर सरकार ने आज 30 दिसंबर को किसानों संगठनों को बातचीत के लिए बुलाया है। आज की बातचीत का क्या नतीजा निकलेगा यह तो शाम तक साफ़ हो जायेगा। आज की वार्ता के लिए किसानों का समूह विज्ञान भवन के लिए सिंघु बॉर्डर से निकल चुका है।

किंतु इस बीच किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के संयुक्त सचिव सुखबिंदर सिंह साबरा ने कहा कि, पहले भी पांच दौर की बैठक हो चुकी है, उसमें समझाने की बात हुई और कानून के फायदे गिनाए गए। आज भी बैठक का कोई सही एजेंडा नहीं है। हमें नहीं लगता कि माहौल ऐसा है कि बैठक में कुछ निकलेगा। उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों को खत्म किया ही जाना चाहिए।

वहीं, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मैनपाल चौहान ने सफल वार्ता की उम्मीद जताते हुए कहा है कि, तीनों कानून निरस्त होने चाहिए और एमएसपी की गारंटी का प्रावधान होना चाहिए। अगर फसल एमएसपी से नीचे खरीदी जाती है तो दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।

इस बीच, वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने उम्मीद जताई है कि आज की वार्ता निर्णायक होगी और कोई हल निकलेगा, वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फिर सरकार का पक्ष दोहराते हुए कहा कि नये कानून किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए बनाये गये हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि, किसान कम से कम 2 साल इस कानून को उपयोग करके देखे कि ये कानून कितना उपयोगी हैं फिर अगर आपको लगता है कि कानून में संशोधन करने की जरूरत है तो हमारी सरकार संशोधन करने के लिए तैयार है और आज भी किसान बातचीत करें, उन्हें लगता है कि इसमें संशोधन की आवश्यकता है तो हम तैयार हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि, बातचीत का समाधान निकलेगा और किसान अपना आंदोलन खत्म करें।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि देश में मजबूत विपक्ष की जरुरत है जिससे सत्ता को डर लगे कुछ भी गलत करने से पहले। किंतु यहां विपक्ष कमजोर है और इसलिए किसानों को सड़क पर आना पड़ा है।

राकेश टिकैत ने कहा है कि, सरकार कानून वापस नहीं लेगी तो प्रदर्शन खत्म नहीं होगा। सरकार को कानून वापस लेना ही पड़ेगा। संशोधन पर बात नहीं बनेगी।

प्रधानमंत्री मोदी से लेकर तमाम बीजेपी नेताओं, उनके मुख्यमंत्रियों और गोदी मीडिया के दलाल एंकरों और पत्रकारों के तमाम तमगों को ख़ारिज करते हुए मोदी कैबिनेट के मंत्री ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि, किसान, किसान है और हम उनका सम्मान करते हैं!

राजनाथ सिंह ने कहा कि, किसान अन्नदाता हैं और उनपर किसी तरह का लेबल नहीं लगाना चाहिए। ऐसे में सवाल है कि जिन नेताओं ने किसानों को नक्सली और खालिस्तानी कहा है वे किसानों से माफ़ी मांगेंगे? क्या राजनाथ सिंह उनसे माफ़ी मांगने के लिए कहेंगे?

तो अब बीजेपी ने तमाम नेताओं और खुद प्रधानमंत्री को साफ़ करना चाहिए कि राजनाथ सिंह सही बोल रहे हैं या उनके भक्त चैनल के एंकर और पत्रकार सही हैं?

(पत्रकार नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on December 30, 2020 1:13 pm

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