गोडसे ने व्यक्तिगत स्तर पर गांधी की हत्या नहीं की थी, उसके पीछे आरएसएस का संगठित विचार था: धीरेंद्र झा

हापुड़। गोडसे ने व्यक्तिगत स्तर पर गांधी की हत्या नहीं की थी। उसके पीछे आरएसएस का संगठित विचार था। 8 दिसंबर, 1947 को ही दिल्ली में गोलवलकर ने गांधी को चुप कराने का फतवा दिया था। उनकी हत्या की जांच में गोलवलकर के फतवे को जाँच के दायरे में लाकर फिर से जाँच करानी चाहिए। 

ये बातें वरिष्ठ लेखक और पत्रकार धीरेंद्र झा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की शहादत की बरसी पर हापुड़ में आयोजित एक कार्यक्रम में कहीं।

धीरेंद्र झा ने कहा कि आरएसएस के स्थापना की दसवीं वर्षगांठ के अवसर पर हेडगेवार ने नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में कहा था कि अंग्रेजों का शासन हमारे लिए वरदान है। यानी आरएसएस शुरू से ही अंग्रेजों के साथ था जबकि गांधी अंग्रेजों के ख़िलाफ़ संघर्ष का नेतृत्व कर रहे थे। 

चर्चित पुस्तक ‘गांधी का हत्यारा गोडसे’ के लेखक ने कहा कि आरएसएस गांधी जी की हत्या की योजना पर काफ़ी सालों से काम कर रहा था। उसने यह अफ़वाह फैलायी कि गोडसे पाकिस्तान को पैसा देने से नाराज़ था। जबकि आरएसएस गांधी पर पिछले कई सालों से हमलावर था जब पाकिस्तान की बहस भी नहीं थी। 

उन्होंने स्पष्ट किया कि गोडसे के आरएसएस छोड़ने की अफ़वाह भी आरएसएस ने फैलायी थी ताकि उसे स्वीकार्यता मिल जाये। जबकि उसके भाई गोपाल गोडसे ने ख़ुद कहा है कि नाथूराम गोडसे हमेशा आरएसएस के लिए काम करता था। 15 नवंबर को फाँसी पर लटकाये जाने से पहले भी उसने आरएसएस का गीत नमस्ते सदा वत्सले गाया था। यानी वो अंतिम साँस तक आरएसएस से जुड़ा था।

मसीहुज़्ज़मा अंसारी, पत्रकार एवं चेयरमैन, नेशनल फेडरेशन ऑफ़ यूथ मूवमेंट (NFYM) ने अपने संबोधन में कहा कि गांधी के विचार की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण विशेषता उसका समावेशी स्वरूप है—एक ऐसा विचार जो समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलता है। उन्होंने कहा कि इसी समावेशी विचार के विरोध में खड़े तत्वों ने महात्मा गांधी की हत्या की।

उन्होंने आगे कहा कि जब समाज बँटता है तो वह किसी न किसी बहाने से लगातार विभाजित होता चला जाता है। धर्म के नाम पर बने देशों का भाषा के आधार पर विभाजन हो गया, लेकिन भारत आज भी एक जीवंत राष्ट्र के रूप में मज़बूती से खड़ा है। इसका मूल कारण गांधी का वही समावेशी विचार है, जो भारत की आत्मा में रचा-बसा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता दिनेश शर्मा ने की और सभी वक्तागण का धन्यवाद किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ ख़ालिद मोहम्मद ख़ान ने किया।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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