Subscribe for notification
Categories: राज्य

मिन्डा कम्पनी में सफाईकर्मियों की मौत, ज़िम्मेदार कौन?

गुरुग्राम (गुड़गांव) का पोस्टमार्टम हाउस ‘स्वच्छता दिवस’ के एक दिन पूर्व यानी 1 अक्टूबर को दोपहर बाद लगभग तीन बजे सुनसान पड़ा था। दो-चार लोग बैठे थे, तभी अचानक सैकड़ों की संख्या में कुछ पैदल और कुछ गाड़ियों से भीड़ आई। उस भीड़ में नौजवान, बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे थे, इनमें से किसी के शरीर पर ‘स्वच्छ कपड़े’ या किसी के शरीर की चमड़ी ‘स्वच्छ यानी गोरी’ नहीं थी जिससे यह कहा जा सके कि हां ‘साहब’ लोग हैं। न ही उस भीड़ में आये किसी बच्चे के गाल लाल थे और न ‘साफ-सुथरे’ दिख रहे थे, जिनको झट से गोद में लेकर दुलारा जा सके या कान मरोड़ कर उनके साथ शरारत की जा सके। वह इस तरह भी नहीं दिख रहे थे कि पूछा जाये कि आपके डैडी क्या करते हैं? आपके स्कूल का नाम क्या है? आप किस कक्षा में हो?

भीड़ में शामिल हर व्यक्ति को देखकर कहा जा सकता था कि यह भारत की मेहनतकश जनता है जिनके बच्चों के लिए न तो कोई लाड़-प्यार उमड़ता है, न ही उनकी जिन्दगी में स्वच्छता के कोई मायने हैं। इन बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं को दो जून की रोटी और तन ढकने के लिए कपड़े चाहिए तथा शिक्षा के मायने अधिक से अधिक अक्षर ज्ञान। अगर इनकी जिन्दगी में इतना मिल जाये तो यह अपने जीवन में रोशनी पाते हैं। उस रोशनी को पाने के लिए 15-20 फीट गहरे, सड़ांध देने वाले घोर कूप अंधेरे में भी उतर कर काम करने के लिए तैयार रहते हैं।

भारत के प्रधानमंत्री ने 2 अक्टूबर को अपने सम्बोधन में कहा कि ‘‘बच्चों के लिए भी स्वच्छता मिशन एक अभियान बन चुका है।’’ इस भीड़ में आई महिलाएं रो रही थी और उनके बच्चे शून्यभाव में थे। इन बच्चों में कुछ की उम्र तो इतनी थी कि उनको पता भी नहीं कि यह भीड़ क्यों है, क्या हो रहा है और वह कहां हैं? इन बच्चों ने अपने पिता को खोया था।

तीन मज़दूरों ने जान गंवाई

रिंकू, नन्हे और राजकुमार। ये वे तीन मज़दूर हैं जिनकी गुड़गांव की जय ऑटो कम्पोनेन्ट कम्पनी में 30 सितंबर को सीवर साफ करते हुए मौत हो गई। इनके अलावा विनेश व अरविन्द नाम के मज़दूर बेहोश हो गये।

पोस्टमार्टम हाउस के बाहर पूनम एक बेंच पर बैठी रो रही थी। उसके साथ तीन बच्चे थे, जिनकी उम्र 2 से 7 वर्ष के बीच की थी। इन बच्चों को यह भी नहीं पता था कि उनके पिता किस ‘स्वच्छता अभियान’ के तहत मारे गए या क्यों और कैसे मरे। मां को रोते हुए देख उनको यह लग रहा था कि कोई बड़ा दुख उनके ऊपर आया हुआ है।

पूनम के चार बच्चे हैं और वह लखीमपुर खीरी जिले के गौला गोकरनाथ गांव की रहने वाली हैं। वह अपने पति और बच्चों के साथ गांव खांडसा, सेक्टर 37 में किराये के मकान में रहती थी। उनके पति नन्हे घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर ‘जय ऑटो कम्पनी लिमिटेड’ में स्वीपर का काम 9 साल से करते आ रहे थे।

पूनम ने बताया कि नन्हे दशहरे के दिन 30 सितम्बर को 7 बजे सुबह पर ड्यूटी गये थे। हमें 11 बजे सूचना दी गई कि वो गड्ढे में गिर गये हैं जिससे उन्हें चोट आई है। 12 बजे जब वह कम्पनी गेट पर पहुंची तो पता चला कि उनके पति की मौत हो चुकी है। वह कम्पनी प्रबंधन से बातचीत करना चाहती थी लेकिन काफी प्रयास के बावजूद प्रबंधन ने बात नहीं की और न ही गेट को खोला।

पूनम की ही तरह वहां आरती भी अपने दो बच्चों के साथ रो रही थी। वह उसी दिन अपने गांव सिमरा चौराहा, जिला हरदोई से आई थी। आरती बताती हैं कि पति रिंकू और दो बच्चों के साथ गुड़गांव के खांडसा ग्राम में राजकीय स्कूल के पास किराये के मकान में करीब 8 साल से रह रही थी। तीन माह पहले वह गांव चली गई क्योंकि रिंकू जो भी कमाता था यहां किराये और खाने में खर्च हो जाता था। वह चाहती थी कि कुछ समय गांव में बच्चों को लेकर रहे जिससे कि कुछ पैसों की बचत हो पाये। आरती की जिन्दगी में रोशनी आने के बजाय अन्धेरे कुंड ने उनकी रोशनी को छीन लिया।

“जबरदस्ती सीवर में उतारा”

इस घटना में तीसरे मृतक 24 साल के राजकुमार थे। राजकुमार गौतमबुद्ध नगर जिले के सबोता गांव के निवासी थे। राजकुमार का परिवार भी गरीब है पिता नानक चन्द खेती का काम करते हैं और राजकुमार व उसके दूसरे भाई मेहनत-मजदूरी करते हैं। राजकुमार के चचेरे भाई रामऔतार उसी कम्पनी (जय आटो कम्पोनेन्ट) में चौकीदारी का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि राजकुमार करीब छह साल से कम्पनी के मैंटीनेन्स विभाग में अस्थायी रूप से काम कर रहे थे। कम्पनी प्रबंधन ने राजकुमार को जबरदस्ती सीवर के अन्दर उतारा जिससे उनकी मौत हो गई।

जय ऑटो कम्पोनेन्ट कम्पनी में 17-18 सफाई मजदूर हैं जो वाल्मीकि समुदाय से हैं और 12-12 घंटे की दो शिफ्ट में काम करते हैं। इन सफाई कर्मचारियों का मुख्य काम तीन मंजिला कम्पनी और उसके टॉयलेट को स्वच्छ बनाये रखना होता है। इनके काम में सीवर सफाई का काम नहीं आता है।

छुट्टी के दिन जबरन काम कराया!

सफाई विभाग के सुपरवाइजर दीप कुमार ने बताया कि “कम्पनी के प्रबंधक ने हमें सीवर सफाई के लिए कई दिन कहा लेकिन हमनें यह कहते हुए मना कर दिया था कि यह हमारा काम नहीं है। 30 सितंबर को छुट्टी का दिन था, हम गये नहीं थे तो प्रबंधन ने इन लोगों पर दबाव बनाकर सीवर सफाई के लिए उतार दिया। इस काम के लिए प्रबंधन ने किसी तरह की सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की थी और ना ही सेफ्टी बेल्ट या कोई सुरक्षा का उपकरण दिया था।

जय आटो कम्पोनेन्ट

जय आटो कम्पोनेन्ट कम्पनी मिन्डा ग्रुप की कम्पनी है जिसकी हरियाणा, दिल्ली, नोएडा सहित देश के अन्य हिस्सों में कई ब्रांच हैं। इस ग्रुप की कम्पनियों के दर्जनों नाम हैं। यह कम्पनी ऑटो क्षेत्र की बड़ी कम्पनियों जैसे होन्डा, सुजुकी, यामाहा, टोयोटा, मारुति सुजुकी, बजाज, महेन्द्रा व हीरो जैसी कम्पनियों के लिए पार्ट्स बनाती है। चार पहिया और दो पहिये के कई पार्ट्स पर इस कम्पनी का एकाधिकार है। इस कम्पनी का सलाना टर्न ओवर 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 2700 करोड़ रुपये) है। इस कम्पनी की फैक्ट्री दिल्ली के जहांगीरपुरी इंडस्ट्रीयल एरिया के राजस्थानी उद्योग नगर में है जहां पर यह कम्पनी मजदूरों को न्यूनतम वेतन भी नहीं देती है। यहां तक की पी.एफ. का पूरा पैसा मजदूरों के वेतन से काटती है और मजदूरों से एक माह में सौ घंटे से अधिक ओवर टाइम कराया जाता है। मजदूरों द्वारा हाड़-तोड़ मेहनत करके कमाये गये ओवर टाइम के पैसों में से भी यह कम्पनी ईएसआई और पीएफ का पैसा काटती है। यहां तक कि सलाना बोनस भी नहीं देती है। वर्दी, और जूते तो दूर की बात है। जय आटो कम्पोनेन्ट कम्पनी के गेट पर लगाये गये बोर्ड पर कम्पनी के दफ्तर का पता GI-48, जीटी करनाल रोड, इंडस्ट्रीयल एरिया, नई दिल्ली 110033 लिखा हुआ है। कम्पनी के पते में कहीं भी जगह का नाम नहीं है, जीटी करनाल रोड की दूरी काफी है और इसमें कई इंडस्ट्रीयल एरिया आते हैं। कम्पनी के वेबासाइट पर GP-14, HSIDC इंडस्ट्रीयल एरिया, सेक्टर 18, गुड़गांव, हरियाणा 122001 दर्ज है। कम्पनी की वेबसाइट को देखने से लगता है कि यह कम्पनी मजदूरों को काफी खुशहाल रखती है जबकि स्थिति ठीक उलट है। कम्पनी अपने को रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट मानती है लेकिन कम्पनी सीवरेज सफाई के लिए मजदूरों को गड्ढे में उतार कर जान ले लेती है। 2700 करोड़ रुपये के सालाना टर्न ओवर वाली कम्पनी के पास एक भी सेफ्टी बेल्ट नहीं होती है यहां तक कि सीवर में गिरे हुए मजदूरों को निकालने में दो से ढाई घंटे का समय लग जाता है।

मज़दूरों का लगातार शोषण

सफाई विभाग के सुपरवाइजर दीप कुमार ने यह भी बताया कि यहां कई सालों से काम कर रहे मजदूरों को स्थायी तक नहीं किया गया है। मजदूरों से 8000-8500 रुपये मासिक वेतन में काम कराया जाता है।’’ इसी कम्पनी में कुछ समय पहले ऋषिपाल सफाई कर्मचारी थे, उन्होंने बताया कि वह कम्पनी में सात साल काम कर रहे थे और 2017 में होली पर घर गये थे घर से आने में दो-तीन दिन देर हो जाने पर कम्पनी ने उनको बिना किसी मुआवजे या नोटिस दिये कम्पनी से हटा दिया।

सादे कागज़ पर समझौता!

मृतक के परिवारों, नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा, सीटू, एटक, सीवर वर्कर्स यूनियन, फरीदाबाद, रोडवेज यूनियन के पदाधिकारियों के दबाव के बाद मालिक ने डीएलसी के सामने सादे कागज पर इकरारनामा किया है। जिसके अन्तर्गत प्रत्येक मृतक के परिवारजनों को 17 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को अस्थायी नौकरी देने की बात कही गई है, परन्तु इस समझौते पर न तो कम्पनी का और न ही लेबर अधिकारी की मोहर व लेटर पैड का प्रयोग किया गया है। इस समझौते में इस बात का भी उल्लेख नहीं है कि कम्पनी यह मुआवजा कब तक पीड़ित परिवार को देगी। लेकिन इस समझौते में मृतकों के परिजनों से कोई कानूनी कार्रवाई न करने और इस संबंध में दर्ज कराई गई एफआईआर तुरंत वापस लेने का आश्वासन लिया गया है। इस तरह से मालिक-प्रशासन के गठजोड़ ने मजदूरों को एक बार फिर से छलने की कोशिश की है। दुर्घटना के दूसरे दिन कम्पनी बंद होने के बावजूद भी हरियाणा के अलग-अलग हिस्सों से पुलिस बल को बुलाकर कम्पनी की सुरक्षा में लगाया गया था।

कब तक होंगी ऐसी मौतें?

कम्पनी के अन्दर सीवर में मौत की यह कोई पहली घटना नहीं है सितम्बर माह में ही 18 तारीख को अहमदाबाद की एक कम्पनी में टैंक सफाई के दौरान चार मजदूरों की मौत हो गई थी और 5 घायल हो गए थे। कुछ समय से लगातार देश के कई हिस्सों से सीवर में मजदूरों की मरने की खबरें आ रही हैं। दो माह में दिल्ली और एनसीआर में 18 मौतें हो चुकी हैं और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। जीवन में रोशनी लाने के लिए कब तक अंधरे गड्ढे में मौतें होती रहेंगी?

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on May 12, 2019 11:04 pm

Share