यूं तो हाल के लगभग डेढ़ दशक भारतीय प्रेस – विशेषकर हिंदी भाषी प्रेस – के धीरे-धीरे… Read More
बादल सरोज
विडम्बनायें हमेशा विद्रूपताओं में ही सामने आयें यह जरूरी नहीं, वे विपरीतताओं, दर्पण की उलट छवियों –… Read More
वे जब भी, जो भी करते हैं एकदम नया और चौंकाने वाला करते हैं। वे कोई भी… Read More
31 मार्च तक कथित रूप से देश को नक्सल मुक्त बना देने की घोषणा के लिए संसद… Read More
जब वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे तो प्रदेश के लोग उनकी हर दिन आठ-दस की… Read More
पूरी दुनिया को चिंतित और स्तब्ध कर देने वाले युद्ध – जिसे युद्द कहना भी सही नहीं… Read More
न तो इन्होने शेक्सपीयर को पढने का झंझट पाला हैं, न इन्हें क्लियोपेट्रा के बारे में ही… Read More
घटनाओं को उनके आगे पीछे से काटकर सिर्फ घटना के रूप देखना एक तरह की दुर्घटना ही… Read More
यह समय बहुत ही असामान्य और अभूतपूर्व समय है । राजेश जोशी एक छोटी सी कविता ‘शांति की… Read More
दंगे, फसाद, उत्पात और भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करने के बाद अब गुजरात सरकार ने तय… Read More