Subscribe for notification
Categories: राज्य

गुजरात : यात्रा लेकर विकास खोजने निकले, मिली गरीबी और बेरोजगारी

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी विकास के प्रोपगंडे से देश के प्रधान सेवक (प्रधानमंत्री) बन गए परन्तु गुजरात विधानसभाचुनाव के भाजपा प्रभारी अरुण जेटली ने गुजरात भाजपा के नेताओं को विकास पर मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया न देने की ताकीद की है। बीजेपी को लगता है कि विकास अब उन्हें चुनाव में लाभ नहीं बल्कि हानि पहुंचाएगा क्योंकि जो विकास गुजरात में गांडा हुआ था वह देश में पगला रहा है। गुजरात के सामाजिक संगठन भी यह मान रहे हैं कि विकास का पेड मीडिया के माध्यम से झूठा प्रचार किया गया था जिस कारण वह चुनाव से ठीक पहले पगला गया। यदि वास्तविक विकास हुआ होता तो बीजेपी को विकास शब्द से दूर नहीं भागना पड़ता।

पूरे राज्य में यात्राओं का दौर

पूरे राज्य में यात्राओं का दौर चल रहा है। पाटीदार अनामत आन्दोलन समिति बीजेपी के खिलाफ आर पार की लड़ाई लड़ रही है। हार्दिक पटेल ने दावा किया है उनकी आरक्षण की “संकल्प यात्रा” में 700000 नवजवान जुड़े हुए हैं। हार्दिक की यह यात्रा गुजरात के गाँव गाँव घूम कर बीजेपी के खिलाफ राजनैतिक माहौल बना रही है। पाटीदार हर गाँव में घूम घूमकर ‘अत्याचारी भाजपा के विरोध में धारा 144’ का बैनर लगवा रहे हैं। दूसरी तरफ ठाकोर सेना के अध्यक्ष अल्पेश ठाकोर एससी, एसटी और ओबीसी की एकता दिखाते हुए जनादेश यात्रा कर तहसील तहसील जा कर सम्मलेन कर रहे हैं। अल्पेश का दावा है कांग्रेस हो या बीजेपी गुजरात में सरकार हमारी बनने वाली है।

“विकास यात्रा खोज”

“मिशन आरंभ” के तरुण गढ़वी ने सुरेन्द्र नगर जिले में “विकास खोज यात्रा” निकाल विकास के बड़े बड़े दावे के सामने बीजेपी की पोल खोल कर रख दी है। “गांडा विकास” जिससे बीजेपी पीछा छुड़ाना चाहती है उस विकास को तरुण गढ़वी की अगुआई में सुरेन्द्र नगर जिले के पिछड़े , दलित, वंचित, अल्पसंख्यक इत्यादि विकास खोज यात्रा के तहत विकास को ढूंढ रहे हैं।

ग्राउंड रियलिटी चेक

जनचौक ने “विकास खोज यात्रा” के साथ एक दिन की यात्रा कर सच्चाई जानने की कोशिश की। तो पता चला वास्तव में विकास गांडा (पागल) हो गया है। मिशन आरम्भ के संयोजक तरुण गढ़वी ने जनचौक को बताया कि 18 सितंबर को विकास खोज यात्रा दुदरेज के वडवारा मंदिर से शुरू की गई थी जिसका समापन आज सुरेन्द्र नगर शहर के कुंतुनाथ देरासर में हुआ। यात्रा का मकसद ग्राउंड रियलिटी चेक था। हम लोग चाहते थे कि जिस विकास के गुब्बारे से पूरे देश को मूर्ख बनाया गया उसमे कुछ भी सच्चाई हो तो उसे जनता के सामने लाया जाना चाहिए यदि नहीं है तो समस्याओं का एक डाटाबेस तैयार कर सामाजिक माध्यम से जनता और राजनैतिक दलों के सामने रखा जाना चाहिए।

बेरोजगारी बड़ी समस्या

सुरेन्द्र नगर में सबसे बेहतरीन कपास की खेती होती है टॉम हिल जैसी बड़ी विदेशी कंपनी सुरेन्द्र नगर का कपास का उपयोग करती है परन्तु जिले में कॉटन उद्योग को बढ़ाने के लिए सरकार ने कोई प्रयत्न नहीं किया। यहाँ पर न तो ज़िन्निंग का कारखाना है न ही प्रोसेसिंग का जिस कारण बेरोगारी जिले की बड़ी समस्या है।

पिछले कुछ वर्षों से एक अनुमान के अनुसार एक परिवार प्रति दिन जिले से बेहतर ज़िन्दगी की तलाश में शहर को पलायन कर रहा है। जिले में खेती के पानी के अलावा पीने के पानी की भी बड़ी समस्या है , टूटी सड़कें हैं स्ट्रीट लाइट नहीं है स्वच्छ भारत के नाम पर पूरे देश में ढिंढोरा पीटा जा रहा है जिले को स्वच्छ बनाना भी एक चुनौती है।

मकान की भी समस्या

गांवों में हमें ऐसे घर भी मिले जहाँ पर मुंबई की खोलियों जैसे मकान भी मिले जिसमें एक कमरे में 20 से 22 लोग रहने को मजबूर हैं। घर की समस्या शहरों के साथ साथ गावों में भी है जिस पर किसी का ध्यान भी नहीं जा रहा है।

खाना-रहना सब महंगा

“जनचौक” संवाददाता ने यात्रा में चल रहे नगलका गाँव के 50 वर्षीय विपिन भाई सोलंकी से बात की तो उन्होंने बताया सरकार ने केरोसिन पर सब्सिडी समाप्त कर दी है। गैस भी महंगी हो गई है जिससे गाँव में रहने वाले लोगों को दिक्कत आ रही है। पहले 28 किलो सस्ता गेहूं कंट्रोल से मिलता था, अब 14 किलो गेहूं ही सब्सिडी भाव से मिल रहा है। खेती की ज़मीन न होने के कारण मजूरी कर गुजरा करना पड़ रहा है विपिन भाई दलित समाज से आते हैं उनके के पिता वस्ता भाई सोलंकी के नाम से 40 बीघा ज़मीन कागज़ पर आवंटित हुई थी जिसका कभी भी मालिकाना हक नहीं मिला जिसे हाल ही में सरकार ने आवंटन रद्द कर वापस ले लिया।

यात्रा कर रहे हर्ष वर्धन सिंह (जो पेशे से ठेकेदार हैं ) ने बताया कि राज्य में ठेकेदारी प्रथा बेरोजगारी का मूल कारण है। ठेके पर कम करने वाले के पास आज रोज़गार है तो कल भी रहेगा उसकी गरंटी नहीं रहती। ठेका उन्हें ही मिलता है जिनका जैक होता है या कह लो सत्ता पक्ष के साथ जुड़े हैं ऐसे ठेकेदार ठेका लेकर सब कांट्रेक्टर को ठेका दे देते हैं। कभी कभी एक ठेके के नीचे कई सब कांट्रेक्टर होते हैं। 80 प्रतिशत नफा जैक वाले कमाते हैं।

मेहुल वानिया ने बताया कि सुरेन्द्र नगर की वडवान GIDC सरकार की नीतियों के कारण बंद होने के कगार पर है। सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कुछ नहीं कर रही है। इंडस्ट्रियल यूनिट्स खस्ता हालत में हैं। छोटी यूनिट या छोटे कारखानों को पानी भी नहीं मिल पर रहा है जिस कारण जिले में बेरोज़गारी ऐसी है कि जिसके पास नौकरी है वह नौकरी पर छुट्टी नहीं ले सकता क्योंकि उसे डर है यदि छुट्टी करेगा तो उसकी जगह कोई दूसरा ले लेगा। जिले में लोगों की खर्च करने की क्षमता लगभग समाप्त हो गई है। बस जी खा ले रहे हैं।

पुनीत रावल ने बताया कि शिक्षा के गिरते स्तर और सरकारी स्कूल की कमी के कारण गाँव के लोग स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। जिले में कॉलेज की कमी के कारण माध्यमिक शिक्षा के बाद बच्चे पढाई छोड़ रहे हैं। इतना पैसा नहीं है कि अहमदाबाद, राजकोट जाकर शिक्षा हासिल कर लें।

तरुण गढ़वी विकास खोज यात्रा से सामने आईं समस्याओं के निकाल (समाधान) के लिए सरकार और राजनैतिक दलों के सामने इन्हें रखकर जनताके सपनों का सुरेन्द्र नगर कैसे बने उसका प्रयास करेंगे।

गढ़वी विकास का मतलब नहीं समझता : बीजेपी

विकास खोज यात्रा की प्रतिक्रिया में क्षेत्र की बीजेपी विधायक वर्षा बेन दोषी ने “जनचौक” से कहा कि तरुण गढ़वी को यात्रा निकलने का कोई अधिकार ही नहीं है। वह विकास का मतलब ही नहीं समझता है। उसे सिर्फ जनता को भ्रमित करना है। पिछले 10 वर्षों में बहुत से नए उद्योग आये हैं। GIDC का रास्ता भी बनाया गया है, पानी भी पहुँचाया गया। इंफ्रास्ट्रक्चर ही विकास नहीं होता। सामाजिक समरसता भी ज़रूरी है जिसके लिए हम सब काम कर रहे हैं। गढ़वी के आदमी अफवाह फैला कर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। जिले में अफवाह चल रही है कि मोदीजी ने 15 लाख रुपये जो 2014 चुनाव से पहले सभी के खाते में डालने की बात की थी वह 15 लाख बीजेपी के नेताओं के खाते में आ गए हैं जबकि आम जनता को अभी तक नहीं मिल पाए हैं वर्षा बेन ने कहा मोदी जी योजनाएं सवा सौ करोड़ जनता के लिए होती हैं वह बीजेपी कांग्रेस नहीं जानती है न ही अमीर गरीब देखती है नर्मदा के पानी की तरह सब तक पहुंचेंगी जब 15 लाख दिए जायेंगे। वर्षा बेन का आरोप है कुछ समय से गढ़वी के आदमी झूठे प्रोपगंडे फैलाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on May 12, 2019 10:37 pm

Share