अय्यूब, जुनैद, पहलू हम सब शर्मिंदा हैं : हर्ष मंदर

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अहमदाबाद। “वोटों के ध्रुवीकरण की राजनीति ने देश में अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक के बीच इतनी बड़ी खाई बना दी है जो पूरे देश के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। गौरक्षा के नाम पर अल्पसंख्यक, दलित और आदिवासियों पर हो रहे हमले की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निंदा भी की जा रही है, परन्तु सरकार न ही इस प्रकार की घटनाओं को रोकने की कोशिश कर रही है, न ही इस खाई को पाटने की कोशिश कर रही है। लेकिन इस गंगा-जमुनी सभ्यता वाले देश में एक बड़ी संख्या यह महसूस कर रही है कि यह सब गलत है। भारत का सेक्युलर समाज इस वातावरण में अखलाक, जुनैद, पहलू खान, अय्यूब मेव इत्यादि के परिवार के साथ खड़ा है। इन परिवारों के सामने सिर झुकाए कह रहा है कि हम शर्मिंदा हैं, जो देश के वातावरण को ख़राब होने से नहीं बचा पाए।”

यह कहना है अमन बिरादरी के संस्थापक पूर्व आईएएस हर्ष मंदर का। जो अपने 40 साथियों के साथ 4 सितम्बर को नगांव, असम से कारवान-ए-मोहब्बत लेकर निकले। नगांव वह जगह है जहां पर गाय चोर की अफवाह फैला कर रियाज और हनीफ की एक भीड़ ने हत्या कर दी थी। कारवान-ए-मोहब्बत भीड़ तन्त्र के शिकार हुए परिवारों से मिलकर संवेदना व्यक्त कर रहा है।

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अय्यूब के परिवार से मुलाकात

नफ़रत के ख़िलाफ़ यह यात्रा असम , बंगाल , झारखंड , दिल्ली , पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान होते हुए सोमवार को अहमदाबाद अय्यूब मेव के घर पहुंची। करवान-ए-मोहब्बत के साथियों ने अयूब की पत्नी, भाई, माँ और बहन से मुलाक़ात की। आपको बता दें कि पिछले साल 13 सितंबर, 2016 को बकरा ईद के मौके पर 25 साल के अय्यूब मेव को अहमदाबाद के आनंद नगर में गौ रक्षकों ने गौ तस्करी के शक में पकड़ कर बुरी तरह पीटा था, जिसके तीन दिन बाद 16 सितंबर को अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी।

हर्ष मंदर ने परिवार से दुःख जताते हुए कहा कि हम अपने आप को भी ज़िम्मेदार मानते हैं ऐसी घटनाओं के लिए, क्योंकि देश में जो वातावरण खड़ा हुआ है उसे हम न ही रोक पाए, न ही बदल पाए, हम इन सन घटनाओं के लिए सरकार, आरएसएस, बीजेपी सभी को ज़िम्मेदार मानते हैं।

“सब साथ खड़े हों”

उन्होंने कहा कि यह ज़िम्मेदारी गुजरात सरकार की थी कि वह आते और अयूब के परिवार से माफ़ी मांगते। समाज भी इनके साथ खड़ा नहीं हो रहा है। मुस्लिम समाज के साथ घटना हुई तो दलित, आदिवासी को भी इनके साथ खड़ा होना चाहिए। इसी प्रकार से मुस्लिम को भी उनके साथ खड़ा होना पड़ेगा तभी एक अच्छा समाज बन पायेगा। सिर्फ गाय के नाम पर दलितों और आदिवासियों को भी मारा जाता है। भीड़ ही नहीं पुलिस भी यह काम कर रही है। गुजरात में प्रवेश करते ही हम लोग पाटन के उस आदिवासी परिवार से भी मिले जिसे पुलिस ने गाय के नाम पर इतना पीटा कि उस आदिवासी को बीच चौराहे पर संडास हो गई। उसके बावजूद इसी हालत में पुलिस उन्हें पीटते हुए उनके

गाँव ले गई। यह लोग मुसलमानों के अलावा दलितों और आदिवासियों को भी निशाना बना रहे हैं। मंदर ने कहा हम सब को इस वातावरण के खिलाफ ख़ामोशी तोड़ने की ज़रूरत है।

“सरकार पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाए”

करवान-ए-मोहब्बत के साथी जॉन दयाल ने कहा कि हम कुबूल करते हैं कि इस वातावरण के लिए हम भी ज़िम्मेदार हैं। सरकार से मांग करते हैं, इन परिवारों को कानूनी ढंग से न्याय दिलाये। परिवार की तरफ से हबीब मेव ने घटना की पूरी जानकारी दी।

पुलिस ने हत्या को दुर्घटना बताया था!

हबीब मेव ने बताया कि पुलिस ने तीन दिन तक हमें सही जानकारी नहीं दी थी। वह एक्सीडेंट बता रही थी जबकि हमें दूसरे माध्यम से पता चल चुका था कि अयूब को गौ रक्षकों ने मारा है। पुलिस इसे दुर्घटना बता कर मामले को रफा दफा करने की कोशिश कर रही है। एक व्यक्ति को इतनी बुरी तरह से मारा गया, पुलिस उसकी एफआईआर दर्ज न कर एनिमल क्रुएल्टी एक्ट के तहत पीड़ित के ही खिलाफ मुक़दमा दर्ज करती है। अयूब की मृत्यु के बाद कार्रवाई का वादा कर पोस्टमोर्टम करवा देती है। अगले दिन परिवार की मर्जी के खिलाफ बॉडी को जबरन घर पहुंचा देते हैं। परिवार बॉडी को लेने से मना कर देता है। पुलिस के बड़े अधिकारियों की मध्यस्ता के बाद क्रॉस एफआईआर दर्ज होती है। प्रेस कांफ्रेंस कर पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए

एसआईटी का गठन करती है। आरोपियों की गिरफ़्तारी हुई जो वास्तव में सही आरोपी थे, जिसके बाद दोबारा ऐसी घटना नहीं हुई।

गांधी हॉल में स्वागत

इस मौके पर अहमदाबाद के गांधी हॉल में करवान-ए-मोहब्बत का स्वागत किया गया। इस यात्रा में 12 से 13 राज्य के सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। स्वागत समारोह में उन लोगों को सम्मानित किया गया जिन्होंने 2002 में धर्म जाति भूल कर इंसानों की जान बचा कर इंसानियत का काम किया।

“राजनीति को धर्म से दूर करना होगा”

इस मौके पर जन संघर्ष मंच की संयोजक निर्जरी सिन्हा ने गौरी लंकेश को याद करते हुए कहा कि वह एक नास्तिक थीं, उनके पिता भी नास्तिक थे लेकिन लंकेश की हत्या के बाद लिंगायत जाति या धर्म से जोड़कर राजनीति की जा रही है। राजनीति से धर्म को दूर करना पड़ेगा। नहीं तो वक्फ की ज़मीनें अडानी, अम्बानी हड़प लेंगे और आदिवासियों की ज़मीन बाबा लोग क़ब्ज़ा कर लेंगे।

“ज़मीन पर लड़ने वाले विधानसभा पहुंचें”

रोहित प्रजापति ने गुजरात में चल रहे आन्दोलनों का ज़िक्र करते हुए कहा कि सरकार के खिलाफ ज़मीन पर लड़ाई लड़ी जा रही है। लोग हिम्मत से लड़ रहे हैं। परिणाम तभी आएगा जब ज़मीन पर लड़ने वाले लोग विधानसभा और पार्लियामेंट में जा कर लड़ेंगे। इनके पास जनता को जवाब देने के लिए कुछ नहीं तो उत्सव मानते हैं। जल जंगल ज़मीन की लड़ाई के साथ वैकल्पिक मीडिया भी खड़ा करने की ज़रूरत है। नर्मदा महोत्सव में कुछ पत्रकारों को जाने से रोकने की कोशिश भी हुईं जो निंदनीय है। हमारे ऊपर विचार थोपे जा रहे हैं समय आ गया है कि इन्हें हम सब राजनैतिक पराजय दें।

कारवान-ए-मोहब्बत जारी

करवान-ए-मोहब्बत की यात्रा जारी है। अहमदाबाद से यह यात्रा वडावली पहुंची। वहां से यह गोधरा जाएगी। इसके बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान होते हुए यह यात्रा एक बार फिर समापन के लिए गुजरात पहुंचेगी। गुजरात में 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन इस यात्रा का समापन गांधी जी के जन्म स्थान पोरबंदर में होगा।

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