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जिग्नेश मेवानी के साथी को वाघेला ने मुस्लिम बहुल वार्ड से बनाया एनसीपी का उम्मीदवार

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जिग्नेश मेवानी और मुजम्मिल।

अहमदाबाद। एक महीने पहले जूनागढ़ महानगर पालिका चुनाव में 60 सीटों वाली कॉर्पोरेशन में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को केवल एक सीट मिली थी जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  चार सीट हासिल कर विपक्ष की कुर्सी पर बैठ गई। गुजरात के कद्दावर नेता शंकर सिंह वाघेला की अगुआई में यह पहला चुनाव था। इसी वर्ष वाघेला ने एनसीपी की कमान संभाली है। वाघेला कह चुके हैं कि पार्टी राज्य में होने वाले सभी चुनाव और उप चुनाव लड़ेगी। 

जामनगर में कांग्रेस से विपक्ष की कुर्सी छीनने के बाद वाघेला ने अहमदाबाद के बहरामपुरा म्युनिसिपल चुनाव में दलित नेता और विधायक जिग्नेश मेवानी के साथी रहे मुज़ममिल मेमन को उम्मीदवार बना कर कांग्रेस ही नहीं अन्य दलों को चकित कर दिया है।

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जिग्नेश मेवानी ने 2016-17 में उना आंदोलन, दलितों को ज़मीन दिलाने का आंदोलन कर राज्य में दलितों को एक जुट किए थे। राज्य में दो यात्राएं (दलित अस्मिता और आजादी कूच यात्रा) की थीं। विधान सभा चुनाव 2017 से पहले राज्य में भाजपा विरोधी लहर खड़ी करने में अहम भूमिका निभाने वाले तीन युवा चेहरों में से मेवानी एक थे। 2017 विधान सभा में कांग्रेस से गठबंधन कर वडगाम से विधायक भी बने। मेमन उना आंदोलन की दस दिवसीय दलित अस्मिता पदयात्रा में भी मेवानी के साथ थे। मेमन जिग्नेश मेवानी के संगठन दलित मुस्लिम एकता मंच में भी सक्रिय हैं।

अहमदाबाद शहर में सबसे निचले पायदान का वार्ड बहरामपुरा ही है जहां आज भी स्वच्छ पानी और साफ सुथरी हवा नहीं है। इसी वार्ड में पिराना डंप साइट है जहां अहमदाबाद शहर का 4000 मीट्रिक टन कचरे रोज़ाना फेका जाता है। डंप साईट के कारण बहरामपुरा के नागरिकों में किडनी, सांस, टीबी, चमड़ी रोग आम है। 2016 में मुज़म्मिल मेमन और उनके अन्य साथियों ने डंप साइट को हटाने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था इन्हीं लोगों ने गुजरात हाईकोर्ट में डंप साईट हटाने के लिए जनहित याचिका दायर की थी जिसका निर्णय एक महीने पहले ही आया है।

निर्णय में कोर्ट ने कॉर्पोरेशन को डंप साईट को 1 वर्ष में हटाने तथा छ महीने में रिपोर्ट देने को कहा है। हाईकोर्ट और एनजीटी के निर्णय के बाद नगर निगम ने कचरे के पहाड़ को हटाने का काम भी शुरू कर दिया। यही इन लोगों की बड़ी उपलब्धि है। जिस कारण शंकर सिंह वाघेला ने स्वयं संपर्क कर उन्हें बहरामपुरा चुनाव लड़ने को कहा था। रंजीत सिंह ढिल्लों जो राष्ट्रवादी कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज हैं ने मध्यस्ता कर मेमन को उम्मीदवार बनाया है। 

शंकर सिंह वाघेला (बापू) और केशु भाई पटेल (बापा) गुजरात की राजनीति में ऐसे धुरंधर माने गए हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि ‘गुजरात का ऐसा कोई गांव नहीं है जिस गांव के दस व्यक्ति को बापू और बापा नाम से नहीं जानते हों।’ बापा और बापू दोनों राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। बापू UPA -1 में कपड़ा मंत्री भी रहे हैं। बापा भाजपा की अंदरुनी राजनैतिक खेल में हार कर 2001 में नरेन्द्र मोदी को राज्य की सत्ता सौंप कर निष्क्रिय हो गए।

अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का सबसे पिछड़ा वार्ड बहरामपुरा वार्ड ही है। इस वार्ड के काउंसलर यूसुफ अजमेरी के देहांत के बाद सीट खाली हुई है जिस कारण उप चुनाव हो रहे हैं। मुस्लिम बहुल वाले इस वार्ड में 70 से 72%वोटर मुस्लिम हैं और 28 से 30% वोटर हिन्दू जिनमें अधिकतर दलित हैं। इस वार्ड में भाजपा लड़ाई में बहुत दूर है। कांग्रेस दबदबे वाले वार्ड में NCP ही चुनौती देती है।

पिछले म्युनिसिपल चुनाव में 8000 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर थी। इस वार्ड में स्वच्छ पानी, कचरे का पहाड़, दूषित हवा, फैक्ट्रियों से केमिकल का बहाव, जल भराव, मकानों की NOC इत्यादि मुख्य मुद्दे हैं। NCP ने जिग्नेश मेवानी के दलित मुस्लिम एकता संगठन के मुज़म्मिल मेमन को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवारों की घोषणा होना बाकी है। बापू की गुगली के बाद यह उप चुनाव रोमांचक हो गया है। 1 से 5 अक्तूबर तक नमांकन होगा। 22 को वोट डाले जाएंगे और 24 अक्तूबर को परिणाम आएगा।

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

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