सुनाली खातून भारत लौटीं 

25 वर्षीय सुनाली खातून, अपने आठ वर्षीय बेटे के साथ भारत लौट आई हैं। उन्हें उनके परिवार के दो और सदस्यों के साथ “अवैध प्रवासी” होने के संदेह में जून में नई दिल्ली से हिरासत में लेकर असम ले जाकर बांग्लादेश धकेल दिया गया था। तीन  दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उनकी देश में वापसी संभव हुई। 

मां-बेटे ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में महादीपुर बॉर्डर आउटपोस्ट से दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बलों के बीच फ्लैग मीटिंग के बाद भारतीय क्षेत्र में प्रवेश किया। सुनाली खातून, उनके पति दानिश शेख, उनके बेटे और रिश्तेदार स्वीटी बीबी (32) और उनके दो बच्चों (सभी मूल रूप से पश्चिम बंगाल के बीरभूमि से हैं)  को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पहले उन्हें विमान से असम ले जाया गया और वहाँ से बांग्लादेश की सीमा में धकेल दिया गया। 

दानिश, स्वीटी बीबी और उनके दो बच्चे अब भी बांग्लादेश में हैं और केंद्र ने उनकी भारतीय नागरिकता पर सवाल उठाया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनाली, जो गर्भवती हैं, के मामले में केंद्र “मानवीय आधार” पर उन्हें व उनके बेटे को वापस लाने के लिए तैयार हुआ।

पश्चिम बंगाल प्रवासी मजदूर कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष और तृणमूल काँग्रेस के राज्यसभा सांसद समीरुल इस्लाम ने सोशल मीडिया “एक्स” पर लिखा “आखिरकार, बांग्ला विरोधी जमींदारों के खिलाफ एक लंबी लड़ाई के बाद सुनाली खातून और उनका नाबालिग बेटा भारत लौट आए हैं। यह दिन ऐतिहासिक पल के तौर पर याद किया जाएगा जो गरीब बंगालियों के उत्पीड़न को बेनकाब करता है। छह महीने की अकल्पनीय पीड़ा के बाद वह और उनका बेटा अपने देश लौट पाए हैं। 

इस्लाम ने लिखा, “सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भी, गरीब विरोधी केंद्र सरकार ने पिछले दो दिनों में कोई कार्रवाई नहीं की नतीजतन, हमारे वकीलों ने आज (शुक्रवार को) फिर मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया जिसके बाद यह वापसी संभव हुई।” 

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