अहमदाबाद/पाटन। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को एक बार फिर पाटीदार युवकों के गुस्से का शिकार होना पड़ा।… Read More
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(पिछले दिनों देश के अलग-अलग हिस्सों में आरक्षण की मांग को लेकर कई सामाजिक तबके सड़क पर… Read More
अप्रैल 2018 में कर्नाटक विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसलिए कर्नाटक राजनीतिक रूप से उथल-पुथल के दौर से गुज़र रहा है। आइये हम इस राज्य में चल रहे घटनाक्रम पर एक नज़र डालें- लिंगायतों पर दांव कर्नाटक में लिंगायत, जो कि राज्य की जनसंख्या का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा हैं, जुलाई व अगस्त 2017 में लगातार रैलियां करते नज़र आ रहे हैं; उनका कहना है कि वे हिन्दू नहीं हैं, अतः उन्हें एक पृथकधार्मिक समुदाय की मान्यता दी जाए। सिद्धारमैया का इस मांग को तवज्जो देते हुए इसके अध्ययन के लिए एक विशेष समिति का गठन करना मामले को बढ़ावा दे रहा है। यह भाजपा और संघ परिवार केलिए एक जबर्दस्त धक्का है, क्योंकि लिंगायत हाल-फिलहाल के चुनावों में भाजपा के वोट बैंक थे। सी-फोर का सर्वे दूसरी ओर सी-फोर एजेन्सी द्वारा 19 जुलाई से 10 अगस्त के बीच किये गए एक प्री-पोल सर्वे के परिणाम को इंडिया टुडे ने 20 अगस्त को प्रसारित किया। सर्वे के परिणाम ने खासी हलचल मचा दी है, क्योंकि वह कहता है कि यदि आज कर्नाटक में चुनाव करा दिये जाएं तो कांग्रेस की विजय निश्चित है। रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस को 120-132 सीटें और भाजपा को 60-72 सीटें मिलेंगी, जबकि देवेगौड़ा केजद (सेक्युलर) को 24-30 सीटें मिल सकती हैं। येदियुरप्पा पर शिकंजा तीसरी बात यह है कि जब कर्नाटक ने गुजरात के कांग्रेस विधायकों को ‘अमित शाह के हॉर्स ट्रेडिंग’ से बचने के लिए कांग्रेस मंत्री डी के शिवकुमार के संरक्षण में शरणगाह मुहय्या कराया, तब केंद्र कीमोदी सरकार ने बदले की कार्रवाई-स्वरूप शिवकुमार के घर पर आयकर विभाग के छापे पड़वाए। पर न ही शिवकुमार, न कर्नाटक कांग्रेस पर कोई फर्क पड़ा। बल्कि सिद्धारमय्या ने येदियुरप्पा… Read More
अहमदाबाद। गुजरात में बीजेपी ने अपनी डूबती नैया को बचाने के लिए अब अल्पसंख्यकों के पतवार का… Read More
इस साल फरवरी में बीएमसी (ब्रह्न्न मुंबई कार्पोरेशन) चुनाव नतीजों के ठीक अगले दिन, मुंबई की एक लोकल ट्रेन… Read More
चंडीगढ़। हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकास बराला को एक युवती… Read More