Saturday, February 24, 2024

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कभी आय में बीडीओ को मात देने वाले किसान की हैसियत अब चपरासी के बराबर भी नहीं

‘उत्तम खेती मध्यम बान, निकृष्ट चाकरी भीख निदान’ की पुरानी उक्ति अब कृषि प्रधान देश में पूर्णरूप से उलट गई है। खेती-किसानी घाटे का सौदा हो गया है। देश अन्न के मामले में तो आत्मनिर्भर हो गया है; लेकिन...

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