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संस्कृति-समाज

प्रकट-प्रछन्न जंज़ीरों से दबी कुचली इंसानियत की मुक्ति का गान हैं मोहन की कविताएं 

दलित साहित्यकारों और एक्टिविस्टों ने आधुनिकता के मुहावरे और ढांचे में अपने संघर्ष को स्थापित किया है। मूल्यों के असमान हिंदू सिस्टम के खिलाफ उन्होंने [more…]

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बीच बहस

सभी को आत्मबोध का समान अधिकार

जज मत करिए उन्हें समझिए “जेंडर ट्रबलः फेमेनिज्म एंड द सबवर्जन ऑफ आईडेंटिटी” (1990) जैसी मशहूर किताब की रचयिता और अमेरिकी अकादमिक और जेंडर मामलों [more…]

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बीच बहस

मरघट पर पहुंचा भारतीय लोकतंत्र

आजादी मिलने के बाद से हम लोकतंत्र और संसदीय राजनीति के जरिये जिस मुकाम पर आज पहुंचे हैं, उसमें 140 करोड़ भारतीयों की पहचान आज [more…]