एक दौर था जब सावन सिर्फ़ आसमान से नहीं, दिलों से भी बरसता था। कांच की हरी… Read More
जौवाद हसन
तंबाकू-एक ऐसा शब्द जो न तो अब अनपढ़ तबक़े की जुबान तक सीमित है, न ही झोपड़पट्टियों… Read More
कभी-कभी मुल्क का आइना यूं चकनाचूर हो जाता है कि हर शीशे में बस अफ़सोस और आंसुओं… Read More
कुछ लोग तारीख़ बनाते हैं, और कुछ लोग तारीख़ बन जाते हैं। राजीव गांधी उन चंद शख़्सियतों… Read More
भारतीय सेना की वर्दी, केवल कपड़े नहीं होती- वह एक प्रतीक है: निष्ठा, बलिदान और मातृभूमि के… Read More
हिंदुस्तान एक पुर-सुकून मुल्क है-मगर ख़ामोश नहीं। इसकी रगों में ठहराव है, मगर बेहोशी नहीं। इसकी सरज़मीं… Read More
जंग कोई तमाशा नहीं होती, जिसे एंकरों की जुबान से शाम के शो की तरह पेश किया… Read More
कुछ लम्हे अल्फ़ाज़ नहीं मांगते, वो ख़ुद तहरीर बन जाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर भी ऐसा ही एक… Read More
जब सुबहें मातम में लिपटी हों और शामें ख़ून की आहट लिए लौटें, जब फ़िज़ाओं में शहनाइयां… Read More
अगर किसी मुल्क की रूह पर सबसे गहरा ज़ख्म है, तो वो है- इंसानों की जबरन बनाई… Read More