पाकिस्तान को देखने का दुनिया और भारत के चश्मे एकदम अलग-अलग हैं?

पहलगाम पर आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ और शीघ्र ही युद्धविराम भी हो गया। भारत सरकार ने डोनाल्ड ट्रम्प के इस दावे को खारिज किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध रुकवाया, और कहा कि यह मामला द्विपक्षीय है और ट्रम्प इसमें हस्तक्षेप न करें।

हालांकि, भारत के मित्र रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रम्प के दावे की पुष्टि की। लेकिन यह समझ नहीं आया कि ट्रम्प बार-बार भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाने का श्रेय लेने के लिए क्यों उत्सुक हैं। उन्होंने इजराइल-ईरान युद्ध, जिसमें वे स्वयं शामिल हो गए थे, को भी ईरान के पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले होते ही रुकवा दिया।

लेकिन गाजा पर इजराइल द्वारा किए जा रहे दर्दनाक और हृदयविदारक हमलों को वे क्यों नहीं रोक रहे, जिसमें ज्यादातर बच्चे और महिलाएं मारे जा रहे हैं? भारत-पाकिस्तान और इजराइल-ईरान के मामलों में जहां वे समझदारी दिखाते हैं, वहीं गाजा की आबादी को पड़ोसी देशों जैसे जॉर्डन, मिस्र आदि में बसाने और गाजा को खाली कर पर्यटन केंद्र बनाने की बेतुकी बात करते हैं।

भारत सरकार कहती है कि भारत-पाकिस्तान मामला द्विपक्षीय है, लेकिन जब प्रतिनिधिमंडल विदेश भेजे गए, तो पाकिस्तान और चीन को छोड़कर दुनिया के तमाम देशों में वे गए। ये सात प्रतिनिधिमंडल विभिन्न देशों को यह समझाने गए थे कि पाकिस्तान आतंकवाद का प्रायोजक है, जो बात पिछले 11 वर्षों से नरेंद्र मोदी दुनिया भर में कहते रहे हैं। लेकिन दुनिया के देश इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि पाकिस्तान स्वयं आतंकवाद से पीड़ित है।

इस मामले में भारत दुनिया में अलग-थलग पड़ गया। प्रतिनिधिमंडलों के विदेश दौरों पर जो धन बर्बाद हुआ, वह अलग। इससे बड़ी भारत की कूटनीतिक असफलता शायद पहले कभी नहीं देखी गई। नरेंद्र मोदी द्वारा बड़े प्रयासों से बनाई गई छवि, कि उन्होंने दुनिया में भारत की धाक जमाई है, की पोल खुल गई। उल्टे, उन्होंने भारत की प्रतिष्ठा को धूमिल किया है। कोई भी हमें गंभीरता से लेने को तैयार नहीं है।

पाकिस्तान को 2025 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद विरोधी समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है। उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 100 करोड़ डॉलर का ऋण भी मिला है। 2011 में अमेरिका ने अपने देश में हुई बड़ी आतंकी घटना के दस वर्ष बाद ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में मारा, लेकिन उसने कभी यह नहीं कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को संरक्षण देता है, न ही उसने पाकिस्तान पर हमला किया। यह विचारणीय विषय है। कहीं ऐसा तो नहीं कि दुनिया जिस चश्मे से पाकिस्तान को देख रही है और हम जिस चश्मे से देख रहे हैं, वे एकदम अलग-अलग हैं?

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) मानती है कि यदि मामला द्विपक्षीय है, जैसा कि भारत सरकार बार-बार कह रही है, तो हमें सीधे पाकिस्तान से बात करनी होगी और आपसी मामले सुलझाने होंगे। चीन ने 2020 में हमारे 20 सैनिकों को मारा, फिर भी हम चीन के साथ बातचीत करते हैं और हमारा व्यापार दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है।

इस समय भारत का चीन से सालाना आयात 113.5 अरब डॉलर का है, जबकि निर्यात मात्र 14.3 अरब डॉलर का है, यानी आयात-निर्यात का अंतर 99.2 अरब डॉलर है। जाहिर है, यह व्यापार चीन के लिए अधिक लाभकारी है, और हम जरूरी सामानों के लिए चीन पर बुरी तरह निर्भर हो चुके हैं। लेकिन पाकिस्तान के साथ हमने सारे संबंध तोड़ रखे हैं। आखिर क्यों?

यदि भारत सरकार प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान नहीं भेजेगी, तो सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल वहां की सरकार और नागरिक समाज से बातचीत करने जाएगा। हमने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ से वीजा की मांग की है और भारत के गृह मंत्री अमित शाह से वाघा सीमा पार करने की अनुमति मांगी है।

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 25-30 मई को जम्मू-कश्मीर के युद्ध प्रभावित जिलों-राजौरी, पुंछ, और उड़ी-का दौरा किया। मारे गए लोगों के परिजनों की शिकायत थी कि यदि उन्हें पता होता कि 7 मई से युद्ध शुरू होने वाला है, तो वे इलाका खाली कर सुरक्षित स्थानों पर चले जाते और उनके परिवार के सदस्यों की जान बच जाती।

बताया गया था कि 7 मई को मॉक ड्रिल होगी। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों पर हमले से पहले पाकिस्तान को सूचित कर दिया गया था। जम्मू-कश्मीर के लोगों का कहना है कि यदि पाकिस्तान को पूर्व सूचना दी जा सकती थी, तो उन्हें भी दी जानी चाहिए थी।

21-25 जून को सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने श्रीनगर में समाजवाद की पाठशाला आयोजित की। इसके आखिरी दिन कार्यकर्ताओं की बैठक में भारत-फिलिस्तीन एकजुटता मंच का बिना अनुमति बैनर लगाने के आरोप में मैसुमा थाने पर बैठाया गया। स्थानीय कार्यकर्ता और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के महासचिव शहनवाज़ मीर को करीब 24 घंटे थाने में रखा गया। उन्हें पुलिस अधीक्षक तक को सफाई देनी पड़ी और अगले दिन नायब तहसीलदार के सामने एक कागज पर हस्ताक्षर करवाए गए।

शहनवाज़ मीर को जिस तरह परेशान किया गया, वैसा ही उत्पीड़न कश्मीरी लोगों का रोज़ाना होता है। लेकिन कश्मीरी लोगों के साथ जो हो रहा है, वह फिलिस्तीन की जनता द्वारा इजराइल के निरंतर अत्याचारों की तुलना में कुछ भी नहीं है। इजराइल युद्ध अपराध का दोषी है, जो बच्चों को खाने-पीने की सामग्री से भी वंचित कर रहा है। उसने भूख को भी हथियार बना लिया है। यदि हम और कुछ नहीं कर सकते, तो अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष करने वालों के साथ कम से कम हमें खड़ा होना चाहिए।

(संदीप पांडेय सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के महासचिव हैं)

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