गांधीनगर। कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी ने वंदे मातरम के मुद्दे पर भाजपा को घेरते हुए कहा कि ऐसे लोगों के मुँह से वंदे मातरम अच्छा नहीं लगता जिनके नाम एप्सटीन फाइल में हों, जिन्होंने बिलकिस बानो के बलात्कारियों का ढोल नगाड़ों और फूल मालाओं से स्वागत किया हो और जिनका नाम एक गुजराती महिला की जासूसी करवाने में आया हो।
मेवानी गुजरात विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बोल रहे थे। सत्र के दौरान “वन्दे मातरम” के मुद्दे पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
मेवाणी ने कहा कि वन्दे मातरम आज़ादी की लड़ाई का ऐतिहासिक नारा रहा है और इसे पहली बार 1894 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा से जुड़े लोग देश की आज़ादी के लिए नहीं लड़े बल्कि अंग्रेजों के साथ रहे।
मेवाणी ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि वह संघ के ऐसे 11 लोगों के नाम बताए, जिन्होंने वन्दे मातरम गाते हुए देश की आज़ादी के लिए शहादत दी हो। भाजपा ने मेवाणी भाषा को आपत्तिजनक बता दिया।
मेवानी ने आरोप लगाया कि भाजपा किसानों, युवाओं, बुलडोज़र राज, ड्रग्स जैसे गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए हमेशा की तरह हिन्दू मुस्लिम के मुद्दों पर बात कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा के सत्र के दौरान ही जग्लेश्वर में लगभग 1400 मुस्लिमों के मकान तोड़ दिए गए ताकि इस दौरान हिन्दुओं के घरों पर चले बुलडोज़र की चर्चा न हो। इसी प्रकार अन्य मुद्दों से बचने के वन्दे मातरम के 150वीं वर्ष गाँठ के जश्न मनाने का निर्णय ले लिया।
मेवाणी ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और सभी जातियों के लोगों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया और वन्दे मातरम का नारा लगाया। उन्होंने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान करीब 10 वर्ष जेल में बिताए।
उन्होंने अपने भाषण के अंत में कहा कि वन्दे मातरम पर सभी भारतीयों का समान अधिकार है और इसे राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
विधानसभा में इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे बजट सत्र का माहौल राजनीतिक रूप से और अधिक गरमा गया।
(कलीम सिद्दीकी वरिष्ठ पत्रकार हैं।)