दिल्ली के असंगठित क्षेत्र के 13 लाख मजदूरों को  मिलेगा आवास, बस यात्रा, पेंशन और लाइफ इंश्योरेंस

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नई दिल्ली। दिल्ली में डीटीसी बसों में महिलाओं की फ्री यात्रा की सुविधा के बाद ये सुविधा अब मजदूरों को भी मिलने वाली है। मजदूरों को डीटीसी बसों में फ्री यात्रा के लिए सालाना डीटीसी पास दिया जाएगा। इसके अलावा दिल्ली सरकार मजदूरों को कई तरह की सुविधाएं देगी, जिनमें फ्री लाइफ इंश्योरेंस, बच्चों के लिए फ्री कोचिंग, ट्रांजिट हॉस्टल की सुविधाएं शामिल हैं। शहर में पंजीकृत 13 लाख निर्माण श्रमिकों को दिल्ली सरकार की तरफ से ये सुविधाएं दी जाएंगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसकी घोषणा की है। 

केजरीवाल ने सोमवार को श्रम विभाग के अधिकारियों से दिल्ली में रहने वाले मजदूरों के लिए घरों और हॉस्टलों की व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने बोर्ड के अधिकारियों को डीटीसी के अधिकारियों और लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों से मिलकर योजनाओं को जल्द से जल्द लागू करने की लागत का चार्ट बनाने का निर्देश दिया।

इस बात की जानकारी दिल्ली सीएमओ ने ट्विटर पर देते हुए कहा है कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने आज श्रम विभाग के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। माननीय मुख्यमंत्री जी ने विभाग को आदेश दिए कि सरकारी सुविधाओं एवं योजनाओं को दिल्ली में पंजीकृत सभी 13 लाख श्रमिकों तक पहुंचाने के लिए काम हो। 

केजरीवाल ने मजदूरों की हालत पर चिंता जताते हुए प्रत्येक पंजीकृत निर्माण श्रमिक को सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए विभाग को एक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया।

राज्य सरकार ने घोषणा की है कि बड़े पैमाने पर राजमिस्त्री, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, बढ़ई और पेंटरों को टूलकिट और कौशल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उन्होंने मजदूरों के बच्चों के लिए साइटों पर क्रेच बनाए जाने की भी घोषणा की।

इससे पहले, उन्होंने बोर्ड के अधिकारियों को इस साल मजदूरों के कल्याण पर कम से कम 25 प्रतिशत धन का उपयोग करने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने के लिए कहा था। सीएम ने सभी मजदूरों तक पहुंच पाने में बोर्ड की अक्षमता पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि भले ही बोर्ड में 13 लाख मजदूर पंजीकृत हैं, लेकिन इसने उनके अस्तित्व को सत्यापित करने और उन तक पहुंचने के लिए कोई तंत्र विकसित नहीं किया है।

उन्होंने कहा, ‘अगर विभाग योजना के नाम पर इन योजनाओं का लाभ केवल 400-500 लोगों तक पहुंचा रहा है तो विभाग को ही चलाने का कोई मतलब नहीं है। कल्याणकारी योजनाओं की तुलना में विभाग की लागत अधिक होगी।’

उन्होंने अधिकारियों को इस वर्ष जून तक पंजीकृत मजदूरों की जांच के लिए राजस्व विभाग की टीमों के साथ एक उचित अभ्यास करने का भी निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने उन्हें यह भी निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर 60 वर्ष से अधिक आयु के पंजीकृत मजदूरों की संख्या का पता लगाकर बतायें, ताकि उन्हें पेंशन का लाभ दिया जा सके।

उन्होंने कहा कि ‘सभी पंजीकृत मजदूरों से उनके फोन पर संपर्क करना शुरू करें। सभी कर्मचारियों को उनके फोन पर एसएमएस और आईवीआरएस संदेश भेजने की लागत टीवी और रेडियो अभियान चलाने की तुलना में बहुत कम होगी और यह कहीं अधिक प्रभावी होगा। सरकार लागत का 75 प्रतिशत खर्च करके मजदूरों को एलआईजी फ्लैट भी आवंटित करेगी, जबकि लाभार्थी को केवल 25 प्रतिशत का भुगतान करना होगा।

(कुमुद प्रसाद जनचौक की सब एडिटर हैं।)

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