फ्रांस के एक और पत्रकार को केंद्र ने देश से निकाला

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नई दिल्ली। दो विदेशी पत्रकारों वनेसा डौगनैक और अवनी डियास का वीजा परमिट खारिज होने के बाद फ्रांसीसी पत्रकार सेबैस्टियन फारसिस जो भारत में रेडियो फ्रांस इंटरनेशनल एंड लिबरेशन के पत्रकार हैं, ने आरोप लगाया है कि उन्हें भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया गया क्योंकि सरकार ने उनके जर्नलिस्ट परमिट को नवीनीकृत करने से मना कर दिया है।

यह घटना चार महीने बाद आयी है जब एक और फ्रांसीसी पत्रकार डौगनैक ने कहा था कि उन्हें भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। डौगनैक की तरह फारसिस के पास भी ओसीआई स्टेटस है।

बृहस्पतिवार को एक्स पर एक बयान में उन्होंने कहा कि 17 जून को मुझे उस भारत को छोड़ने के लिए के बाध्य किया गया, जहां मैंने रेडियो फ्रांस इंटरनेशनल, रेडियो फ्रांस, लिबरेशन एंड स्विस एंड बेल्जियन पब्लिक रेडियो के रिपोर्टर के तौर पर 13 साल तक एक पत्रकार के तौर पर काम किया।

फारसिस ने बताया कि 7 मार्च को गृहमंत्रालय ने उनके जर्नलिस्ट परमिट का नवीनीकरण करने से मना कर दिया। और इस तरह से उनके प्रोफेशन की प्रैक्टिस और उनके सभी आय के स्रोतों से वंचित कर दिया गया।

काम पर पाबंदी लगाये जाने के इस फैसले के बारे में कोई कारण नहीं बताया गया। जबकि इस लिहाज से बार-बार औपचारिक तौर पर पूछा गया। उनका कहना था कि मैंने अपील करने की कोशिश भी की लेकिन उसका कोई भी नतीजा नहीं निकला।

फारसिस ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्हें अब तक हमेशा सभी जरूरी वीजा और पहचानें हासिल होती रही हैं। मैंने भारत में विदेशी पत्रकारों के लिए लागू किए जाने वाले रेगुलेशन का पालन किया है और बगैर अनुमति के किसी भी पाबंदी वाले क्षेत्र या फिर संरक्षित इलाके में काम नहीं किया।

उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा कुछ भी पहले से विशेष नहीं बताया गया जो मुझे चेतावनी के तौर पर लगती। फारसिस ने कहा कि गृहमंत्रालय ने बहुत सारे मौकों पर यहां तक कि हमें सरहदी इलाकों तक के रिपोर्ट की परमिट दी है। भारत के ढेर सारे सरहदी इलाके विदेशी पत्रकारों के लिए प्रतिबंधित हैं। इसलिए काम पर यह पाबंदी मुझे एक झटके की तरह लगा है। यह हमें भारतीय चुनाव के मौके पर बताया गया है….जिसे मुझे कवर करने से मना कर दिया गया। ऐसा मुझे लगता है कि यह एक तरह की सेंशरशिप थी।

फारसिस अब फ्रांस में हैं और वह अपने आवेदन पर नई परमिट हासिल करने के लिए भारत सरकार के फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वह एक ओसीआई कार्ड होल्डर हैं क्योंकि उन्होंने एक भारतीय से शादी कर रखी है।

डौगनैक जिन्होंने एक भारतीय से शादी कर रखी है और पिछले 22 सालों से भारत में रह रही थीं, फरवरी में उन्हें अपने ओसीआई कार्ड के रद्द होने के बारे में भारत सरकार की ओर से सूचना मिली। मंत्रालय ने उन पर अपनी गलत रिपोर्टिंग के जरिये भारत के बारे में नकारात्मक माहौल बनाने का आरोप लगाया था। 

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