Saturday, December 4, 2021

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आर्यन खान की एनसीबी पकड़: न सूत, न कपास जुलाहों में लट्ठमलट्ठ

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मुंबइया फिल्मों के स्टार शाहरूख खान और उनकी मूलतः हिन्दू धर्म की पत्नी गौरी खान के अब वयस्क हो चुके पुत्र आर्यन खान ने यदि अपराध किया है तो क़ानून उसे सजा देगा। बड़ा प्रश्न है हमारे देश में करोड़ों युवाओं को जीवन के वास्तविक मुद्दों से विमुख करने के गोरखधंधा के तहत मादक पदार्थ कौन कैसे पहुँचा रहा है और इसमें सरकार का कितना हाथ है। सवाल ये भी है इंडिया दैट इज भारत की केन्द्रीय सत्ता पर पिछले सात बरस से काबिज नरेंद्र मोदी सरकार की खैरख्वाह ‘ हड़बड़ गड़बड़ गोदी मीडिया मुस्लिम उपनामधारी आर्यन के मामले को क्यों उछाल रही है जिसकी तहकीकात में सतह से तह में जाने पर अभियोजन पक्ष , नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को न सूत मिला न कपास। 

मुंबई क्रूज ड्रग्स मामला में आर्यन कोर्ट से गुरुवार को भी जमानत नहीं मिली। उसे और कुछ दिन न्यायिक हिरासत में रहना होगा। क्योंकि जिस मुंबई सेशंस कोर्ट में उसकी जमानत याचिका लंबित है वह 15 से 19 अक्टूबर तक के लिए अवकाश पर है। वह अभी मुंबई के ही कुख्यात आर्थर रोड जेल में बंद हैं। 

कट्टरपंथियों की नजर में फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और स्क्रिप्ट लेखक-गीतकार जावेद अख्तर ही नहीं बल्कि ‘ तीनों खान ‘: शाहरूख , आमिर खान  और सलमान खान सबसे बड़ा दोष मुसलमान होना हैं। इसी आड़ में उनका चरित्र हनन किया जाता है। मोदी जी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बड़े नेता रहे प्रमोद महाजन के पुत्र और पार्टी संसद पूनम महाजन के भाई राहुल महाजन पर नशेड़ी होने का आरोप होने पर उनका और उनके परिजनों का चरित्र हनन इसलिए नहीं किया जाता कि वे मुसलमान नहीं हैं।  

क्रूज जहाज

मोदी सरकार के अधीन एनसीबी के छापामारों ने 23 बरस के आर्यन को 3 अक्टूबर को मुंबई तटवर्ती अरब सागर में गोवा जा रहे सैर सपाटा में लगने वाले क्रूज जहाज में अपने दोस्तों के साथ रेव पार्टी में प्रतिबंधित मादक पदार्थ के इस्तेमाल के आरोप में गिरफ्तार किया। घटना का सिलसिला रविवार गांधी जयंती के दिन 2 अक्टूबर को दोपहर शुरू हुआ जब आर्यन को क्रूज शिप पर पार्टी में आमंत्रित किया गया था। उन्हें प्रतीक गब्बा नामक व्यक्ति ने आमंत्रित किया था  जिसे गिरफ्तार नहीं किया गया है। आर्यन अपने दोस्त अरबाज मर्चेंट के साथ क्रूज पर गए थे। जब वह चेक-इन कर रहे थे, उन्‍हें एनसीबी ने रोक लिया। एनसीबी के मुताबिक जो हुआ वह पंचनामा में है।

आर्यन के वकीलों ने उसकी उसकी गिरफ़्तारी के तुरन बाद जमानत के लिए एक मजिस्ट्रेट की अदालत की शरण ली । मजिस्ट्रेट ने कहा उन्हें जमानत याचिका पर विचार करने का अधिकार नहीं है। इस पर आर्यन के वकील विशेष अदालत पहुंचे। 

जमानत याचिका में आर्यन को निर्दोष बता दावा किया गया है उन्होंने कोई अपराध नहीं किया, उन्हें फंसाया गया है। याचिका के अनुसार यह बताने रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं है कि आर्यन किसी भी मादक पदार्थ के उत्पादन, निर्माण, पास में रखने, बिक्री या खरीद से जुड़े हैं. याचिका में कहा गया है कि आर्यन के पास से कोई मादक पदार्थ या कोई अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। उनके फरार होने या न्याय से भागने की कोई संभावना नहीं है।

आर्यन की जमानत अर्जी को अडिशनल मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया । सेशन कोर्ट में भी आर्यन को जमानत नहीं मिलती है तो उसके वकीलों को हाईकोर्ट जाना होगा। अभी वह 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में है। 

मुंबई में न्यायाधीश वीवी पाटिल की विशेष अदालत ने सोमवार को कहा वह आर्यन की जमानत याचिका पर 13 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। अदालत ने एनसीबी को याचिका पर जवाब दाखिल करने कहा। मामला केन्द्रीय कानून नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटाँस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत अदालत में है। एनसीबी ने कहा याचिका पर फौरन सुनवाई की दरकार नहीं है और उसे जवाब में हलफनामा दाखिल करने हफ्ते भर का समय दिया जाए। बचाव पक्ष का तर्क था आर्यन को फंसाया गया है और उसे जमानत पर रिहा करने से जांच बाधित नहीं होगी । 

आर्यन के वकील अमित देसाई ने सोमवार को जमानत याचिका का जिक्र किया तो एनसीबी के वकीलों ने जवाब देने और हलफनामा दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय मांग कहा मामले की जांच जारी है। देसाई ने इसका विरोध कर कहा यह एक व्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल है। आरोपी को जमानत पर रिहा करने से मामले में जांच बंद नहीं होगी। मेरे मुवक्किल को हिरासत में रखना जरूरी नहीं है क्योंकि उनके पास से कुछ भी बरामद नहीं हुआ है। गिरफ्तारी के बाद से वह एक हफ्ते से एनसीबी की हिरासत में हैं और दो बार उनका बयान दर्ज किया गया है। अब उन्हें जेल में रखने की क्या जरूरत है? 

इस मामला में ही गिरफ्तार आर्यन के मुनमुन धमेचा, अरबाज मर्चेंट, नूपुर सतीजा और मोहक जायसवाल नामक दोस्तों ने भी जमानत याचिकाएँ दाखिल की हैं। आर्यन खान के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8 (सी) , 20 (बी) , 27, 28, 29 और 35 के तहत मामला दर्ज है। एनसीबी इस मामले में 20 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

व्हाट्सअप्प चैट

अभियोजन पक्ष की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल (एएसजी) अनिल सिंह ने कोर्ट में आरोपियों के बीच के व्हाट्सअप्प चैट दिखाए और काहा  इनमें ड्रग्‍स की भारी मात्रा में खरीद की बातचीत पर्सनल यूज के लिए नहीं कुछ और है।हमने विदेशी नागरिक का पता लगाने विदेश मंत्रालय से बात की है। साजिश मामले में जरूरी नहीं कि सभी आरोपियों के पास कमर्शियल या माध्यम मात्रा में ड्रग्‍स मिले। धारा 29 है तो साजिश लागू होती है। आरोपियों का अपराध साबित होने पर साजिशकर्ता के समान दंडित किया जाएगा।चैट में विदेशी नागरिकों के साथ हार्ड ड्रग्‍स की बात है। हमने अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया है। उनमें 4 ड्रग तस्कर भी हैं। उनमें से एक के पास ड्रग कमर्शियल मात्रा भी मिली थी। आर्यन और मर्चेंट के उनसे बात करने के सबूत हैं। पंचनामा के मुताबिक ड्रग्‍स आर्यन के से नहीं बल्कि अरबाज के पास से मिला। पूरा देश मादक पदार्थों की तस्करी और सेवन के गंभीर अपराध से चिंतित है।आए दिन पार्टियां होती हैं, जिनमें ड्रग्स का इस्तेमाल कॉलेज छात्र भी करते हैं।  

मुनमुन धमेचा के वकील ने कहा उनकी मुवक्किल पेशे से मॉडल हैं, रैंप वॉक करती हैं। उन्‍हें बलदेव ने इन्‍वाइट किया था। वह अकेली आईं तो वहाँ मौजूद  एक लड़की और बलदेव को आरोपी नहीं बनाया गया हैं। मुनमुन के पहुंचने के 2-3 मिनट के भीतर छापेमारी हुई। उन्हें मुनमुन के कमरे में एक पैकेट मिला। पंचनामा के अनुसार कमरे में दो दोस्त थे। उन्हें 0.5 ग्राम ड्रग्स , कॉर्नर में रखा मिला। पंचनामे में लिखा है‍ कि मुनमुन के पास से कुछ भी बरामद नहीं मिला पर सौम्या सिंह के पास से बरामदगी हुई। 

इस स्तंभकार के न्यायिक सूत्रों के अनुसार में पंचनामा  कोई फोन जब्त नहीं दर्शाया गया है। इसलिए पूरी वॉट्सऐप चैट खारिज हो जाएगी। आर्यन के पास से कोई जब्‍ती नहीं हुई है।आर्यन के कैश नहीं था। जाहिर है उनके ड्रग्स लेने या बेचने की कोई योजना नहीं थी।

आर्यन की पैरवी कर रहे वकील अमित देसाई ने 2002 में ‘ हिट ऐंड रन केस ‘ में फिल्म अभिनेता सलमान खान को जमानत दिलवाई थी। 

विनीत नारायण 

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली में पढ़े चर्चित पत्रकार विनीत नारायण ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में शाहरुख़ खान, फिल्म अदाकारा सिमी गरेवाल को कहते हैं उनका बेटा दो बरस की आयु से ही अगर ड्रग्स ले या सेक्स करे तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। अगर यह वीडियो सही है तो मज़ाक़ में भी एक पिता का अपने बेटे के विषय में ऐसा सोचना बहुत चिंताजनक है। 

उनके मुताबिक जिस देश में भी ड्रग्स का धंधा फल-फूल रहा है उसे वहाँ की पुलिस और सरकार का परोक्ष संरक्षण प्राप्त होता है। वरना हर देश की सीमाओं पर कड़ी सुरक्षा और देश में आने वाले हवाई जहाज़ों, पानी के जहाज़ों और सड़क वाहनों की कस्टम तलाशी के बावजूद ड्रग्स कैसे अंदर आ पाते हैं? ये नागरिकों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि पूरे देश की धमनियों में फैलने वाली ड्रग्स का प्रभाव न सिर्फ़ युवा पीढ़ी को बर्बाद करता है बल्कि लाखों औरतों को विधवा और करोड़ों बच्चों को अनाथ बना देता है। 

विनीत जी का दो टूक कहना है आर्यन या उससे पहले रिया चक्रवर्ती के मामले में हमारी मीडिया ने जितना उछल कूद किया उसके एक अंश की भी ऊर्जा ये जानने में नहीं लगाया गरीब से अमीर तक के हाथ में, पूरे देश में ड्रग्स पहुँचती कैसे है? 

हाल में एनसीबी ने गुजरात में मोदी जी के करीबी व्यवसाई गौतम अडानी के निजी प्रबंधन में गुजरात के मुंदरा बंदरगाह से 3000 किलो ड्रग्स पकड़ी जो अफगानिस्तान से टेल्कम पाउडर बता कर आयात की गई थी। पर इस पूरे मामले पर चारण और भाट मीडिया ने चुप्पी साध ली। ये बहुत ख़ौफ़नाक है। ये हमारे मीडिया के पतन की पराकाष्ठा का प्रमाण है। 

20 सितम्बर को हैदराबाद के अंग्रेज़ी अख़बार ‘डेक्कन क्रानिकल’ ने एक खोजी खबर छापी कि अडानी के ही बंदरगाह के रास्ते जून 2021 में देश में खुले बाज़ार में 72 हज़ार करोड़ रुपए कीमत का 25 टन ड्रग्स ( सेमी कट टेल्क्म पाउडर ब्लॉक )। हैरानी है अडानी पोर्ट से राजस्थान की ट्रांसपोर्ट कम्पनी के जिस ट्रक नम्बर RJ 01 GB 8328 में ये 25 टन माल रवाना किया गया, उसने एक भी टोल बैरियर पार नहीं किया। मतलब दस्तावेज़ों में ट्रक का नाम, नम्बर फ़र्ज़ी तरीक़े से लिखा गया। इस 25 टन के खेप का आयात करने वाला व्यक्ति माछेवरापु सुधाकर चेन्नई का रहने वाला है। इसने अपनी पत्नी वैशाली के नाम ‘आशि ट्रेडिंग कम्पनी’ के बैनर तले ये माल आयात किया। इस कम्पनी को जीएसटी, विजयवाड़ा के एक रिहायशी पते के आधार पर दिया गया है, जिसे दस्तावेज़ों में कम्पनी का मुख्यालय बताया गया है। 

‘डेक्कन क्रानिकल’ के संवाददाता, एन वंशी श्रीनिवास ने विजयवाड़ा के सत्यनारायणापुरम जाकर तहक़ीक़ात की तो पता चला कि वह पता वैशाली की माँ के घर का है, जहां किसी भी कम्पनी का कोई कार्यालय नहीं है।आगे पता चला पिछले वर्ष पंजीकृत इस कम्पनी का घोषित उद्देश्य काकीनाडा बंदरगाह से चावल का निर्यात करना था। पर पिछले पूरे एक वर्ष में अडानी के बंदरगाह से जून 2021 में आयात किए गए इस 25 टन तथाकथित ‘टेल्क्म पाउडर’ के सिवाय इस कम्पनी ने कोई और कारोबार नहीं किया।  इतने स्पष्ट प्रमाणों और इतनी संदेहास्पद गतिविधियों पर देश का मीडिया कैसे ख़ामोश बैठा है? 

अजय ब्रमहात्मज 

वरीय फिल्म पत्रकार अजय ब्रमहात्मज ने 12 अक्टूबर को फेसबुक पर अपने पोस्ट में लिखा, “ फिल्म इंडस्ट्री के खिलाफ सत्ता और समाज के एक तबके द्वारा फैलाई गई नियोजित घृणा और तिरस्कार का फोड़ा शाहरुख खान के नाम पर फूटा है।जल्दी ही इसकी चपेट में और भी हस्तियां आएंगी। और फोड़े फूटेंगे ।गद्दारी, देशद्रोह और राष्ट्रविरोधी आदि शब्दों का अर्थपतन हो गया है। लांछन है, लगा दो “। 

लेकिन उन्होंने इस पोस्ट पर तमाम लोगों के अहम प्रश्न का कोई जवाब नहीं दिया कि वह फिल्म अदाकार सुशांत सिंह की कथित आत्महत्या मामले में चुप क्यों रहे और क्या ये पोस्ट शाहरुख खान से कुछ पैसे लेने की गरज से लिखा गया है। इस स्तंभकार के भी पूछने पर ये नहीं बताया उन्होंने आम तौर पर फिल्मी सितारों की तरह ट्विटर पर ही सक्रिय रहने के बावजूद ये पोस्ट फेसबुक पर क्यों डाला ?

हम सब जानते हैं कि तीनों ही खान शाहरुख, आमिर , और सलमान धर्मनिरपेक्ष भी हैं और देशभक्त भी। निश्चित रूप से शाहरुख को टारगेट निजी कारणों से किया जा रहा है। फिल्मी सितारे लोगो का बेशुमार प्यार पाते हैं और साम्प्रदाईक  घृणा के भी आसान शिकार हो जाए हैं। यह हमारे सामाज का विकट विरोधाभास है।

और अंत में एक कविता जों 2015 में भारत में धार्मिक असहिष्णुता बढ़ने पर शाहरूक खान के व्यक्तव्य देने पर उन्हें सम्प्रदाईक सियासत करने वालों द्वारा आतंकवादी करार दिए जाने पर हमने 2015 में मुंबई में लिखी थी 

सिनेमा और समाज 

*****

दिलीप कुमार साहेब

आप कुछ ना बोलना

आपके , हम सबके लिए

गाते-गाते मोहम्मद रफी गुजर गए

ये तो मत ही बोलना

आपको बॉम्बे टॉकीज़ के दिनों

यूसूफ खान नाम छोड़

दिलीप कुमार का नाम इक हिन्दू

भगवती चरण वर्मा ने दिया था 

ऐ आर रहमान

आपको बिथोवन की कसम

ना बोलना कि आपका नाम

दिलीप कुमार साहेब

के नाम पर

दिलीप कुमार ही था

कत्तई ना बोलना

आप बालिग़ होकर

स्वेच्छा से दिलीप कुमार से

ए आर रहमान बन गए

नौशाद अली साहेब

आप गुजर गए वर्ना हम आपको

क्या मुंह दिखाते

वहीदा रहमान जी

हम और शर्मिन्दा होंगे

गर आपको भी बोलना पड़े

खुदा का वास्ता नर्गिस

कब्र से भी ना बोलना

सुनील दत्त बोल-बोल गुज़र गए

मदर इंडिया से पाली हिल्स की

पहली पडोसन सायरा बानो तक

आमिर खान

आपको आपके सबसे छोटे बच्चे

आज़ाद राव खान की कसम

अब और ना बोलना

बहुत बोल चुके

सबने देखा है

सत्यमेव जयते

सैफ अली खान

आपके बोलने की जरुरत नहीं

आपकी अम्मा बोल चुकी

हाँ , तस्दीक कर देना

आपके पिता

मंसूर अली खान पटौदी संग उनके निकाह बाद भी

हमने उन्हें शर्मिला टैगोर ही जाना

आयेशा खान नहीं

सलमान खान 

तुम तो बीच में ना ही पड़ना

हिन्दू से मुस्लिम बनीं तुम्हारी माँ 

और कैथोलिक ईसाई बनी रहीं 

सौतेली माँ हेलन 

दोनों माँ की कसम

तुम कुछ भी बोले

तो लोचा आ जाएगा

गुलज़ार साहिब

आप सबसे पहले बोले

सही किया , बोस्की कसम

मर कर भी कुछ तो चैन 

मिला होगा

मीना कुमारी को

शाहरूख एक बार जो बोला सो बोला

जन्मदिन था आपका

शायद माफ ही कर देते

वो सब जिन्हे

आपके नाम से ज्यादा

काम से मतलब है

लाख टके का काम किया

हम सब को आईना दिखा कर

पर आज़ाद हिन्द फ़ौज़ के सिपाही रहे 

अपने नाना शाहनवाज़ खान 

बीवी गौरी

और तीनों बच्चों

आर्यन , सुहाना और अ-ब्-राम

की भी कसम 

और कुछ ना बोलना

टुकड़े -टुकड़े हो जायेंगे 

आईने हर हिन्दुस्तानी के

नसीर साहब

हम समझते हैं 

क्यो गुस्सा आता है आपको 

अलबर्ट पिंटो की तरह 

हालिया इंटरव्यू में भी बोल गए 

बहुतों ने नहीं सुना 

बहुतों ने पढ़ा और सोचा भी 

लड़ना तो है हर जगह 

खेतों से लेकर फिल्मों तक 

अमिताभ बच्चन

आप खामोश ही रहना

आपको अपने दिवंगत कवि-पिता

और दिवंगत सहृदय माँ की भी कसम

(चंद्रप्रकाश झा लेखक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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