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कदाचार के आरोप में बार काउंसिल ऑफ यूपी के अध्यक्ष हरिशंकर सिंह को बीसीआई ने हटाया

बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के वर्तमान अध्यक्ष हरिशंकर सिंह को बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अध्यक्ष पद पर काम करने से तत्काल प्रभाव से रोक दिया है और उनके कर्तव्यों के निर्वहन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। उनकी जगह पर उपाध्यक्ष देवेन्द्र मिश्र नगरहा को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया है। यूपी बार काउंसिल के सदस्यों ने तत्कालीन अध्यक्ष को हटाए जाने की मांग की थी। यूपी बार काउंसिल के सदस्यों के प्रत्यावेदन पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कार्रवाई की।यूपी बार काउंसिल के सदस्य अमरेंद्र नाथ ने जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान अध्यक्ष हरिशंकर सिंह को पद से हटा दिया गया है।

दो पृष्ठों के आदेश में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने कहा है कि हरि शंकर सिंह को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने से तत्काल प्रभाव से रोका जाता है। साथ ही हरि शंकर सिंह को निर्देश दिया जाता है कि वे यह बताएं कि किस परिस्थिति में उन्होंने एक अनधिकृत क्लर्क के साथ एक अलग संयुक्त बैंक खाता खोला और बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से कोई अधिकार प्राप्त किए बिना, उस खाते में नामांकन शुल्क के रूप में एकत्रित राशि को डायवर्ट कर दिया। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने हरि शंकर सिंह से दस दिनों के भीतर कदाचार के कथित कृत्यों के लिए स्पष्टीकरण मांगा है। उनके स्थान पर, बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष  देवेंद्र मिश्रा नागरा बीसीआई के आदेश के अनुसार अध्यक्ष के पद का कार्यभार संभालेंगे।

14 मार्च के बाद हरि शंकर सिंह द्वारा पारित सभी आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए बीसीआई ने उन्हें यह स्पष्ट करने के निर्देश भी दिए हैं कि कैसे, बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से अधिकार प्राप्त किए बिना, राम जीत सिंह को बहाल करने के लिए उन्होंने 15 मार्च को एक “अवैध आदेश” पारित किया था। 15 मार्च को रामजीत सिंह यादव को कदाचार के आरोप में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव के पद से निलंबित कर दिया गया था। उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सिंह द्वारा सौंपी गई एक जांच रिपोर्ट के अनुसार रामजीत सिंह यादव पर लगभग 72 लाख रुपये के गबन का आरोप है ।

बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सदस्यों की कई शिकायतें मिलने के बाद यह आदेश बीसीआई द्वारा पारित किया गया है। ऐसी शिकायतों में आरोप लगाया गया कि हरि शंकर सिंह पद का दुरुपयोग धन का दुरुपयोग, और ओर कदाचार किया है।सदस्यों ने बीसीआई से हरि शंकर सिंह को आगे की पैंतरेबाजी और चीजों में हेरफेर करने से रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की थी। शिकायतों में यह भी कहा गया था हरि शंकर सिंह को अगर तुरंत प्रतिबंधित नहीं किया जाता है कि वे दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।

दरअसल पिछले दिनों यूपी बार कौंसिल के अध्यक्ष और सदस्यों के बीच तनातनी बढ़ गयी थी । नए घटनाक्रम में बार काउंसिल अध्यक्ष ने तीन साल से निलंबित चल रहे सचिव डॉ. रामजीत यादव को क्लीन चिट देते हुए बहाल कर दिया था। आठ सदस्यों ने 17 मई को बैठक बुलाई थी । इधर अध्यक्ष ने बैठक वाले दिन काउंसिल में अवकाश घोषित कर दिया था। साथ ही बिना किसी प्रस्ताव के 21मई को बैठक बुलाई थी । बैठक बुलाने वाले सदस्यों ने भी अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था । उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को अध्यक्ष के विरुद्ध प्रस्ताव भेजा था और 17 मई की बैठक में अध्यक्ष के खिलाफ एजेंडे पर विचार करने को कहा था।

हरिशंकर ‌सिंह का कहना था कि उन्होंने डॉ. रामजीत यादव पर लगे आरोपों की गहनता से जांच की और कागजात के अवलोकन के बाद पाया कि उन पर लगाया गया कोई भी आरोप साबित नहीं होता है। इस कारण उन्हें बहाल कर दिया गया है।यह नहीं बताया गया कि किस जांच कमेटी ने निर्दोष करार दिया है। अध्यक्ष का कहना था कि प्रयागराज में कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। बार काउंसिल को सेनेटाइज भी कराना है। इसे देखते हुए 17 मई को कार्यालय बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

बैठक बुलाने वाले सदस्यों अमरेंद्र नाथ सिंह, देवेंद्र मिश्र नगरहा, अब्दुल रज्जाक खां, प्रशांत सिंह अटल, अंकज मिश्र, अखिलेश अवस्थी ने अध्यक्ष के इस कदम की भर्त्सना करते हुए अध्यक्ष के विरुद्ध एजेंडे पर चर्चा करने की बात कही थी । पूर्व अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह का कहना है कि अध्यक्ष ने अपनी मर्जी से बैंक खाता खोलकर पंजीकरण की रकम उसमें जमा की। साथ ही हाईकोर्ट के जज द्वारा की गई जांच में ‌सचिव पर आरोप पाए जाने के बावजूद बिना सदन को विश्वास में लिए उन्हें बहाल कर दिया। सदस्यों के चार प्रस्ताव हैं, जिसमें अध्यक्ष की मनमानी, अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव, फंड से पांच करोड़ निकलना आदि शामिल हैं ।

इसके पहले बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव डॉ. रामजीत सिंह यादव को निलंबित कर दिया गया था। उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितता का आरोप थे रिटायर्ड अपर जिला जज आरसी मिश्र अस्थायी सचिव बनाए गए थे। सचिव डॉ. रामजीत पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगने के बाद बार काउंसिल की आपातकालीन बैठक बुलाई गई थी। बैठक में निर्णय लिया गया कि पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एपी सिंह करेंगे। इस दौरान वह सचिव के तमाम कार्यों और निर्देशों की जांच करेंगे। बैठक में आरोप लगाया गया था कि सचिव रामजीत सिंह यादव द्वारा अपने कर्तव्यों के पालन और ऋण वितरण तथा ओवर टाइम भुगतान में गंभीर अनियमितता बरती गई है। उनको कार्यों के प्रति लापरवाही और नियम विरुद्ध तरीके से काम करने का दोषी पाया गया है। इसलिए उनको तत्काल प्रभाव से निलंबित कर पूरे मामले की जांच कराने का निर्णय लिया गया है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ क़ानूनी मामलों के जानकार भी हैं।)

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This post was last modified on May 16, 2020 6:03 pm

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