बीएचयू गैंगरेप मामला: बीएचयू प्रशासन ने पीड़िता के जख्मों को कुरेदा, चुनाव के वक्त प्रदर्शनकारी 13 स्टूडेंट्स को नोटिस क्यों!

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उत्तर प्रदेश के बनारस में बीएचयू-आईआईटी की सेकेंड ईयर की छात्रा के साथ पिछले साल एक नवंबर को हुई गैंगरेप की वारदात के जख्मों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक बार फिर हरा कर दिया है। बीजेपी के आईटी सेल के पदाधिकारियों ने गन प्वाइंट पर छात्रा के साथ गैंगरेप किया और वारदात के बाद पार्टी ने तीनों को एमपी में हो रहे विधानसभा चुनाव के प्रचार के लिए भेज दिया था। इस बीच कई दिनों बीएचयू परिसर गरम रहा। कैंपस में सुरक्षा इंतजाम में कोताही बरतने वाले प्राक्टोरियल बोर्ड के अफसरों पर एक्शन लेने के बजाय बीएचयू प्रशासन ने अभियुक्तों की गिरफ्तारी की मांग उठाने वाले ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के अलावा भगत सिंह स्टूडेंट्स मोर्चा और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) से जुड़े 13 स्टूडेंट्स नोटिस भेजा है।गैंगरेप के खिलाफ बोलने पर पहले इन छात्रों के खिलाफ पहले मुकदमें दर्ज कराए गए और अब उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए धमकी दी जा रही है।

बनारस की कमिश्नरेट पुलिस ने IIT-BHU में बीटेक की छात्रा से गैंगरेप करने के इल्जाम में सुंदरपुर स्थित बृज एन्क्लेव कॉलोनी का कुणाल पांडेय, बजरडीहा के जिवधीपुर का आनंद उर्फ अभिषेक चौहान और इसी मुहल्ले के सक्षम पटेल को गिरफ्तार किया था। तीनों अभियुक्त बीजेपी आईटी सेल के पदाधिकारी रहे थे। कुणाल पांडेय बीजेपी की महानगर इकाई में आईटी विभाग का संयोजक और सक्षम पटेल सह-संयोजक था। आनंद दोनों का हमराही था। फिलहाल तीनों जेल में हैं। छात्रा के साथ गैंगरेप की वारदात 01 नवंबर 2023 को हुई थी। देश और समाज को शर्मशार कर देने वाली इस घटना को अंजाम देने वाले तीनों अभियुक्तों को बचाने के लिए बीएचयू प्रशासन से लेकर पार्टी के दिग्गज नेताओं ने करीब दो महीने पर हर संभव कोशिश की। एक तरफ पीड़िता न्याय की गुहार लगाती रही छात्र आंदोलन करते रहे तो दूसरी तरफ अपराधी बीजेपी के लिए चुनाव प्रचार करते रहे।

गैंगरेप मामले में बीएचयू प्रशासन और सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाले ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, भगत सिंह स्टूडेंट्स मोर्चा और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया से जुड़े 13 स्टूडेंट्स को ई-मेल के जरिये नोटिस भेजा गया है। इसके चलते यह मामला एक बार फिर गरमा गया है। इसमें आइसा के रोशन, चंदा, अनुरति, भगत सिंह स्टूडेंट्स मोर्चा से आकांक्षा, इप्शिता, आदर्श और एनएसयूआई से राना रोहित, सुमन आनंद, राजीव नयन आदि छात्रों को 24 अप्रैल 2024 को स्टैंडिंग कमेटी के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है। बीएचयू में अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामले में स्टैंडिंग काउंसिल छात्रों के खिलाफ एक्शन लेती है। विश्वविद्यालय प्रशासन के नाकारेपन के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों को ई-मेल के जरिये नोटिस भेजा गया है। यह ई-मेल 20 अप्रैल, 2024 को उन छात्रों को भेजा गया है जो प्रदर्शन में शामिल थे। ई-मेल में कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए एक स्टैंडिंग कमेटी का गठन किया है, जिसके समक्ष पेश होना अनिवार्य है।

बीएचयू ने कराए थे झूठे केस

आइसा से जुड़े छात्र रोशन जनचौक से कहते हैं, “बीएचयू कैंपस में छात्रा के साथ गैंगरेप की वारदात के बाद पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स पर 05 नवंबर 2023 को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने हमला और पुलिस व बीएचयू के अफसरों ने उल्टे उन्हीं स्टूडेंट्स के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया। वारदात के छह महीने बाद ऐन चुनाव के वक्त पीड़िता के साथ खड़े स्टूडेंट्स को टारगेट किया जा रहा है। गंभीर सवाल यह है कि बलात्करियों के बजाय प्रदर्शनकारियों पर एक्शन क्यों लिया जा रहा है? गैंगरेप के खिलाफ बोलने पर पहले फर्जी मुकदमें और उसके बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी देना यह साबित करता है कि बीएचयू प्रशासन चुनाव में उन छात्रों की आवाज दबा देना चाहता है जो सरकार की नीतियों के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाते रहे हैं। हम देश के अमनपसंद नागरिकों और लोकतंत्रिक अधिकारों पर भरोसा करने वालों से अपील करते हैं सरकार और बीएचयू प्रशासन की दमन की कोशिशों के खिलाफ आवाज उठाएं।”

बीएचयू प्रशासन ने गैंगरेप मामले में आवाज उठाने वाले छात्रों को नोटिस भेजकर इस मामले को एक बार फिर गरमा दिया है। साथ ही छात्रा के उन जख्मों को भी किरोद दिया है जो बीजेपी के पदाधिकारियों ने उन्हें दिया था। बनारस कमिश्नरेट पुलिस की जांच से यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि छात्रा के साथ गैंगरेप करने वाले तीनों अभियुक्तों के सत्तारूढ़ दल के एक विधायक के अलावा बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं के बेहद करीबी रिश्ते थे। बाद में सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अभियुक्तों के जितने एकाउंट थे, उसे हैक कर बीजेपी के नेताओं की तस्वीरों को डिलीट करा दिया गया है। इनमें वो तस्वीर भी शामिल थी जिसमें बीजेपी मीडिया सेल के मुखिया अमित मालवीय के साथ अभियुक्त खड़े थे। तीनों की गिरफ्तारी के तत्काल बाद उनके एक्स एकाउंट भी डिलीट कर दिए गए।

घटना के बाद कई ऐसी जानकारी उजागर हुई थी जिससे पता चलता है कि तीनों अभियुक्त बीजेपी के वरिष्ठ नेता एवं काबीना मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के बहुत क़रीब थे। मंत्री स्वतंत्र देव सिंह कुणाल पांडेय के घर उसे आशीर्वाद देने गए थे। उनके साथ कुणाल ने तस्वीरें भी खिंचवाई थी। उनके साथ बीजेपी के कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव भी थे। मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के घर एक वैवाहिक कार्यक्रम में भी अभियुक्त सक्षम पटेल बीजेपी के एक कद्दावर नेता के साथ पहुंचा था। उस समय कुछ ऐसी तस्वीरें बाहर आई थीं जिससे पता चलता है कि बनारस कैंट के विधायक सौरभ श्रीवास्तव, हर साल कुणाल का जन्मदिन भी मनाया करते थे।

भास्कर डिजिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अभियुक्त कुणाल, सक्षम और अभिषेक उर्फ आनंद वारदात के बाद मध्य प्रदेश गए, लेकिन वो बीजेपी आईटी सेल के लिए काम नहीं कर रहे थे। तीनों रीवा में किसी कैंडिडेट के सोशल मीडिया कैंपेन को देख रहे थे। वो गाहे-बगाहे रीवा से वाराणसी आते-जाते रहते थे। वारदात के बाद अभियुक्तों ने 03 नवंबर 2023 को काबीना मंत्री स्वतंत्र देव की एक पोस्ट शेयर की थी। फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने अपने एक्स अकाउंट पर अभियुक्त कुणाल की सोशल मीडिया पोस्ट के कुछ स्क्रीन शॉट शेयर किए हैं। इसमें एक पोस्ट 25 नवंबर और दूसरी 4 दिसंबर की लखनऊ की है। इसमें वो मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के साथ दिख रहा है।

पुलिस ने बीच में ही रोक दी जांच

तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अशोक मुथा जैन के निर्देश पर बनारस की लंका थाना पुलिस ने इलेक्ट्रानिक साक्ष्य के आधार पर तीनों अभियुक्तों को पहले जेल भेजा और बाद में उनके ख़िलाफ़ कोर्ट में विस्तृत चार्जशीट भी भेजी। बनारस की कमिश्नरेट पुलिस ने 18 मेन और 45 सहायक कैमरों के जरिये वारदात की रात का जो गूगल रूट चार्ट तैयार किया है उसके मुताबिक, गैंगरेप के आरोपी कुणाल, सक्षम और आनंद 01 नवंबर 2023 को सबसे पहले सिगरा स्थित नगर निगम के पार्क में इसी इरादे से गए, इसके बाद वे नक्कटैया मेले में गए। जानकारी के मुताबिक़ इसके बाद वे गोदौलिया, सोनारपुरा और भदैनी होते हुए बीएचयू पहुंचे।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आमतौर पर तीनों रोज ही बीएचयू परिसर में आते थे और आती-जाती लड़कियों के साथ बदसलूकी करते थे। पुलिस के मुताबिक, तीनों अभियुक्त रोजाना शराब पीकर इस तरह की हरकतें करते थे। पुलिस ने तीनों अभियुक्तों का मोबाइल फोन खंगाला तो पता चला कि वे अडल्ट कंटेंट देखने के आदि थे।  इनके मोबाइल फोन को फोरेंसिक लैब भेजा गया है। गैंगरेप की वारदात को अंजाम देने के बाद अभियुक्तों ने अपने मोबाइल फोन में पीड़िता की तस्वीरें भी कैद की थीं और वीडियो भी बनाया था। घटना के बाद बीएचयू में आंदोलन-प्रदर्शन होने लगे तो उन्होंने भयभीत होकर वो पीड़िता की तस्वीरें डिलीट कर दीं।

नोटिस के विरोध में छात्रों ने आम नागरिकों से किया आह्वान, जारी किया पर्चा

नोटिस पाने वाले छात्रों का आरोप है कि, “दो महीने तक पुलिस की चुप्पी इस बात की पुष्टि करती है कि तीनों राज्यों में हो रहे चुनाव प्रभावित न हो, इसलिए अभियुक्तों को पकड़ने से पुलिस बच रही थी। अभियुक्तों की बीजेपी के शीर्ष नेताओं तक पहुंच थी। प्रधानमंत्री मोदी, योगी आदित्यनाथ, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के साथ इनकी तस्वीरें बहुत कुछ कहती हैं। तीनों की गिरफ्तारी के बाद बनारस के पुलिस कमिश्नर अशोक मुथा जैन का तबादला कर दिया और इस मामले में ज्यादातर जांचें अधूरी छोड़ दी गईं। लंका थाना पुलिस यह खुलासा नहीं कर पाई है कि अभियुक्तों ने और कितनी लड़कियों के साथ यौन हिंसा की वारदातों को अंजाम दिया था। पूछताछ के लिए पुलिस ने उन्हें रिमांड पर लेने की जरूरत भी नहीं समझी।”

भगत सिंह स्टूडेंट्स मोर्चा से जुड़ी आकांक्षा और इप्शिता कई मर्तबा यह आरोप लगा चुकी हैं कि, “भाजपा और आरएसएस जैसे संगठनों ने देश में राजनीति का स्तर बहुत गिरा दिया है। अपराधी होना इन संगठनों में प्रोमोशन की आवश्यक शर्त बन चुकी है। कठुआ, उन्नाव, सोनभद्र से लेकर हाथरस तक हुए बलात्कर की घटनाओं में बीजेपी नेता या तो संलिप्त मिले या फिर अपराधियों के साथ खड़े पाए गए। मणिपुर में सैकड़ों महिलाओं के साथ बलात्कर होता रहा, लेकिन प्रधानमंत्री की चुप्पी बहुत दिनों बाद टूटी।”

“महिला पहलवान लंबे समय से न्याय की मांग कर रही हैं, लेकिन सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता। बिल्किस बानो के बलात्कारियों को पहले जेल से रिहा कराना और फिर उनका फूल माला से स्वागत, भाजपा के असली चेहरे को उजागर करता है। एनसीआरबी, 2023 के आंकड़ों के अनुसार बनारस में हर छठवें दिन बलात्कार की घटना हो रही है। इन आंकड़ो के अनुसार ही बनारस में 18 वर्ष से कम उम्र के 46 बच्चे-बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटना हुई, वहीं महिलाओं के साथ रेप के 61 मामले आए हैं।”

स्टूडेंट्स के दमन की कोशिश

बीएचयू में छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे अनिल श्रीवास्तव कहते हैं, “बीएचयू प्रशासन ने निर्दोष छात्रों पर पहले फर्जी केस दर्ज कराया और अब उन्हें नोटिस देकर धमकाने की कोशिश कर रहा है। यह सब लोकसभा चुनाव के मद्देनजर किया जा रहा है ताकि पीएम नरेंद्र मोदी को बनारस से निर्विरोध चुनाव जिताया जा सके और इस मामले में कोई उनके खिलाफ विरोध करने की हिम्मत न जुटा सके।बीजेपी ने अब एक ऐसा दरवाजा खोल दिया है कि चाहे बेईमानी, भ्रष्टाचार कीजिए या फिर यौन हिंसा, पार्टी की सदस्यता ले लीजिए, पिछले सारे पाप धुल जाएंगे। अभियुक्त सक्षम पटेल पीएम नरेंद्र मोदी को गुलाब का फूल दे रहा है। उसकी फोटो सभी बड़े नेताओं के साथ है। गैर-हिन्दू और गैर-राजनीतिक दलों के लोगों के घरों पर कोहराम मचाने वाला योगी का बुलडोजर गैंगरेप रेप करने वालों के मामले में खामोश क्यों रह गया? मौजूदा चुनाव में बीजेपी की हालत पतली हो गई है। उन्हें हार जाने का डर सता रहा है। बीएचयू प्रशासन ने चुनाव के वक्त इस मामले को उठाकर छात्रों की आवाज़ दबाने की कोशिश की है, ताकि वो सूरत लोकसभा की तरह मनमानी कर सकें। “

बनारस के वरिष्ठ पत्रकार एवं बीएचयू के छात्र रहे प्रदीप कुमार कहते हैं कि स्टूडेंट्स को नोटिस मिलने के बाद यह सवाल अब हर कोई फिर से उठाएगा कि बीजेपी ने पहले व्यभिचार पर पर्दा डाला गया और अब निर्दोष छात्रों को निशाना बना रही है। यूपी पुलिस चोर उचक्कों को पकड़ती है तो रिमांड पर लेती है और उनके टांग में छेद कर देती है, लेकिन इन दरिंदों के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ, जबकि बीएचयू के इतिहास में गैंगरेप की इतनी वीभत्स वारदात आज से पहले कभी नहीं हुई थी। यह राज अभी तक दबा हुआ है कि अभियुक्तों ने कितनी लड़कियों को अपना शिकार बनाया? किनके बूते पर ये तीनों दरिंदे बीएचयू कैंपस में दनदनाते घूम फिर रहे थे और वहशियाना अंदाज में महिलाओं की अस्मिता पर हमला कर रहे थे?  जब यह मामला नेपथ्य में चला गया है तो चुनाव के वक्त नोटिस देने का मतलब क्या है और बीएचयू के अफसर क्यों दबे और घबराए हुए हैं?

“कोई भी संस्था देश के संविधान के नियम और क़ानून से चलती है। इससे इतर जाकर कोई कार्रवाई मनमानी प्रवृत्ति कही जा सकती है। भारतीय संविधान में शांतिपूर्वक आंदोलन व प्रदर्शन करने का हर किसी को अधिकार है, चाहे वो पीएम और सीएम क्यों न हो? आंदोलन पर निषेध न भारतीय संविधान में है और न ही बीएचयू के अधिनियम में है। अगर ऐसा होता तो बहुत सारे स्वतंत्रता सेनानियों को सज़ा हुई थी, उन्हें तो बीएचयू को डिग्री ही नहीं देना चाहिए थी। साल 1942 के आंदोलन में डॉ.राधकृष्णन कुलपति थे और राजनारायण व प्रभुनारायण लॉ कॉलेज के स्टूडेंट थे। इन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया। इनकी गिरफ़्तारी के लिए उस दौर में पांच-पांच हज़ार का इनाम रखा गया। यह हाल ब्रिटिश शासन में हुई गिरफ़्तारी के बाद दोनों छात्र नेताओं को सज़ा हुईं, लेकिन इनकी मार्क्सशीट और डिग्री नहीं रोकी गई।”

प्रदीप मुताबिक, “विश्वविद्यालय के अंदर किसी के ख़िलाफ़ कोई स्टूडेंट लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीक़े से विरोध दर्ज कराता है तो आप उसके एकेडमिक करियर और ज़िंदगी से खिलवाड़ नहीं कर सकते। यह तानाशाही और दमन की पराकाष्ठा है। आज़ाद हिंदुस्तान में बीएचयू के अंदर बड़े-बड़े आंदोलन हुए। तमाम छात्र नेताओं के ख़िलाफ़ निलंबन और निष्कासन की तक की कार्रवाई हुई। जांच कमेटी बनाई गई और स्टूडेंट्स ने अपने पक्ष रखे, जिनमें कुछ बरी कर दिए गए। जिनका निष्कासन हुआ भी उन पर इस तरह का कभी प्रयास नहीं हुआ कि उन्हें पढ़ने से ही रोक दिया जाए। बनारस के लोगों को याद है कि तत्कालीन कुलपति कालूलाल श्रीमाली के ख़िलाफ़ बीएचयू में सबसे लंबा आंदोलन चला। उस समय स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ निलंबन और निष्कासन तक की कार्रवाइयां हुईं, जिनमें शतरुद्र प्रकाश और आनंद कुमार शामिल थे। इन्हें निष्कासित कर दिया गया, लेकिन न इनका अंकपत्र रोका गया और न ही डिग्री। जिनकी परीक्षाएं बाकी थी, उन्हें इम्तिहान देने की अनुमति दी गई। हालांकि बाद में इनका दाख़िला बीएचयू में हुआ। बीएचयू में स्टूडेंट के शैक्षणिक करियर को बर्बाद करने का दंड कभी नहीं दिया गया।”

वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप यह भी कहते हैं, “बीएचयू में शर्मनाक कांड के बाद छात्रा को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाने वालों को चुनाव के दौरान नोटिस भेजा जाना बीएचयू के अफसरों का दिमागी दिवालियापन है। कार्रवाई तो उन लोगों के खिलाफ होनी चाहिए जिनके कंधे पर सुरक्षा की जिम्मेदारी थी। प्रोक्टोरियल बोर्ड पर बीएचयू प्रशासन हर साल करोड़ों रुपये खर्च करता है। सुरक्षा कर्मियों के रहने के बावजूद गैंगरेप की घटना हो रही है तो नैतिकता के आधार कुलपति को इस्तीफा दे देना चाहिए। साथ ही जिम्मेदारी के आधार पर पूरे प्रोक्टोरियल बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी। निहायत शर्मनाक तरीके से अपने अपराधों और जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने के लिए उन लोगों के ऊपर कार्रवाई की धमकी दी गई है जो उनकी नाकामियों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। यह तो वही बात हुई कि जो कटघरे में थे वही जज बन गए।”

“बीएचयू प्रशासन समझदार होता तो चुनाव के समय इस मामले को कतई नहीं उठाता। नोटिस भेजकर गैंगरेप पीड़िता के घाव को एक बार फिर हरा करने की कोशिश की गई है। निर्दोष छात्रों पर एक्शन लिया गया तो यह चुनाव में बड़ा मुद्दा बनेगा। बैठे ठाले विश्वविद्यालय प्रशासन ने विपक्षी दलों के हाथ में पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक और बड़ा औजार थमा दिया है। गौरतलब है कि अभी तक मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र में इस शर्मनाक घटना पर एक शब्द भी नहीं कहा। अब शायद उन्हें दरम्याने चुनाव इस कांड को लेकर अपना स्टैंड स्पष्ट करना पड़ सकता है। यह कार्रवाई बीजेपी को महंगी पड़ सकती है। यह मामला बैक फायर भी कर सकता है।”

(लेखक बनारस के वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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