Thursday, February 9, 2023

बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत आदेश में कहा: आर्यन खान के खिलाफ कोई पाजिटिव सबूत नहीं

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्रूज शिप ड्रग मामले में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को जमानत देने के बॉम्बे हाईकोर्ट के स्पीकिंग आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जारी कर दिया है। 14 पन्नों के आदेश में जस्टिस नितिन सांबरे की एकल पीठ ने कहा है कि आर्यन खान और दो अन्य सह-आरोपी अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस एक्ट) के तहत साजिश के अपराध के लिए कोई प्रथम दृष्टया सबूत नहीं था।

एकल पीठ ने कहा है कि इस न्यायालय ने प्रथम दृष्टया उक्त मुद्दे पर आवेदकों के खिलाफ कोई सकारात्मक साक्ष्य नहीं देखा है। इस न्यायालय का मत है कि प्रतिवादी द्वारा दावा किया गया कि आवेदकों को एनडीपीएस अधिनियम के तहत अपराध करने का इरादा माना जाना चाहिए, साजिश रचने के मामले की पृष्ठभूमि में वाणिज्यिक मात्रा के कब्जे में पाए जाने पर खारिज किया जा सकता है।एकल पीठ ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि आरोपी क्रूज पर यात्रा कर रहे थे, आरोपी के खिलाफ धारा 29 के अपराध को लागू करने का आधार नहीं हो सकता।

एकल पीठ ने कहा कि इस अदालत को इस तथ्य के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता है कि साक्ष्य के रूप में बुनियादी सामग्री की उपस्थिति होनी चाहिए ताकि आवेदकों के खिलाफ साजिश के मामले को साबित किया जा सके।मर्चेंट और धमेचा के साथ खान को 28 अक्टूबर को एकल पीठ ने जमानत दे दी थी। एकल पीठ ने एक छोटा आदेश दिया था, जबकि कारणों को बताते हुए आज तक नहीं सुनाया गया था।

उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर आज उपलब्ध कराए गए आदेश में एकल पीठ ने कहा कि खान के पास से कोई दवा नहीं मिली, जबकि मर्चेंट और धमेचा से बरामद की गई मात्रा एनडीपीएस अधिनियम के तहत ‘छोटी’ मात्रा थी।एकल पीठ ने गौर किया कि आर्यन खान के व्हाट्सएप चैट में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था जिससे यह पता चलता हो कि एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध करने की उनकी ओर से साजिश थी।

एकल पीठ ने कहा कि आवेदक/अभियुक्त नंबर 1 (खान) के फोन से निकाली गई व्हाट्सएप चैट को देखने के बाद, यह बताने के लिए कुछ भी आपत्तिजनक नहीं देखा जा सकता है कि आवेदक संख्या 1 और 2 (मर्चेन्ट) या तीनों आवेदकों के साथ-साथ अन्य अभियुक्त व्यक्तियों के बीच सहमति है और विचाराधीन अपराध को अंजाम देने की साजिश रची है।एकल पीठ ने कहा कि  इस न्यायालय को यह समझाने के लिए रिकॉर्ड पर शायद ही कोई सकारात्मक सबूत है कि सभी आरोपी व्यक्ति सामान्य इरादे से गैरकानूनी कार्य करने के लिए सहमत हुए।

महत्वपूर्ण रूप से, एकल पीठ ने दोहराया कि एनसीबी को आरोपी द्वारा दिए गए इकबालिया बयान का कोई मूल्य नहीं होगा जैसा कि तोफान सिंह बनाम तमिलनाडु राज्य के मामले में उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दिया है।एकल पीठ ने कहा कि चूंकि साजिश का अपराध नहीं बनता है, इसलिए जमानत देने पर धारा 37 की कठोरता लागू नहीं होगी। एनडीपीएस अधिनियम की धारा 67 के तहत स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने आर्यन खान का जो स्वीकृति बयान दर्ज किया है, उस पर केवल जांच के मकसद से गौर किया जा सकता है और उसका इस्तेमाल यह निष्कर्ष निकालने के लिए हथियार के तौर पर नहीं किया जा सकता कि आरोपी ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत कोई अपराध किया है।

आर्यन खान को 2 अक्टूबर, 2021 को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने हिरासत में ले लिया था, जब एनसीबी ने मुंबई से गोवा जाने वाले एक क्रूज जहाज पर छापा मारा था। खान को टर्मिनल से क्रूज तक गिरफ्तार किया गया था।उन्हें नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम की धारा 8 (सी), 20 (बी), 27, 28, 29 और 35 के उल्लंघन के लिए गिरफ्तार किया गया था।एनसीबी ने आरोप लगाया है कि उसने 13 ग्राम कोकीन, 5 ग्राम मेफेड्रोन एमडी, 21 ग्राम चरस और एमडीएमए एक्स्टसी की 22 गोलियां जब्त की हैं।

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आरएम नेर्लिकर ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि यह सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि केवल सत्र की विशेष अदालत ही जमानत याचिका पर सुनवाई करने की हकदार है।इसके बाद, खान ने जमानत के लिए विशेष अदालत का रुख किया, जिसे 20 अक्टूबर को खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपील में उच्च न्यायालय का रुख किया।28 अक्टूबर को उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने के बाद, खान और अन्य को 30 अक्टूबर को जेल से रिहा कर दिया गया।

महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने शनिवार को कहा कि आर्यन खान की जमानत याचिका पर बम्बई उच्च न्यायालय के विस्तृत आदेश ने उनके इस दावे की पुष्टि की कि खान और अन्य के खिलाफ मादक पदार्थ का मामला फर्जी था। मलिक ने कहा कि स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) के क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े को अदालत के निष्कर्षों के बाद निलंबित कर दिया जाना चाहिए।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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