लखनऊ: भाई ही बना अपाहिज बहन की जान का दुश्मन, मामले पर पुलिस का रवैया भी बेहद गैरजिम्मेदाराना

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लोग इस कदर बेखौफ हो गए हैं कि एक भाई अपनी अपाहिज बहन की ही जान की दुश्मन बन गया है । सत्ता की बागडोर संभालते समय योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि उनके राज में अपराधी या तो जेलों में होंगे या उत्तर प्रदेश छोड़ देंगे। लेकिन आलम ये है कि या तो पुलिस अपराधियों के पक्ष मे खड़ी है या उन्हें बचाने का काम कर रही है।

ताजा मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का है जहां मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश का हर बड़ा अधिकारी, मंत्री पदस्थापित है। वहां का ये हाल है, तो और जिलों की क्या हालत होगी समझना मुश्किल नहीं है । 

दरअसल लखनऊ के पवनपुरी कालोनी देवीखेड़ा आशियाना में रहने वाली मीरा यादव पुत्री रमेश यादव अपने पिता के घर में ही रहती हैं। साल 2009 में हुए दुर्घटना के बाद अपाहिज हो चुकी मीरा अविवाहित हैं और अपने पिता के घर में ही रहकर अपना जीवन व्यतीत कर रही हैं। मीरा की मां का दो साल पहले निधन हो चुका है। मीरा का आरोप है कि उनका भाई रंजीत कुमार यादव संपत्ति के लालच में उनकी जान का दुश्मन बना हुआ है। 

रंजीत अपराधी प्रवृत्ति का है जो अतीत में 307, 302 जैसी संगीन धाराओं का आरोपी रहा है, जिसमें वह जेल भी जा चुका है। मीरा का आरोप है कि उनके भाई  रंजीत ने बदनीयती से उनके साथ छेड़खानी की, जिसका विरोध करने पर उसने उन्हें जान से मार देने की धमकी दी। मीरा के क्रिमिनल भाई ने उनसे कहा कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा मैं सबको खरीद लूंगा। इसकी शिकायत लेकर मीरा  4 जुलाई को आशियाना थाने में गयीं जहां उनकी शिकायत यह कहकर नहीं लिखी गयी कि ये परिवारिक मामला है इसमें हम कुछ नहीं कर सकते। इसके बाद मीरा बड़ी उम्मीद के साथ महिला थाने गयीं लेकिन उनको वहां भी निराशा ही हाथ लगी। महिला थाने के गेटमैन ने उन्हें गेट से ही भगा दिया। 

इसके बाद मीरा ने राष्ट्रीय महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया। 31 जुलाई 2020 को महिला आयोग में केस रजिस्टर करवाया। 3 अगस्त, 2020 को महिला आयोग ने पुलिस से इस केस से सबंधित रिपोर्ट मांगी । 8 अगस्त को CO कैंट ने फोन कर मीरा को बयान देने के लिए बुलाया था। मीरा ने बताया कि जो उन्होंने बताया वह रिपोर्ट में नहीं लिखा है। इस बीच, मीरा यादव ने ऐपवा की प्रदेश ज्वाइंट सेक्रेटरी मीना सिंह से सम्पर्क किया और उनसे मदद मांगी।

5 अगस्त को उनके भाई ने घर की लाइट काट दी और रात 9 बजे के आस-पास उसको घर से निकाल दिया। उसके बाद मीना सिंह ने फोन करके चौकी इंचार्ज से बात की। चौकी इंचार्ज ने कहा कि वह कुछ नहीं कर सकता ये इनका घरेलू मामला है । दबाव बनाने पर उस दिन मीरा को घर में घुसने दिया गया। लेकिन इस बीच रंजीत यादव ने तीन बार घर की बिजली काट दी। अब बिजली विभाग वालों ने कहा कि ये आपका घरेलू मामला है । हम लोग बार-बार बिजली ठीक करने नहीं आएंगे । 

ऐपवा के हस्तक्षेप के बाद इस धमकी के साथ बिजली जोड़ी गयी कि वे दोबारा ठीक करने नहीं आएंगे, ये आखिरी बार है । 11 अगस्त को रंजीत अपने दोस्तों के साथ जाकर मीरा के साथ गाली गलौज करना शुरू कर दिया और धमकियां देने लगा कि घर से चली जाओ नहीं तो जान से मार देंगे। घबराकर मीरा ने सीओ को फोनकर मदद की गुहार लगाई लेकिन वहां से निराशा ही हाथ लगी। उन्होंने ये कह कर पल्ला झाड़ लिया कि लोकल पुलिस को फोन करो वह कुछ नहीं कर सकते ।हार कर मीरा ने घर छोड़ दिया और अपनी दोस्त के घर चली गई। 13 अगस्त को रंजीत ने सुबह 4 बजे उसके घर का ताला तोड़ दिया और उसके जेवर रुपये पैसे तथा घर का सारा सामान टेम्पो में लादने लगा।

तब मीरा के पड़ोसी ने फोन कर मीरा को ये सब बताया। मीरा 6 बजे सुबह घर पहुंचीं। इस बीच मीरा ने फिर चौकी इंचार्ज से मदद की गुहार लगाई तो इस बार कहा गया मैं कुछ नहीं कर सकता। मीरा उसे समान ले जाने से मना करने लगी इस पर रंजीत ने अपना आपा खो दिया और मीरा को पीटने लगा और उनका फोन भी छीन लिया। जब उनको बचाने के लिए मीरा की बहन की लड़की आयी उसको भी मारा पीटा। सूचना मिलने पर ऐपवा नेता मीना सिंह ने SI को फोन कर उनकी जान बचाने की अपील की तब जाकर मौके पर चौकी इंचार्ज पहुंचे और दोनों को आशियाना थाने ले आये ।

इसके बाद मीरा से बात नहीं हो पा रही थी। वकील को थाने भेजा गया तब पुलिस ने बताया कि 107 / 16 में जेल भेज रहे हैं। रंजीत को भी 151 में भेज रहे हैं। रात 7 बजे तक कुछ पता नहीं चला तो आली महिला संगठन से लोगों ने 5 थानों पर जाकर पता किया तब विभूति खण्ड थाने से बताया गया कि उन्हें जेल भेज दिया है। 14 अगस्त को मीरा के वकील ने कोर्ट में जाकर पता किया तो पता चला कि कचहरी में नहीं लाया गया है न ही उससे संबंधित कोई कागज ही आया है। यह रिपोर्ट लिखे जाने तक मीरा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

सभी महिला संगठनों ऐपवा, ऐडवा, महिला फेडरेशन, हमसफ़र, साझी दुनिया, आली आदि ने पूरे घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है और मीरा के लिए न्याय की मांग की है।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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