Monday, October 25, 2021

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ममता का मास्टरस्ट्रोक! चीफ सेक्रेटरी के रिटायरमेंट लेने के बाद बनाया अपना मुख्य सलाहकार

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अभी भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल में भाजपा की करारी हार से उबरे भी नहीं थे कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय के दिल्ली ट्रांसफर मामले में एक बार फिर जबर्दस्त मात दे दी है। केंद्र और बंगाल सरकार के बीच चल रहे टकराव में सोमवार को उस समय नया मोड़ आ गया जब पश्चिम बंगाल काडर के 1987 बैच के आईएएस अधिकारी अलपन बंद्योपाध्याय ने 31 मई को रिटायरमेंट ले लिया। सीएम ममता बनर्जी ने अलपन को मुख्य सचिव पद से रिटायर कर प्रमुख सलाहकार बना दिया।


अलपन बंद्योपाध्याय 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद 31 मई को रिटायर होने वाले थे। केंद्र सरकार ने 3 महीने उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था और रिपोर्ट करने के लिए कहा था पर उन्‍होंने इसकी जगह रिटायरमेंट ले लिया। बंगाल के मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय को केंद्र ने सोमवार सुबह ही दिल्ली बुलाया था, पर वो नहीं पहुंचे। इसके बाद केंद्र सरकार ने अलापन को कारण बताओ नोटिस भेजा। केंद्र की इस कार्रवाई के चंद मिनट बाद ही ममता बनर्जी ने अलापन को मुख्य सचिव पद से रिटायर कर प्रमुख सलाहकार बना दिया। एचके द्विवेदी को राज्य का नया चीफ सेक्रेटरी बनाया गया है।


ममता ने इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया था। अलापन का मुख्य सचिव के तौर पर कार्यकाल 3 महीने बढ़ाए जाने पर उन्होंने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि वक्त आने पर जवाब दूंगी। इसके करीब आधे घंटे बाद ही उन्होंने अलपन को 3 साल तक मुख्य सलाहकार बनाए जाने का फैसला ले लिया। ममता ने कहा कि अलापन 31 मई को रिटायर हो रहे हैं और वे दिल्ली में ज्वाइन करने नहीं जा रहे हैं। वे हावड़ा की नाबन्ना बिल्डिंग पहुंचे। यहां उन्हें कोविड रिलीफ से जुड़ी एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल होना था। सुबह करीब 10.30 बजे हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद भी अलपन दिल्ली रवाना नहीं हुए। शाम होते-होते केंद्र का एक्शन भी साफ हो गया और उस पर ममता ने भी मास्टर स्ट्रोक चल दिया।


अलपन बंद्योपाध्याय चक्रवात यास के रिव्यू के लिए शुक्रवार को बुलाई गई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मीटिंग में देरी से पहुंचे थे। इसके बाद शाम को ही उन्हें दिल्ली बुलाने के आदेश जारी हो गए। रिटायर्ड सीनियर ब्यूरोक्रेट्स और लीगल एक्सपर्ट्स का मानना है कि केंद्र सरकार ने भले चीफ सेक्रेटरी को दिल्ली रिपोर्ट करने का आदेश दे दिया हो, लेकिन इसे लागू करना मुश्किल हो सकता है। उन्हें रिलीव करना राज्य सरकार के अधिकार में आता है। ऐसे में ममता उन्हें दिल्ली भेजने से इंकार कर सकती हैं। ममता ने कुछ दिन पहले ही बंद्योपाध्याय का कार्यकाल तीन महीने बढ़ाने की बात कही थी।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को बंगाल पहुंचे थे। वे यास तूफान से राज्य में हुए नुकसान का रिव्यू करने के लिए पहुंचे थे। इस मीटिंग में भी मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय देर से पहुंचे थे। जबकि ममता और बंद्योपाध्याय उसी इमारत में मौजूद थे, जिसमें मोदी की मीटिंग चल रही थी। उनके देर से पहुंचने के बाद ही केंद्र ने उन्हें दिल्ली बुलाने का आदेश जारी कर दिया था।


अलपन बंद्योपाध्याय को 31 मई की सुबह 10 बजे से पहले से केंद्र सरकार को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था। मगर बंद्योपाध्याय की जगह मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी की चिट्ठी केंद्र को मिली। ममता ने कहा कि ऐसे मुश्‍किल समय में पश्चिम बंगाल की सरकार अपने मुख्‍य सचिव को कार्यमुक्‍त नहीं कर सकती। विभिन्‍न मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ममता के इस रुख के बाद कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग बंद्योपाध्याय के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।


ममता बनर्जी ने पत्र में कहा था कि पश्चिम बंगाल सरकार ऐसी मुश्किल घड़ी में अपने मुख्य सचिव को रिहा नहीं कर सकती और न ही रिहा कर रही है।’ बनर्जी ने केंद्र के इस फैसले को वापस लेने, पुनर्विचार करने और आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया। इससे पहले शनिवार को ममता ने कहा था कि उनकी (अलपन बंद्योपाध्याय) क्या गलती है? मुख्य सचिव होने के नाते, मेरी सहायता करना उनका कर्तव्य है। उन्हें मेरे खिलाफ बहुत सारी शिकायतें हो सकती हैं और वे अलग-अलग तरीकों से मेरा अपमान कर रहे हैं। मैंने इसे स्वीकार कर लिया है, लेकिन उन्हें (बंद्योपाध्याय) क्यों पीड़ित किया जा रहा है? वह ईमानदार हैं और चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं।
मंगलवार से अलपन बंद्योपाध्याय मुख्य सलाहकार के तौर पर काम शुरू करेंगे। ममता बनर्जी ने कहा कि अलपन 1 जून यानि की मंगलवार से मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार का कार्यभार संभालेंगे।


(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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