Sunday, October 17, 2021

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एनआरसी नहीं बेरोजगारों का रजिस्टर बनाए केंद्र सरकार

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युवा-हल्लाबोल ने मोदी सरकार से नेशनल रजिस्टर ऑफ अनइम्प्लॉयड (एनआरयू) बनाने की मांग की है। दिल्ली के मयूर विहार स्थित कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में युवाओं की बजट 2020 से छह मुख्य अपेक्षाएं की हैं।

युवा-हल्लाबोल का नेतृत्व कर रहे अनुपम ने एनआरयू को देश की बड़ी जरूरत बताते हुए कहा कि बेरोज़गारी से लड़ने के प्रति अगर सरकार गंभीर है तो एनआरयू इसका पहला कदम हो सकता है। ऐसे वक्त में जब कि 45 साल की रिकॉर्डतोड़ बेरोज़गारी है और हर दो घंटे में तीन बेरोज़गार आत्महत्या करने को मजबूर हैं तो ये आवश्यक है कि सरकार के पास बेरोज़गारों का सही आंकड़ा हो।

गणतंत्र दिवस के दिन जब राजपथ पर हमें झांकियां दिखाई जा रही थीं तो उसी दिन देश की असल झांकी के रूप में खबर आई कि पिछले पांच सालों में सात प्रमुख सेक्टरों में ही तीन करोड़ 64 लाख रोज़गार खत्म हो गए हैं। जो सरकार सालाना दो करोड़ रोज़गार देने का वादा करके सत्ता में आई उसने रोज़गार सृजन करना तो दूर लोगों के रोज़गार धंधे छीन लिए।

एनआरयू के जरिये देश भर के बेरोज़गारों का भौगोलिक क्षेत्र और शैक्षणिक योग्यता के अनुसार एक नेशनल रजिस्टर बनाया जा सकता है, ताकि फिर समाधान के लिए सटीक योजनाएं बनाई जा सकें। बेरोज़गारी दूर करने के लिए किसी भी योजना का उचित क्रियान्वयन भी तभी हो सकता है जब सरकार के पास बेरीज़गारों का आंकड़ा हो।

इस मौके पर युवा-हल्लाबोल ने एनआरयू की वेबसाईट भी लांच की और बेरोज़गारों से पंजीकृत करवाने की अपील की। अनुपम ने बताया कि अगर आगामी बजट में सरकार एनआरयू की घोषणा नहीं करती तो युवा-हल्लाबोल के माध्यम से एनआरयू कैंप लगवाकर बेरोज़गार युवाओं का रजिस्टर बनवाया जाएगा।

आंदोलन के नेशनल कोऑर्डिनेटर गोविंद मिश्रा ने बताया कि दिसंबर के महीने में जब एनआरसी के नाम पर देश भर में बहस शुरू हुई तो युवा-हल्लाबोल ने ही सबसे पहले एनआरयू का विचार दिया। उसके बाद स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने इसको मजबूती से उठाया और फिर कांग्रेस पार्टी ने भी यह मांग की। एनआरयू को लेकर देश में उत्साह को देखते हुए युवा-हल्लाबोल ने इस मांग को अंजाम तक ले जाने का निर्णय लिया है।

युवा-हल्लाबोल राष्ट्रीय टीम की श्वेता ढुल ने मांग की कि देश में व्याप्त भीषण बेरोज़गारी को सरकार राष्ट्रीय आपदा घोषित करे। उन्होंने याद दिलाया कि ठीक एक साल पहले 27 जनवरी 2019 को आयोजित यूथ समिट में जब पहली बार युवा-हल्लाबोल ने यह मांग रखी थी तो एनएसएसओ के आंकड़े सार्वजनिक नहीं हुए थे।आज तो हर सर्वेक्षण और हर रिपोर्ट के जरिए बेरोज़गारी एक गंभीर संकट के रूप में दर्शायी जा रही है।

गोविंद मिश्रा ने बताया कि युवा-हल्लाबोल द्वारा जारी किए गए एनआरयू की वेबपेज को पर्चे के रूप में भी बेरोज़गारों तक ले जाया जाएगा। इस मुहिम के जरिए जिन युवाओं के आंकड़े एनआरयू में पंजीकृत होंगे उनकी सूचना सरकार को भी दी जाएगी। साथ ही कुछ निजी प्रतिष्ठानों या कंपनियों से भी समन्वय बनाया जाएगा ताकि जहां कहीं भी संभव हो बेरोज़गार युवाओं को अवसर प्रदान करवाया जा सके।

अनुपम ने बताया कि बेरोज़गारी से लड़ने के लिए अगर सरकार कोई इच्छा शक्ति दिखाए तो युवाओं के हित में युवा-हल्लाबोल भी हरसंभव मदद करेगा, लेकिन अफसोस कि सरकार इस राष्ट्रीय आपदा से निपटने को लेकर तनिक भी गंभीर नहीं दिखती। विडंबना ये है कि समस्या से निपटना तो दूर, सरकार ये मानने को भी तैयार नहीं है कि बेरोज़गारी जैसी कोई समस्या है। ऐसे में एनआरयू की मुहिम शायद बेरोज़गारी संकट की व्यापकता के प्रति सरकार की भी आंखें खोल सकता है।

बजट 2020 में एनआरयू लाने की मांग करते हुए अनुपम ने आगामी आम बजट से युवाओं की अन्य अपेक्षाओं को भी चिन्हित किया। उन्होंने मांग की कि सरकार एनआरयू की घोषणा करे और तीन महीने में देश के बेरोज़गारों का रजिस्टर बनाए।

सरकारी नौकरियों में खाली पड़े पदों का ब्यौरा दिया जाए और उन्हें भरने की सरकार योजना बताए। उन्होंनें मांग की कि मॉडल एग्जाम कोड लागू करके अधिकतम नौ महीने में नौकरी दी जाए। यह भी मांग की कि रिपोर्ट दी जाए कि तरह-तरह की योजनाओं से कितने रोज़गार का सृजन हुआ। बेरोज़गारी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग करते हुए क्षेत्र में रोज़गार सृजन की योजना बताने को भी सरकार से कहा गया। इसके साथ ही हर युवा के लिए ‘रोज़गार के अधिकार’ का कानून लाने की घोषणा की भी मांग की गई।

आगामी बजट से युवाओं की अपेक्षा गिनाते हुए अनुपम ने कहा कि हर साल बजट भाषण में यह ज़रूर बताया जाना चाहिए कि कितने सरकारी पद खाली पड़े हैं और उनमें समयबद्ध ढंग से भर्ती करने की सरकार की क्या योजना है। अनुपम ने कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय के उस आदेश का स्वागत भी किया जिसमें यूपीएससी और एसएससी में खाली पड़े पदों को भरकर हर महीने की पांच तारीख तक रिपोर्ट करने को कहा गया है।

गोविंद मिश्रा ने पत्रकारों को “मॉडल एग्जाम कोड” की कॉपी दिखाते हुए इसी बजट में यह कोड लागू करने की मांग की ताकि हर सरकारी भर्ती अधिकतम नौ महीनों में पूरी हो सके। युवा-हल्लाबोल ने इसके लिए “मॉडल कोड लागू करो, नौ महीने में नौकरी दो” का नारा भी दिया।

साथ ही, गोविंद ने सवाल किया कि मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया से लेकर स्मार्ट सिटी तक की योजनाओं के जरिए कितने रोज़गार का सृजन हुआ। हर योजना को ढोल नगाड़ों के साथ ये कहकर लांच किया गया था इससे रोज़गार का सृजन होगा, लेकिन अब तक देश को इसकी कोई खबर नहीं कि हजारों करोड़ों लगाकर इन योजनाओं से बेरोज़गार युवाओं को क्या मिला।

बेरोज़गारी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग के साथ श्वेता ढुल ने आगामी बजट में सरकार से युवाओं को ‘रोज़गार का अधिकार’ देने की मांग रखी। साथ ही, देश को यह भी बताया जाए कि अगले वित्त वर्ष में किन-किन क्षेत्रों में कितने रोज़गार का सृजन करने की योजना है सरकार की।

अनुपम ने कहा कि यदि बजट 2020 से युवाओं की अपेक्षा पूरी नहीं होती तो युवा-हल्लाबोल देश भर में मुहिम चलाकर एनआरयू बनवाएगा और बेरोज़गारी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन को युवा एकता से आगे बढ़ाएगा। साथ ही, अनुपम ने यह भी कहा कि अगर सरकार ‘रोज़गार का अधिकार’ की घोषणा नहीं करती तो युवा-हल्लाबोल की टीम खुद ‘रोज़गार के अधिकार’ का बिल तैयार करके कानून बनवाने का अभियान चलाएगी।

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