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मंत्री बेटा प्रकरण से चर्चे में आयी सुनीता यादव का बड़ा खुलासा, कहा-मामले को निपटाने के लिए मिला 50 लाख का ऑफर

सूरत। आरोग्य मंत्री कुमार कनानी के बेटे से उलझने वाली कांस्टेबल सुनीता यादव ने एक गुजराती न्यूज़ चैनल से बड़ा दावा किया है। सुनीता के अनुसार उन्हें मामले में समाधान के लिए 50 लाख का ऑफर मिला है जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। फिल्हाल सुनीता यादव का तबादला कर दिया गया है। साथ ही एक विभागीय जाँच भी बैठा दी गई है। जांच एसीपी जेके पांड्या कर रहे हैं। जांच दो अन्य मामलों में भी हो रही है। एक आरोप उन पर है कि वह लोगों को उठक-बैठक कराती हैं। दूसरा 9 जुलाई से नौकरी से गैर हाजिर हैं। तीसरा मंत्री के बेटे से कहा सुनी, गाली गलौज और वीडियो वायरल करना तो है ही। जांच के आदेश सूरत पुलिस कमिश्नर आरबी ब्रहम्भट्ट ने दिया है।

दूसरी तरफ मंत्री के बेटे के खिलाफ अब तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। सुनीता का आरोप है कि सूरत पुलिस कमिश्नर को छोड़ किसी अधिकारी ने उनका साथ नहीं दिया। सुनीता यादव के ट्रांसफर के आदेश के बाद एक नया विवाद तब खड़ा हो गया जब सुनीता ने R. भारत को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया। क्योंकि एक दिन पहले ही सुनीता ने फेसबुक लाइव पर कहा था, ” मैं अपने डिपार्टमेंट से बंधी हुई हूं। इसलिए मीडिया से बात नहीं कर सकती।” अगले दिन सुनीता ने एक दो बड़े चैनलों से भी वार्तालाप किया है।

बीजेपी के चहेते पत्रकार अर्णब गोस्वामी और भाजपा सांसद के मालिक वाले चैनल को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू देने के बाद सुनीता के बारे में लोगों की राय बदल रही है। कुछ लोग घटनाक्रम के पीछे भाजपा की अंदुरूनी गुटबाज़ी और षड्यंत्र मान रहे हैं। कुमार कानानी खुद कह चुके हैं। यह सब मेरे खिलाफ मेरी छवि को धूमिल करने के लिए षड्यंत्र किया गया है। हालांकि सुनीता के एक फोटो के कारण उन्हें आम आदमी पार्टी से भी जोड़ा जा रहा है।

सुनीता यादव के एक पिछड़े वर्ग की महिला होने के कारण उन्हें देश भर से खूब सहानुभूति मिली। देश ने उन्हें लेडी सिंघम का तमगा भी दे डाला। सोशल मीडिया की ही ताक़त है जो केवल ट्रांसफर और विभागीय जाँच से ही सरकार ने काम चला लिया। वरना सरकार खाकी भी उतारना जानती है। कुछ बड़े मीडिया से सुनीता ने बात की जिसके बाद सुनीता पर लोगों का भरोसा कम हुआ है।

अब लोग उनके खिलाफ सोशल मीडिया में लिखना भी शुरू कर दिए हैं। गुजरात में नागरिकता कानून के विरोध में हुए आंदोलन से जुड़े सूफियान राजपूत कहते हैं, “सोशल मीडिया ने सुनीता यादव को भले ही लेडी सिंघम बना दिया है। पुलिस सरकार से बंधी हुई है। और सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है। सुनीता ने जिस ट्रेंड को जन्म दिया है उसकी चपेट में आम जन ही आएंगे कोई मंत्री का बेटा नहीं। मंत्री के बेटे ने अपनी ताकत तो दिखा ही दी है। कोई आम नागरिक होता तब न तो मीडिया, न ही सोशल मीडिया इतनी रुचि लेता। सुनीता को भी आसानी से क्लीनचिट नहीं दी जा सकती।”

सुनीता यादव को पुलिस कांस्टेबल बताया जा रहा है। जबकि सुनीता खुद को एलआरडी या लोक रक्षक बताती हैं। आपको बता दें गुजरात में सरकारी नौकरी मिलने के बाद पांच साल तक फिक्स पे पर नौकरी करनी पड़ती है। इस दरम्यान फिक्स पगार मिलती है और छुट्टी करने पर उस दिन की पगार भी काट ली जाती है। नौकरी अस्थाई होती है। यह सिस्टम पुलिस और राजस्व विभाग जैसी अहम नौकरियों पर भी लागू है।

गुजरात में फिक्स पे सिस्टम का विरोध होता आया है। क्योंकि इस प्रक्रिया के माध्यम से कर्मचारियों का शोषण होता है। सुनीता यादव भी फिक्स पे पर हैं। पांच सालों तक एलआरडी रहेंगी उसके बाद उन्हें कांस्टेबल कहा जायेगा। सुनीता यादव और मंत्री के बेटे को लेकर देश भर में खूब चर्चा हुई लेकिन गुजरात सरकार की शोषण वाली प्रक्रिया के खिलाफ एक शब्द नहीं लिखे गए। जबकि सुनीता भी इस रूढ़िवादी प्रक्रिया की शिकार हैं। ऐसी नीतियों का भी विरोध होना चाहिए।

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on July 17, 2020 8:48 pm

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