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गोदी मीडिया फिर कटघरे में: दिल्ली हाई कोर्ट ने माना दिशा रवि मामले में तीन चैनलों ने की सनसनीखेज रिपोर्टिंग

मीडिया को रागदरबारी गाने के परिणामस्वरूप उच्चतम न्यायालय और हाई कोर्ट से आए दिन पक्षपाती रिपोर्टिंग के लिए फटकार/लताड़ सुनने की आदत हो गई है। सुशांत मामले में रिपब्लिक टीवी, गोदी मीडिया को कोर्ट की फटकार हो या तबलीगी जमात मामले में गोदी मीडिया या रिपब्लिक टीवी की रिपोर्टिंग का मामला हो या फिर सुदर्शन टीवी के लव जेहाद का मामला हो, कोर्ट ने पक्षपाती रिपोर्टिंग के लिए जमकर लताड़ लगाई है।

ताज़ा मामला दिशा रवि के टूलकिट के हालिया कवरेज का है, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय ने समाचार चैनल टाइम्स नाउ, इंडिया टुडे और न्यूज 18 चैनल के संपादकों को रिपोर्टिंग के दौरान उचित नियंत्रण रखने का निर्देश दिया, ताकि किसान आंदोलन टूलकिट की जांच में बाधा न हो। लेकिन संपादकों और गोदी चैनलों को इससे कोई फर्क तब तक नहीं पड़ता जब तक कि इनके संपादकों को जेल की काल कोठरी न दिखाई पड़े।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि निश्चित रूप से दिखता है कि मीडिया द्वारा सनसनीखेज रिपोर्टिंग की गई है। न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह की खंडपीठ ने टाइम्स नाउ, इंडिया टुडे और न्यूज 18 चैनल के संपादकों को निर्देश दिया कि सूचनाओं का प्रसार करते समय उचित संपादकीय नियंत्रण का उपयोग सुनिश्चित करें ताकि जांच प्रभावित न हो।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने माना है कि टूलकिट मामले का हालिया कवरेज निश्चित रूप से दिखाता है कि मीडिया द्वारा सनसनीखेज रिपोर्टिंग की गई है। जस्टिस प्रतिभा सिंह की खंडपीठ ने टाइम्स नाउ, इंडिया टुडे और न्यूज 18 चैनल के संपादकों को निर्देश दिया कि सूचनाओं का प्रसार करते समय उचित संपादकीय नियंत्रण का उपयोग सुनिश्चित करें ताकि जांच प्रभावित न हो। कोर्ट ने उक्त टिप्पणियां एक्टिविस्ट दिशा रवि की याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें इंडिया टुडे, टाइम्स नाउ और न्यूज 18 के खिलाफ टूलकिट मामले में हिंसक रिपोर्टिंग की ‌शिकायत की गई थी और कहा गया था कि चैनलों ने कथित तौर पर एकतरफा रिपोर्ट चलाई।

दिशा रवि ने टूलकिट मामले में दायर प्राथमिकी से संबंधित किसी भी जांच सामग्री को लीक करने से दिल्ली पुलिस को रोकने की भी मांग की थी। हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि निजता के अधिकार, देश की संप्रभुता और अखंडता और बोलने की स्वतंत्रता को संतुलित करने की जरूरत है। कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टों की सत्यता पर भी आरक्षण व्यक्त किया, क्योंकि दिल्ली पुलिस ने मीडिया हाउसों के साथ किसी भी जानकारी को साझा करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहाकि जबकि एक पत्रकार को अपने स्रोत को प्रकट करने के लिए नहीं कहा जा सकता है, लेकिन वह प्रामाणिक होना चाहिए। दिल्ली पुलिस का दावा है कि कुछ भी लीक नहीं हुआ है, जबकि मीडिया इसके विपरीत दावा करता है। खंडपीठ ने कहा कि जबकि प्रेस ब्रीफिंग की जाती है आम तौर पर मीडिया इस तरह के सनसनीखेज तरीके से जानकारी का प्रसार नहीं कर सकता है। हाई कोर्ट ने चैनल के संपादकों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जांच को सुनिश्चित करने के लिए सूचना का प्रसार करते समय उचित संपादकीय नियंत्रण का प्रयोग किया जाए।

हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को गृह मंत्रालय द्वारा एक अप्रैल 2010 को जारी किए गए कार्यालय ज्ञापन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी दिशा-निर्देश दिया कि दिशा रवि दिल्ली पुलिस और अन्य अधिकारियों को बदनाम न करें। मामले में उत्तरदाताओं को अपने विस्तृत हलफनामे दाखिल करने के लिए समय दिया गया।

दिशा रवि की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने हाई कोर्ट को बताया कि वह जो पहली राहत चाहते हैं, वह यह कि सभी प्रतिवादियों को दिशा निर्देश दिए जाएं कि दिशा और ग्रेटा थनबर्ग के बीच कथित व्हाट्सऐप चैट के संदर्भ न दिए जाएं। उन्होंने बताया कि न्यूज 18 ने रवि से पूछे गए सवालों और उनके जवाबों की विस्तृत रिपोर्टिंग की। इंडिया टुडे ने और भी विस्तृत रिपोर्टिंग की, जिसमें इन-बिल्ट कमेंटरी भी थी। सिब्बल ने कहा कि मीडिया को प्रोग्राम कोड के भीतर रहना होगा और संचालित होगा। उन्होंने गृह मंत्रालय द्वारा एक अप्रैल 2010 को जारी एक कार्यालय ज्ञापन का उल्लेख किया।

आरोपों के जवाब में, इंडिया टुडे की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हृषिकेश बरुआ ने कहा कि मेरे खिलाफ केवल एक आरोप है। एक डिजिटल राइट अप था, कोई भी समाचार प्रसारित नहीं किया गया। इसलिए, केबल न्यूज़ प्रोग्राम कोड मुझ पर लागू नहीं होता है। उन्होंने कहा कि उक्त लेख 16 फरवरी 2021 का है, यह याचिकाकर्ता की स्वीकार की गई स्थिति है कि मामला 15 फरवरी तक सार्वजनिक डोमेन में था, इसलिए उनकी निजता का उल्लंघन नहीं किया गया है।

टाइम्स नाउ चैनल की ओर से पेश अधिवक्ता कुणाल टंडन ने कहा कि रवि निजता के अधिकार का दावा नहीं कर सकतीं, क्योंकि मामला सार्वजनिक महत्व का है; और जैसा कि उच्चतम न्यायालय ने केएस पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ में कहा था, निजता का अधिकार सार्वजनिक हित के अधीन है।

सिब्बल ने दिल्ली पुलिस को निर्देश देने की मांग की कि वह चार्जशीट दाखिल होने तक, जांच/या किसी भी सामग्री, जो केस फाइल का हिस्सा है, को मीडिया तक न पहुंचाए। उन्होंने कहा कि मामले की जांच से जुड़ी जानकारी को मीडिया तक पहुंचाने से उन्हें रोका जाना चाहिए। 14 फरवरी को टूलकिट मामले में रवि की गिरफ्तारी के बारे में ट्वीट करने के लिए दिल्ली पुलिस के ट्विटर हैंडल को एक्टिवेट किया गया। स्पेशल सेल ने इसे रीट्वीट किया।

हाई कोर्ट ने मीडिया के दावों के संबंध में कहा कि उन्होंने दिल्ली पुलिस से सभी विवरण प्राप्त किए ‌थे, एएसजी का पक्ष जानना चाहा। हालांकि एएसजी राजू ने कहा कि दिल्ली पुलिस से कोई सूचना लीक नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि जो भी पत्रकार कह रहा है, उसे सच्चाई नहीं माना जा सकता है। वास्तव में जो कुछ भी रिपोर्ट किया जा रहा है वह भी सच नहीं हो सकता है। उन्होंने दिशा रवि पर दिल्ली पुलिस को बदनाम करने और उकसाने का आरोप लगाया, ताकि उन पर दबाव बनाया जा सके।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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This post was last modified on February 20, 2021 2:00 pm

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