हैवानियत की हद की भी इंतहा!

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 भारतीय समाज में प्रचलित धारणा के अनुसार अस्पतालों के डॉक्टरों को भगवान का दूसरा अवतार माना जाता है, निश्चितरूप से इस देश में लाखों ऐसे डॉक्टर हैं,जो अपने तन-मन से, निष्ठा से, अपनी कर्तव्यपरायणता से, कर्मठता से, प्रतिबद्धता से इस धारणा पर खरा उतरने की ईमानदार कोशिश भी करते हैं, अभी वर्तमान समय में कोरोना के भयावहतम् संक्रमण के संकटकाल में इस देश के हजारों अस्पतालों के डॉक्टरों, नर्सों और अन्य सहायक स्टॉफ ने अपनी जान पर खेलकर कोरोना से संक्रमित लाखों मरीजों को उन्होंने मौत के मुँह से खींच लाने का सुकार्य किए हैं, लेकिन इस पावन कर्तव्य को निभाने में खुद ही हजारों की संख्या में शहीद भी हो गए हैं!

लेकिन इसी देश में सभी डॉक्टरों का व्यवहार इतना मानवीय नहीं है, डॉक्टर के रूप में इस पेशे में कुछ भगवान की जगह हैवान भी बैठे हैं,जो इस पवित्र पेशे में लगे सभी उन डॉक्टरों को भी बदनाम कर रहे है,जो अपना काम पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा तथा समर्पण से कर रहे हैं, आज के समाचार पत्रों के अनुसार आगरा के एक प्राइवेट अस्पताल में 100 मरीज भर्ती थे, लेकिन जैसाकि इस देश में सभी जगह हो रहा था, वहाँ भी ऑक्सीजन की कमी थी, इसके समाधान के लिए उस अस्पताल के मालिक ने,जो खुद भी एक डॉक्टर है, एक ऐसा हैवानियत भरा कदम उठाया, जिसे सुनकर इस देश के हर संवेदनशील व मानवता में विश्वास रखनेवाला व्यक्ति का रोम-रोम सिहर जाएगा,उसने अपने अस्पताल में भर्ती 100 मरीजों पर एक एक्सपेरिमेंट किया कि अगर 5 मिनट के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित कर दिया जाय तो क्या होगा?

उसने अपना यह हैवानियत भरा एक्सपेरिमेंट पिछले 26 अप्रैल 2021 को अलसुबह 7 बजे करके दिखा भी दिया,उस हैवान डॉक्टर के अनुसार ही, ‘इससे तत्काल ही 22 गंभीर मरीज साँस लेने के लिए हाँफने लगे,उनका शरीर नीला पड़ गया और उनकी तत्काल मौत हो गई,फिर मैंने बाकी जीवित मरीजों के परिजनों को ऑक्सीजन खुद लाने को कह दिया।’

फिर भारत में जैसा कि हमेशा से लीपापोती होती आई है,होना शुरू हो गया,जिला प्रशासन ने इस घटना की जाँच का आदेश जारी कर दिया, लेकिन वहां हुई कुल 22 लोगों की जानबूझकर की गई हत्या को कम करके आगरा जिला प्रशासन अभी से ही केवल 7 लोगों की मौत होने की बात स्वीकार करने की बेशर्मी दिखा रहा है, इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगे की जाँच में जबरदस्त धाँधली होगी।

आपको याद होगा कुछ सालों पूर्व 15 मई 2018 को  वाराणसी के चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर का काम भी भीड़भरे बाजार में एक सड़क के ऊपर पुल बनाने का काम बगैर बैरिकेडिंग के धड़ल्ले से चल रहा था,अचानक निर्माणाधीन पुल की हजारों टन भारी एक कंक्रीट की बीम लोगों के ऊपर ही अचानक ही आकर गिर पड़ी! उस अत्यंत दुःखद घटना में 18 लोग तो तुरंत उस बीम से दबकर मर गये,11अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गये! उस घटना में भी उत्तरप्रदेश के अपराधिक पृष्ठभूमि से आया मुख्यमंत्री कथित योगी की तरफ से आनन-फानन में जाँच आयोग बिठा दिया गया, उस घटना को हुए अबतक तीन साल होने जा रहे हैं, आपको आजतक पता चला कि दोषियों को उस घटना में 18 लोगों की अपराधिक व घोर लापरवाही की वजह से हत्या के अपराध में उस हत्यारे ठेकेदार को क्या सजा मिली? सजा मिली ही नहीं !

बाद में अखबारों में यह एक रिपोर्ट जरूर छपी थी कि उस हत्यारे ठेकेदार का कोई रिश्तेदार मंत्री या विधायक योगी मंत्रिमंडल में है,उसे ठेका अपने उसी रिश्तेदार की सिफारिश पर मिल जाती है, जबकि उसे ठेके का कोई अनुभव ही नहीं है! हकीकत यह है कि जाँच आयोग बैठाने का मतलब ही यही है कि उस केस को गहरे दफ्न कर दिया जाय, जघन्यतम् अपने मित्र दोषियों को साफ बचा लिया जाय! हकीकत यह है कि इस देश में गंभीर से गंभीर समस्या का निराकरण नहीं किया जाता, ताकि वह फिर दोबारा न होने पाए, अपितु उसको हमेशा सदा दबाया, छुपाया जाता है!  

यह देश विभिन्न प्रकार की अजीबोगरीब हरकतों, मूर्खतापूर्ण कुकृत्यों व क्रूर तथा वहशी लोगों से भरा पड़ा है, दुनिया में कहीं आपने सुना है कि अपनी जान बचाने के लिए मरीज जिस अस्पताल में भर्ती हुआ हो, वहाँ का एक ऐसा क्रूर, नरभक्षी डॉक्टर हो, जो ऐसा अक्षम्य कुकृत्य कर दे कि जिसके चलते केवल एक नहीं अपितु 22 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठें!

अभी तक हम सभी ने यही सुना था कि अस्पतालों में मौत से जूझते मरीजों को ऑक्सीजन का सहारा देकर उनके जीवन को बचाने का भरसक प्रयत्न और कोशिश की जाती है,जिसमें काफी प्रतिशत मामलों में सफलता भी मिल जाती है, बहुत से मरीजों को पुनर्जीवन भी मिल जाता है, लेकिन आज तक के अपने जीवनकाल में यह पहली बार सुनने को मिला कि आगरा में एक ऐसा नरपिशाच और विकृत मानसिकता का डॉक्टर भी रहता है, जो अपने जीवन-मृत्यु से जूझते,अपने अस्पताल के सैकड़ों मरीजों के साथ ऐसा प्रयोग करने की न केवल विकृत सोच रखता है, अपितु उस विकृत सोच को अमली जामा पहना कर 22 मरीजों की सुनियोजित तरीके से हत्या तक कर डालता है ! 

यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि एक स्वस्थ्य व्यक्ति भी मात्र मुश्किल से एक मिनट बगैर साँस लिए जी सकता है! जो मरीज मर रहा हो उसकी तो साँस ही ऑक्सीजन सप्लाई पर निर्भर होती है,वैसी स्थिति में इस दरिंदे व नरपिशाच डॉक्टर द्वारा पूरे 5 मिनट तक ऑक्सीजन की सप्लाई रोक देने का कुकृत्य सोचकर भी सिहरन पैदा हो जाती है!

बेशर्मपना, अमानवीयता और पैशाचिक कृत्य की इंतिहा तब होती है, जब ये नरभक्षी कथित डॉक्टर अपने मरीजों की जान बचाने के लिए नहीं,अपितु उनकी हत्या करने के लिए मॉकड्रिल का रिहर्सल करता है! आज तक सारी दुनिया किसी आपातकाल में मॉकड्रिल की बात सुनती आई है,जिसमें मनुष्यों, पशु-पक्षियों या पर्यावरण को भयंकरतम् आकस्मिक प्राकृतिक या मानवजनित आपदा यथा आग लगने, तूफान आने, सड़क या ट्रेन या हवाई या समुद्री दुर्घटनाओं में उनके बहुमूल्य जीवन को बचानेहेतु मॉकड्रिल का अभ्यास किया जाता है।

परन्तु इस घटना में तो इस नरपिशाच दरिंदे ने अपने अस्पताल में भर्ती मरीजों की अमूल्य जान लेने के लिए मॉकड्रिल का एक्सपेरिमेंट कर दिया,जो बेचारे मरीज इस नरपिशाच डॉक्टर के अस्पताल में यह सोचकर और इसलिए भर्ती हुए होंगे कि डॉक्टर साहब हम लोगों का जीवन जरूर बचा लेंगे, उन्हें क्या पता था कि यह नरभक्षी डॉक्टर भगवान नहीं, अपितु यह मानव शरीर में छिपा हुआ एक हैवान और शैतान तथा एक समूह में हत्या कर देनेवाला एक शातिर हत्यारा है! इस जघन्य, शातिर हत्यारे को कठोरतम् दंड मृत्यु दंड मिलनी ही चाहिए,ऐसे नरभक्षी को मानव समाज में एक मिनट भी रहने का कतई अधिकार नहीं है।  

(निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम पर्यावरण संरक्षण तथा पत्र-पत्रिकाओं में लेखन’ करते हैं।)

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