Thursday, February 2, 2023

बिना डीएपी आलू बोने को मजबूर हैं उत्तर प्रदेश के किसान

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उत्तर प्रदेश में किसानों को आलू की बुआई बिना डीएपी के करनी पड़ रही है। जिसके चलते प्रदेश के किसानों में योगी सरकार के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। इस साल भारी बारिश के चलते किसानों को धान की खेती में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं आलू के बाद अब किसान गेंहू और सरसों की बुआई की तैयारी कर रहे हैं लेकिन डीएपी नहीं मिल पा रही है।

खेत का ताव जाता देख बिना डीएपी बुआई कर रहे किसान

अमूमन आलू के लिए किसान एक बीघे खेत में तीन-चार बोरी डीएपी डालता है। धान की कटाई के बाद किसानों ने खेत पलेवा कर लिया था। खेत बुआई के लिये लगभग पककर तैयार हैं। धूप तेज होने के चलते खेतों की नमी तेजी से सूख रही है। अगर नमी चली गई तो दोबारा से पलेवा करके खेत तैयार करने में बुआई दो सप्ताह विलंब हो जायेगी। ऐसे में किसान बिना डीएपी के ही आलू, सरसों, तिल अरसी की बुआई करने के लिये बाध्य हैं।

बिना डीएपी आलू लगाने वाले किसान गयादीन पटेल बताते हैं कि मुझे साठा आलू लगाना था जो जनवरी तक खाने के लिये तैयार हो जाये। लेकिन डीएपी नहीं मिलने से काफी विलंब हो गया। खेत भी खर (नमी सूख) हो गया। दोबारा पलेवा किया तो दोबारा भी खेत पककर तैयार हो गया लेकिन डीएपी नहीं मिली। मजबूरन मुझे बिना डीएपी ही आलू बोना पड़ा।

आगरा में डीएपी न मिलने पर गुस्साए किसानों ने रविवार को आगरा-जलेसर मार्ग पर जाम लगाया और जमकर नारेबाजी की। किसानों ने बताया कि 20 दिन से डीएपी के लिए भटक रहे हैं । बुवाई लेट होती जा रही है। सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं मिल रही है । बाजार में 12 सौ वाला कट्टा अट्ठारह सौ रुपये में मिल रहा है। जाम की जानकारी पर पुलिस प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। किसानों को समझा कर जाम खुलवाया। यहां करीब एक घंटे तक जाम लगा रहा।

अटेली क्षेत्र में डीएपी खाद की किल्लत के साथ यूरिया भी किसानों को पिछले 10 दिनों से नहीं मिल रही है। इस कारण किसानों को भारी परेशानी से जूझना पड़ रहा है। सरसों की बिजाई के बाद अब गेहूं की बिजाई का सीजन चला हुआ है, लेकिन किसानों को खाद नहीं मिल रही है। अटेली शहर के खाद बीज विक्रेताओं ने डीएपी के बाद यूरिया को भी मंगवाना बंद किया हुआ है।

बाज़ार में डीएपी की कालाबाज़ारी और मिलावट

सहकारी संस्थानों में डीएपी न उपलब्ध होने के चलते बाजार में डीएपी की ब्लैकमॉर्केटिंग हो रही है। और उसे दोगुने दामों के साथ साथ मिलावट करके बेंचा जा रहा है। सहसों ब्लॉक के बिहगियां गांव निवासी रमाशंकर तिवारी बताते हैं कि एक सप्ताह पहले सहसों में इफको की बोरी में मिलावटी डीएपी पकड़ी गई है। बाज़ार से महंगे दाम ख़रीद भी लें तो असली खाद नहीं मिलेगी, मिलावटी मिलेगी। जान बूझकर पैसा पानी में फेंकने का तो मन नहीं करता ना। वो बताते हैं कि सप्ताहभर से अधिकतर किसान आलू का खेत तैयार कर डीएपी का इंतजार कर रहे हैं।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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