Subscribe for notification

राष्ट्रीय स्तर पर मुफ्त टीकाकरण हो : जयराम रमेश

नई दिल्ली। कांग्रेस ने केंद्र सरकार की टीकाकरण नीति पर सवाल उठाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि 7 जून की शाम को प्रधानमंत्री ने देश को संबोधन किया और हमारी वैक्सीन नीति, टीकाकरण की रणनीति में काफी कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन की घोषणा भी की।

उन्होंने सवाल उठाते हु कहा कि, “ जब पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख कर टीकाकरण पर महत्वपूर्ण सुझाव दियेे थे तब उनकी बात मान ली गयी होती तो देश को कोरोना का तांडव न देखना पड़ता।”

18 अप्रैल, 2021 को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री को एक खत लिखा था, जिसमें उन्होंने 5 सुझाव दिए थे टीकाकरण रणनीति के संबंध में। दो दिन बाद 20 अप्रैल को जयराम रमेश ने एक प्रेस वार्ता कर ये मांग की थी कांग्रेस पार्टी की ओर से, जैसा कि वन नेशन -वन टैक्स है, वन नेशन – वन प्राइस होना चाहिए। एक देश, कई वैक्सीन हो सकते हैं, तो एक देश, मूल्य एक होना चाहिए।

2 मई को 13 विपक्षी दलों- कांग्रेस पार्टी, जेडीएस, एनसीपी, शिवसेना, तृणमूल कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, डीएमके, बसपा, जेकेपीए, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, सीपीआई और सीपीएम के नेताओं ने प्रधानमंत्री से मांग की थी कि फ्री मास वैक्सीनेशन प्रोग्राम अक्रोस दी कंट्री। नि:शुल्क, जो मुफ्त में वैक्सीन देनी चाहिए, सरकारी अस्पतालों में और निजी अस्पतालों में भी।

12 मई को, 10 दिन बाद इन्हीं पार्टियों की ओर से फिर से एक पब्लिक स्टेटमेंट आया और प्रधानमंत्री से फिर से आग्रह किया गया कि फ्री यूनिवर्सल वैक्सीनेशन प्रोग्राम अक्रोस दी कंट्री किया जाए। हमें खुशी है कि कल प्रधानमंत्री ने जो मनमोहन सिंह जी ने कहा था, जो कांग्रेस पार्टी ने कहा था, जो विपक्ष की 12- 13 पार्टियों ने कहा था, मांग की थी और जो सुप्रीम कोर्ट ने भी दो दिन पहले कहा, उसके आधार अनुसार प्रधानमंत्री ने कुछ परिवर्तन का एलान किया। तो ये पृष्ठभूमि है, प्रधानमंत्री के संबोधन में। इसको हमें भूलना नहीं चाहिए। क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री कभी सही पृष्ठभूमि नहीं देते हैं जनता के सामने। गोल-मोल कर, इतिहास को, बिल्कुल जो तथ्य हैं, उसके विपरीत जानकारी जनता के सामने लाते हैं और मैंने सोचा आज प्रेस वार्ता हम शुरु करें, इस पृष्ठभूमि के साथ।

दूसरी बात, हम खुश हैं कि कल प्रधानमंत्री ने कहा कि सारे वैक्सीन केन्द्र सरकार खरीदेगी और एक ही मूल्य होगा गवर्मेंट अस्पतालों में। केन्द्र सरकार के अस्पतालों में, राज्य सरकार के अस्पतालों में, गवर्मेंट वैक्सीनेशन प्रोग्राम और वो मुफ्त में दिया जाएगा। किसी को कोई संकोच नहीं होना चाहिए, डर नहीं होना चाहिए। परंतु उन्होंने ये बात भी कही कि 25 प्रतिशत वैक्सीन निजी अस्पतालों के लिए आरक्षित रहेगा। 25 प्रतिशत वैक्सीन प्राइवेट अस्पताल द्वारा दिया जाएगा। किस मूल्य में दिया जाएगा, किस आधार पर दिया जाएगा, इसमें कोई पारदर्शिता नहीं है। और हमारे आंकड़ो के अनुसार जो प्राइवेट अस्पताल के लिए वैक्सीन है, अब तक 50 प्रतिशत वो वैक्सीन सिर्फ 9 अस्पतालों ने उस पर कब्जा कर लिया है। और ये अस्पताल ज्यादातर महानगरों में हैं, छोटे शहरों में नहीं हैं। सिर्फ महानगरों में 9 अस्पताल हैं, चैन हैं, उन्होंने प्राइवेट सेक्टर के लिए जो एलोकेशन है 25 प्रतिशत का, उसका आधा हिस्सा ये 9 निजी अस्पतालों ने कब्जा कर लिया है। तो ये 25 प्रतिशत जो प्रधानमंत्री ने कहा है प्राइवेट सेक्टर में एलोकेट होगा, इस पर कोई पारदर्शिता नहीं है। किस मूल्य पर ये टीकाकरण होगा, किस आधार पर ये आवंटन होगा, इस पर कोई रोशनी प्रधानमंत्री ने नहीं डाली है।

हमारी मांग है, मनमोहन सिंह जी की मांग थी, कांग्रेस पार्टी की मांग थी, विपक्ष की मांग थी कि गवर्मेंट अस्पताल में हो या निजी अस्पताल में हो, टीकाकरण मुफ्त होना चाहिए। सभी भारतवासियों को मुफ्त टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध होना चाहिए। सारे देशों में ऐसा है, अमेरिका में भी है, इंग्लैंड में तो है ही है, यूरोप में भी है। पर हमारे देश में एकमात्र ऐसा देश है, जहाँ हमने कहा है कि 25 प्रतिशत वैक्सीन निजी क्षेत्र के लिए दिया जाएगा और वहाँ आप 800 रुपए, 1,000, 2,000 किसी को पता नहीं, कितना पैसा आप देंगे, किसी को पता नहीं। तो ये 25 प्रतिशत वैक्सीन निजी अस्पतालों को देना हमारे विचार में खतरनाक है, देश के हित में नहीं है, देश की जनता के हित में नहीं है और हमारी मांग फिर हम दोहराते हैं सभी भारतवासियों को टीकाकरण मुफ्त मिलना चाहिए, गवर्मेंट अस्पतालों में औऱ निजी अस्पतालों में भी।

इस संदर्भ में मैं कहना चाहता हूं कि ये कोविन रजिस्ट्रेशन जो अनिवार्य था पहले और कांग्रेस पार्टी ने कहा, कई बार कई मंचों से हमने कहा कि ये अनिवार्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि हमारे देश में कई ऐसे लोग हैं, जिनके लिए इंटरनेट की सुविधा नहीं है, डिजिटल सुविधा नहीं है, तब सरकार ने हमारी मांग सुनी, पर मांग सिर्फ आधी सुनी। अभी नीति ये है कि सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण के लिए कोविन रजिस्ट्रेशन 18 से 45 का जो एज ग्रूप है, कोविन रजिस्ट्रेशन गवर्मेंट अस्पतालों में उनके लिए अनिवार्य नहीं है, पर प्राइवेट अस्पतालों में अनिवार्य है। जैसा हमने कहा कि टीकाकरण मुफ्त होना चाहिए गवर्मेंट अस्पतालों में, निजी अस्पतालों में कोविन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं होना चाहिए। वाक इन रजिस्ट्रेशन होना चाहिए गवर्मेंट वैक्सीनेशन सेंटर में और प्राइवेट वैक्सीनेशन सेंटर में भी।

तीसरी बात, कल तो प्रधानमंत्री ने बड़ी-बड़ी बातें की कि केन्द्र सरकार वैक्सीन खरीदेगी। अच्छा है केन्द्र सरकार वैक्सीन खरीदेगी। पर किस मापदंड के आधार पर आप राज्यों को आवंटन करेंगे, क्या भेदभाव करेंगे। हम जानते हैं कि भेदभाव होता है, कोई मापदंड पारदर्शिता से अपनाया नहीं गया है और मनमोहन सिंह जी ने अपने खत में यही लिखा था कि आप खरीदिए औऱ राज्यों को आवंटन कीजिए, पर आवंटन का मापदंड पहले से तय कीजिए और पारदर्शिता के साथ आप तय कीजिए। अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि आवंटन के मापदंड आज भी हमें पूरी तरीके से पता नहीं हैं। हम मांग करते हैं कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार, दोनों मिलकर अगले कुछ ही दिनों में इस आवंटन के मापदंड तय करें। कोऑपरेटिव फेडरलिज्म इसमें अपनाएं, इसमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। एक बार पहले हुआ था, मैंने खुद जानकारी दी थी कि वैक्सीन एलोकेशन में पहले गुजरात का हिस्सा इतना ज्यादा था, अलग-अलग राज्यों की तुलना में। तो आवंटन के मापदंड पारदर्शिता से तय हों और सभी राज्यों में एक आम सहमति बनाकर ये मापदंड अपनाएं। ये तीसरी बात है।

चौथी बात और ये बहुत महत्वपूर्ण है। सरकार ने घोषणा की है, कई मंत्रियों ने कहा है कि दिसंबर तक 100 करोड़ भारतवासी वैक्सीनेट हो पाएंगे। 100 करोड़ भारतवासियों का टीकाकरण समाप्त होगा दिसंबर, 2021 तक। कई मंत्रियों ने इसकी घोषणा की है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल के महीने में हर दिन 30 लाख डोज दिए गए थे। ये आंकड़े नोट कीजिए, सरकारी आंकड़े हैं – अप्रैल के महीने में 30 लाख डोज प्रतिदिन। मई के महीने में 30 लाख डोज नहीं, पर 16 लाख डोज प्रतिदिन। अप्रैल के महीने में 30 लाख डोज प्रतिदिन और मई के महीने में 16 लाख डोज। आज मैंने पढ़ा है कि कल यानी 7 जून को फिर से 30 लाख डोज दिए गए हैं। खुशी की बात थी। 30 लाख डोज हम वापस पहुंचे हैं, जहाँ हम अप्रैल में थे।

पर अगर हमें दिसंबर, 2021 तक 100 करोड़ भारतवासियों का टीकाकरण करना है और करना ही है, इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं है हमारे सामने। अगर हमें 100 करोड़ भारतवासियों का टीकाकरण करना है सफल तरीके से, पूरे तरीके से, प्रतिदिन हमें करीब 80 लाख डोज देने पडेंगे। अप्रैल में हमने 30 लाख डोज हर दिन दिया। मई के महीने में हमने 16 लाख डोज हर दिन दिया, पर हमें करना है 80 लाख, न्यूनतम, मिनिमम 80 लाख करना है प्रतिदिन। अगर हम 80 लाख डोज करेंगे, जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर, तब दिसंबर के अंत तक हम उम्मीद कर सकते हैं कि 100 करोड़ भारतवासी करीब 80 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण सही तरीके से, पूरे तरीके से हो पाएगा।

इसकी रणनीति क्या है, इसका रोडमैप क्या है, वैक्सीन कहाँ से आएंगे, कौन-कौन से वैक्सीन आएंगे, कौन से समय में आएंगे, इस पर कोई स्पष्टीकरण प्रधानमंत्री ने नहीं दिया। इसका स्पष्टीकरण होना जरुरी है। हम चाहते हैं कि केन्द्र सरकार, प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री जनता को विश्वास दिलाएं कि हम जो 16 लाख डोज प्रतिदिन मई में था, हम 80 लाख डोज प्रतिदिन जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में कर पाएंगे।

ये कह देना बहुत आसान है कि दिसंबर तक हम 100 करोड़ भारतवासियों का टीकाकरण करेंगे। कह देना, दिसंबर में देखा जाएगा 6 महीने बाद, क्योंकि ये सरकार की रणनीति डेडलाइन नहीं है, ये सरकार की रणनीति हैडलाइन है। ये हैडलाइन आधारित सरकार है, ये डेडलाइन आधारित सरकार नहीं है। ये हैडलाइन आधारित सरकार है। तो हैडलाइन मिल गया इनको, दिसंबर तक सब हो जाएगा और दिसंबर तक हम मंगल आरती करते रहेंगे, ताली बजाते रहेंगे। तो रणनीति क्या है, जुलाई में, अगस्त में, सितंबर में, अक्टूबर में, नवंबर में और ये सवाल मनमोहन सिंह जी ने 18 अप्रैल को उठाया था कि बताइए रोड मैप क्या है, मील पत्थर क्या है? तो ये मांग हम करते हैं और कल प्रधानमंत्री ने इसके बारे में कुछ कहा नहीं।

पांचवा मुद्दा, आखिरी मुद्दा जो मैं उठाना चाहता हूं कि इस साल के बजट में वित्त मंत्री ने 35 हजार करोड़ रुपए वैक्सीनेशन के लिए अलग से रखा है। अच्छा है, इस पर बहस हुई पार्लियामेंट में। अच्छा है कि 35 हजार करोड़ रुपए अलग से रखा गया था। कल वित्त मंत्रालय के सूत्रों से एक खबर निकली, कुछ अखबारों में कि 35 हजार करोड़ रुपए पर्याप्त है, 100 करोड़ भारतवासियों के लिए। आज एक और खबर निकली है कि 35 हजार करोड़ रुपए नहीं, 50 हजार करोड़ रुपए लगेगा। प्रधानमंत्री की घोषणा जो कल की उन्होंने, उसके क्रियावंन के लिए 50 हजार करोड़ रुपए लगेंगे। 35 हजार करोड़ रुपए तो आपने बजट में एलोकेट कर दिया है। 20 हजार करोड़ रुपए आप सेंट्रल विस्टा पर खर्च कर रहे हैं। पैसे की कमी नहीं है, प्राथमिकता की कमी है, आपकी प्राथमिकता क्या है?

आज कांग्रेस पार्टी का मानना है, देश के सामने एक ही चुनौती है – टीकाकरण। 100 करोड़ भारतवासियों को हमें टीकाकरण करना चाहिए दिसंबर तक, नवंबर तक, जितना जल्द हो, उतना बेहतर होगा हमारे लिए। और अगर 50 हजार करोड़ रुपए की जरुरत है, पार्लियामेंट को बुलाइए, सप्लीमेंट्री लीजिए। पैसे की कमी नहीं है, जैसे कि मैंने कहा, 35 हजार हजार करोड़ रुपए की तो आपने पहले से ही पार्लियामेंट से अनुमति ले ली है और 20 हजार करोड़ रुपए आप सेंट्रल विस्टा पर खर्च कर रहे हैं। तो 30-35 हजार करोड़ रुपए और 20 हजार करोड़ रुपए, 55 हजार करोड़ रुपए तो वैसे ही है आपके पास। पैसे की कमी नहीं है, संकल्प की कमी है, पारदर्शिता की कमी है।

तो किस मूल्य पर आप डोज खरीदेंगे? क्या 150 रुपए होगा या 200 रुपए होगा या 300 रुपए होगा, ये जानकारी पार्लियामेंट को दीजिए, पार्लियामेंट को जल्दी बुलाइए, स्टैंडिंग कमेटी को बुलाइए। तो बिना बहस के, बिना विचार-विमर्श के, पार्टियों के साथ विचार-विमर्श नहीं, राज्यों के साथ विचार-विमर्श नहीं और जब सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया कि टीकाकरण की फाइल पेश करो। फाइल तो कहीं नहीं है, फाइल तो मेक इन इंडिया फाइल होगी अभी। फाइल तो है नहीं, कहाँ है फाइल। जो प्रधानमंत्री बोलते हैं, वही तो फाइल बनती है।

तो ये हमारे पांच सवाल हैं प्रधानमंत्री के संबोधन के संदर्भ में। पहली तो मैंने पृष्ठभूमि की बात की। दूसरी बात मैंने निजी अस्पतालों की। तीसरी बात राज्यों को जो आवंटन होगा, उसके मापदंड क्या होंगे, किस आधार पर राज्यों को दिए जाएंगे, उस पर पारदर्शिता की बात की। चौथी बात प्रतिदिन किस रफ्तार से हमें टीकाकरण करना है, कि जो 16 लाख डोज मई में प्रतिदिन था, उसे 80 लाख करना है, उसके लिए वैक्सीन की जरुरत पड़ेगी। उसके लिए रोडमैप की जरुरत पड़ेगी।

और अंतिम मुद्दा जो मैंने आपके सामने रखा, ये जो बजट प्रावधान था 35 हजार करोड़ रुपए, अगर वो पर्याप्त है, तो अच्छा है। अगर पर्याप्त नहीं है, तो जो और अधिक बजट प्रावधान की जरुरत पड़ेगी, उसे जल्द से जल्द पार्लियामेंट को बुलाकर अनुमति लीजिए। ऐसे तो पैसे की कमी नहीं है, क्योंकि आप पैसा और अलग-अलग जगह खर्च कर रहे हैं। प्राथमिकता लाइए सार्वजनिक खर्च के संदर्भ में और प्राथमिकता लाइए। और प्राथमिकता एक, दो, तीन प्राथमिकता नहीं हो सकती है, प्राथमिकता मायने एक ही है और वो एक है टीकाकरण। हम चाहते हैं कि नवंबर या दिसंबर तक जितना जल्द हो सके, उतनी जल्द 100 करोड़ भारतवासियों को टीकाकरण करवाना ही है, इसके अलावा हमारे सामने और कोई विकल्प नहीं।

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on June 8, 2021 7:51 pm

Share