Sunday, May 29, 2022

गांधी बनाम संघ के वैचारिक टकराव के कारण सर्वोदय सम्मेलन स्थगित

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देश के सबसे बड़ी गांधीवादी संस्था अखिल भारतीय सर्व सेवा संघ का इस सप्ताह होने वाला अधिवेशन और सर्वोदय समाज सम्मेलन जिन कारणों से स्थगित हुआ है वह अपने आपमें गांधीवादियों के लिए विचारणीय है।

यह अधिवेशन और सम्मेलन हर दो साल में होता है। इस बार यह कोविड काल के बाद बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा था, लेकिन गांधी और संघ के वैचारिक टकराव के कारण इसे स्थगित कर दिया गया है।

सर्व सेवा संघ का यह कार्यक्रम जौरा मध्य प्रदेश में एकता परिषद के सहयोग से महात्मा गांधी आश्रम जौरा में आयोजित किया जा रहा था। जिसमें बागियों (चंबल के आत्मसर्पण कर चुके डाकुओं) के समर्पण के पचास साल पूरे होने पर उनका सम्मान किया जाना है। साथ ही बाद के बागी समर्पण में मुख्य भूमिका निभाने वाले विख्यात गांधीवादी सुब्बाराव जी को श्रद्धांजलि दी जानी थी।

सर्व सेवा संघ का मूल कार्यक्रम यह था कि 12 अप्रैल को सर्व सेवा संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होती, और 13 अप्रैल को सर्वोदय अधिवेशन आयोजित किया जाता, जिसमें सर्व सेवा संघ के संगठनात्मक विषयों पर चर्चा होती। 14 से 16 तक वृहत सर्वोदय समाज सम्मेलन के तहत आयोजित बागी सम्मान के कार्यक्रम में वर्तमान समय के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होनी थी।

जिस समय इस कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा था उस समय कार्यक्रम की सहयोगी संस्था एकता परिषद से यह सुझाव आया था कि सर्वोदय समाज सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय कृषि मंत्री व स्थानीय सांसद नरेन्द्र तोमर को मुख्य अतिथि बनाया जाए। लेकिन दो तीन दौर की वार्ता के बाद यह साफ कर दिया गया था कि सर्वोदय के कार्यक्रमों में किसी राजनीतिक दल/मंत्री को बुलाने या मुख्य अतिथि बनाने की परम्परा नहीं रही है इसलिए मंत्री को आमंत्रित ना किया जाए।

लेकिन कार्यक्रम से 4-5 दिन पहले कार्यक्रम का एक निमंत्रण पत्र सोशल मीडिया में चलने लगा, जिसमें 14 अप्रैल के सर्वोदय समाज सम्मेलन के मुख्य अतिथि के रूप में मंत्री महोदय का नाम शीर्ष पर था। इस निमंत्रण पत्र से सर्वोदय समाज के लोगों में बेचैनी हो गई। जब एक बार यह तय हो गया था कि सम्मेलन में किसी राजनैतिक व्यक्ति को नहीं बुलाया जाएगा तो क्यों कर ऐसा हुआ, यह सवाल गांधीवादियों को बेचैन कर गया। इस पर गांधीजनों और सर्वोदय संघ से जुड़े प्रदेश सर्वोदय मण्डलों ने विरोध करना शुरू कर दिया।

आयोजकों ने स्थिति संभालने के लिए कहा कि जिस कार्यक्रम में मंत्री को मुख्य अतिथि बनाया गया है उसका सर्वोदय के कार्यक्रमों से कोई सम्बन्ध नहीं है।  लेकिन निमंत्रण में साफ-साफ सर्वोदय समाज का उल्लेख किया हुआ था। यह भी कहा गया कि दो अलग-अलग है कार्यक्रम हैं, सर्वोदय का यह कार्यक्रम इसके बाद तय किया गया है। गांधीजन इस कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम में ना जाकरअपने रहवास में ठहर सकते हैं, और इस कार्यक्रम के बाद अपने कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। लेकिन यह सारी बातें गांधीवादियों को स्वीकार नहीं हुईं।

इस बीच गांधियन ने कार्यक्रम के लिए विकल्प तलाशना शुरू कर दिया। सेवाग्राम के गांधी आश्रम चलाने वाली संस्था सेवाग्राम आश्रम संस्थान के अध्यक्ष टी आर प्रभु ने सुझाव दिया कि यदि मंत्री महोदय जिस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनाए गए हैं उस कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र से सर्वोदय समाज सम्मेलन हटा दिया जाए और एकता परिषद इस कार्यक्रम को जिस तरह आयोजित करना चाहे करे तो सर्वोदय के लोग स्वीकार कर लेंगे।  लेकिन इस सुझाव पर भी आयोजकों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई, और आखिर में यह सम्मेलन ही स्थगित कर देना पड़ा।

सम्मेलन के स्थगित होने पर कुछ सर्वोदय के लोगों का विचार था कि मंत्री को कार्यक्रम में आने देना चाहिए था, और उसे अपनी बात कहने देने का अवसर देना चाहिए था। साथ ही उसको गांधी विचार की मौजूदा चिन्ताओं से अवगत कराना चाहिए था। लेकिन सत्ता पार्टी की कार्यप्रणाली और मानसिकता को देखकर यह नहीं लगता कि वो किसी की सुनते भी हैं। पिछले वर्षों में गांधी संस्थाओं पर जिस तरह सीधे और पीछे से कब्जा किया गया है, यह उनकी सोच को समझने के लिए काफी है। साबरमती आश्रम का मामला इन सबमें सबसे अहम है। 

सर्व सेवा संघ और गांधी जनों के लगातार विरोध-प्रदर्शन,  ज्ञापनों और पदयात्राओं पर इसी केन्द्र सरकार ने कोई नोटिस नहीं लिया, और साबरमती आश्रम में अपनी मनमानी करती रही। मौजूदा सत्ता की वैचारिकी और राजनीति का चेहरा कितना क्रूर है यह पर्यावरण मुद्दे पर स्वामी सानंद की मौत से साफ हो गया था। ऐसे में यह उम्मीद करना कि किसान आंदोलन के दौरान एकदम अड़ियल रुख दिखाने वाला असंवेदनशील मंत्री गांधी जनों की जरा सुनेगा भी। सम्भव नहीं था, उसका तो पूरा फोकस अपने संसदीय क्षेत्र में गांधी और सर्वोदय के नाम पर अपनी छवि सुधारने का होगा और वो यही काम अब भी करेगा।

बहरहाल सर्व सेवा संघ के इस कार्यक्रम के स्थगित होने से संघ का आंतरिक वैचारिक संघर्ष भी बढ़ेगा, पिछले दो साल से सर्व सेवा संघ में दो गुट अपने को असली सिद्ध करने की कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, इस विवाद ने भी सर्व सेवा संघ को बहुत नुकसान पहुंचा दिया है, सम्मेलन स्थगित होने से सर्व सेवा संघ में गांधी बनाम सत्ता की राजनीति, और गांधी बनाम संघ की नीति पर कितना वैचारिक संघर्ष तेज होगा यह आने वाला समय बताएगा।

(इस्लाम हुसैन लेखक और टिप्पणीकार हैं।)

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