फ्लाप चुनावी रैलियां करवा सकती हैं रसोई गैस सिलेंडर के दामों में कमी

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मित्रों एक दिन सुबह जब आप सो कर उठेंगे तो हो सकता है आपको प्रिंट मीडिया में पढ़ने और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर सुनने को मिले कि रसोई गैस सिलेंडर सब्सिडी वाला कम से कम 100 से ₹200 सस्ता और कॉमर्शियल सिलेंडर कम से कम 200 से ढाई सौ रुपए सस्ता हो गया है। यह सुबह शनिवार यानि कल से अगले हफ्ते में किसी भी दिन हो सकती है। इसकी अभी तक ऑफिशियल घोषणा तो नहीं हुई है लेकिन दिल्ली के उच्च सर्किल में यह कानों कान सूचना फैली हुई है। दरअसल केंद्र सरकार की ढोल ताशे के साथ लांच की गई उज्जवला योजना पूरी तरह फेल हो गई है और कॉमर्शियल सिलेंडरों की बिक्री में भारी गिरावट आई है। अब ऐसा क्यों हुआ है इस पर शोध जारी है, लेकिन कहा जा रहा है कि भीषण महंगाई से जनता पूरी तरह  त्रस्त है और चुनावी रैलियों के फ्लॉप होने का यह बहुत बड़ा कारण है।

हिमाचल के विधानसभा उप चुनावों में मिली करारी पराजय के बाद जिस तरह अचानक डीजल-पेट्रोल से टैक्स कम किया गया और तेल कम्पनियों ने उस दिन से आज तक इसके दाम स्थिर रखे इसी से सरकारी स्तर पर दाम कम करने की शुरुआत हुई।फिर 30 नवम्बर से फ्री राशन बंद करने की घोषणा के बाद मोदी सरकार ने  इसे मार्च तक के लिए बढ़ा दिया है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत, सरकार नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत पहचान किए गए 80 करोड़ राशन कार्ड धारकों को मुफ्त राशन दिया जाता है। मुफ्त राशन कार्ड धारकों को राशन की दुकानों के जरिए उनको मिलने वाले सब्सिडी वाले अनाज के अलावा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का राशन दिया जाता है।सरकार थोक ग्राहकों को चावल और आटा दे रही है, जिससे घरेलू बाजार में उनकी उपलब्धता में सुधार हो सके और कीमतों को भी काबू में करने में मदद मिले।

कोरोना संक्रमण के बाद लॉकडाउन की वजह से रोजी-रोटी के लिए परेशान लोगों को सरकार ने फ्री राशन योजना शुरू की थी। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत गरीबों को मुफ्त प्रति व्यक्ति 5 किलो खाद्यान्न मिलता है। पीएचएच योजना के प्रत्येक लाभार्थी को पांच किलो एवं अंत्योदय योजना के कार्डधारियों को 35 किलोग्राम नियमित खाद्यान्न (दो रुपये प्रति किलो गेहूं व तीन रुपये प्रति किलो चावल) दिया जाता है।

चुनावी माहौल में योगी सरकार एक दिसंबर से ही राशन कार्ड होल्डर्स को अनाज के साथ अब खाद्य तेल, आयोडाइज्ड नमक,दाल और चना भी जोड़ दिया गया है।पात्र गृहस्थी परिवारों को प्रति व्यक्ति 5 किलो खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। अगर किसी परिवार में 7 सदस्य हैं तो उस परिवार को 35 किलो खाद्यान्न दिया जा रहा है। इसमें चावल व गेहूं के साथ-साथ एक किलो नमक, तेल व दाल भी उपलब्ध करायी जा रही है। कहा गया कि इससे गरीब परिवारों पर भार कम होगा।

सरकार द्वारा आयात में रियायत देने से देश में खाद्य तेल की कीमतों में राहत मिली है। बिनौला और मूंगफली के भाव में गिरावट आने की वजह से तेल की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। इसके अलावा सोयाबीन और पाम तेल समेत कई खाद्य तेल सस्ते हो गए हैं। इसके अलावा सोयाबीन दाना और लूज की कीमतों में भी सुधार देखने को मिला है।सरसों के तेल के दाम में भी गिरावट देखने को मिल रही है।

सोयाबीन के किसान नीचे भाव में अपनी फसल बेचने से बच रहे हैं, जिससे सोयाबीन दाना एवं लूज के भाव में गिरावट आई है। वहीं, डीओसी की स्थानीय मांग होने से भी सोयाबीन तिलहन में सुधार मिला है। सामान्य कारोबार के बीच सरसों एवं मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल सहित कई अन्य तेल- तिलहन के भाव पूर्व स्तर पर बने हुए हैं। पिछले लगभग ढाई महीने में मूंगफली तेल में 35 रुपये किलो, बिनौला में लगभग 23 रुपये किलो की गिरावट आई है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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