Thursday, October 28, 2021

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शाह के आवास पर प्रदर्शन कर रही छात्राओं के प्राइवेट पार्ट्स पर पुलिसकर्मियों का बूटों से हमला

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गृहमंत्री अमित शाह के घर के सामने दिल्ली पुलिस की महिलाओं ने पुरुष पुलिसवालों के सामने छात्राओं के कपड़े उतारे और गुप्तांगों में लात मार मारकर उन्हें घायल कर दिया। श्रेया के और नेहा तिवारी ने इस आशय की जानकारी अपने फेसबुक पेज पर वीडियो वक्तव्य के रूप में साझा की है।

पीड़ित छात्रा नेहा तिवारी ने अपने वीडियो बयान में बताया है कि 10 अक्टूबर को हम लोग किसानों पर हिंसा और लखीमपुर खीरी में जनसंहार के मुद्दे पर केंद्रीय गृहमंत्री के आवास पर अजय मिश्रा का इस्तीफा मांगने के लिये प्रोटेस्ट करने गये थे। हम उनके आवास पर पहुंचे भी नहीं थे कि तभी हम सबको दिल्ली पुलिस द्वारा डिटेन कर लिया गया और बहुत बुरी तरीके से पीटा गया। जब वहां मौके पर महिला कांस्टेबल नहीं थी तब पुरुष कांस्टेबल ने हमारे साथ धक्का मुक्की की और हमें बसों में रगड़कर लेकर जाया गया।

नेहा आगे कहती हैं कि हमारा सामान वहां छूट गया। जब हमने मांग की कि हमारा सामान हमें वापस दिया जाये तब हमें और पीटा गया। सुरक्षाकर्मियों का व्यवहार ऐसा थे जैसे वो हमसे बदला लेना चाह रहे हों। हमारे ग्रुप में चार लड़कियों थीं चारों को अलग अलग बसों में लेकर जाया गया। मैं और श्रेया एक बस में थी। ये लोग हमें उठाकर बस में लेकर गये हैं।

दिल्ली पुलिस की बर्बरता का बयान करते हुये नेहा तिवारी कहती हैं, “जिस तरीके से हम पर पुलिस ने हमला किया है वो किसी भी तरह से सेक्सुअल हैरेसमेंट से कम नहीं था। हमारे प्राइवेट पार्ट्स में मारा गया है। जूतों से हमारे पूरे शरीर पर जहां-जहां पॉसिबल है वहां-वहां मारा इन्होंने हमें। हमारे मुंह पर गालियां देकर हमें जूतों से पीटा गया”।

बता दें कि किसानों पर हिंसा, उनकी मांगों को लेकर अनसुना किये जाने, लखीमपुर खीरी तिकुनिया जनसंहार और तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ़, आरोपी मंत्री अजय मिश्रा की गिरफ्तारी व इस्तीफे की मांग को लेकर आइसा ने 10 अक्टूबर को अमित शाह के आधिकारिक आवास के सामने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था।

गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा पिछले कुछ दिनों से अपने आरोपी बेटे का बचाव कर रहे हैं, भले ही स्पष्ट वीडियो कुछ और ही बता रहे हों। उनके नफ़रत के शब्दों ने ही लखीमपुर खीरी में किसानों के खिलाफ ऐसी हिंसा को भड़काया।
आइसा ने एक बयान देकर कहा है कि “यह लगभग एक पैटर्न बन गया है जहां भाजपा नेता सार्वजनिक मंचों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को धमकी देते हैं और इसके तत्काल बाद उनके अनुयायियों से बड़ी हिंसा होती है! यह भी एक नियम है कि ऐसे भाजपा नेताओं को उनके भाषणों के स्पष्ट सबूतों के बावजूद पुलिस द्वारा मुक्त छोड़ दिया जाता है”!

सीपीआई (एमएल) ने इस संदर्भ में एक वक्तव्य जारी करके 10 अक्टूबर को महिला छात्र कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस कर्मियों द्वारा किए गए निर्मम यौन हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। उसने अपने वक्तव्य में कहा है कि छात्र और छात्राएं गृह मंत्री अमित शाह के आधिकारिक आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे और मांग कर रहे थे कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को उनके पद से बर्खास्त किया जाए। दिल्ली पुलिस की महिला कर्मियों ने दो छात्राओं – आइसा कार्यकर्ता श्रेया के और नेहा तिवारी – के कपड़े उतार दिए और उनके प्राइवेट पार्ट में बार-बार लात मारी। इससे दोनों महिलाओं को चोटें आई हैं।

बयान में आगे कहा गया है कि क्या गृह मंत्रालय के आदेश पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को एसयूवी के नीचे कुचले जाने की उम्मीद करनी चाहिए? क्या विरोध करने वाली महिलाओं को अब गृह मंत्रालय के आदेश पर यौन उत्पीड़न की उम्मीद करनी चाहिए? अमित शाह और अजय मिश्रा टेनी यही संदेश देते दिख रहे हैं।

सीपीआईएमएल ने अपने वक्तव्य में मांग की है कि मंदिर मार्ग थाने के एसएचओ और मारपीट करने वाले कर्मियों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज़ की जाए। साथ ही पार्टी ने लोगों से आह्वान किया कि वो गृह मंत्री शाह के घर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा यौन उत्पीड़न का विरोध करें। हम पूरे भारत के किसानों, श्रमिकों, छात्रों, महिलाओं से गृह मंत्रालय के ख़िलाफ़ विरोध करने की अपील करते हैं। पार्टी का कहना था कि शहीद किसानों के साथ एकजुटता दिखाने की हिम्मत करने वाली महिलाओं का यौन शोषण और फिर उन पर हमला किया जाता है।

वहीं पार्टी की पोलित ब्यूरो सदस्य कविता कृष्णन ने इस मसले पर पीड़ित छात्रा श्रेया के स्टेटमेंट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुये अमित शाह को टैग कर लिखा है कि “अमित शाह आपके घर के सामने आपकी दिल्ली पुलिस की महिलाओं ने पुरुष पुलिस वालों के सामने छात्राओं के कपड़े उतारे, गुप्तांगों में लात मारा और घायल किया। गृह मंत्री के घर के सामने हुए इस कांड की सज़ा देश की महिलाएँ देंगी आपको। द्रौपदी पर हंसने वाले आप जैसे दु:शासन ख़बरदार.. “।

इसके आगे उन्होंने किसान नेता राकेश टिकैत व योगेंद्र यादव, अशोक धावले को टैग करके लिखा है कि देखिए किसानों के हत्यारे को गृह मंत्री पद से हटाने की माँग के साथ अमित शाह के घर पर प्रदर्शन कर रहे छात्राओं के साथ किस तरह बर्बर यौन हिंसा किया दिल्ली पुलिस ने की।

बूट की मार से योनि में सूजन है: श्रेया का बयान

महिला पुलिस कर्मियों द्वारा प्राइवेट पार्ट्स पर बूट से मारने की पूरी घटना का मार्मिक उल्लेख करते हुये श्रेया अपने बयान के शुरुआती पंक्तियों में कहती हैं, ” इसे अरक्षितता और अपमान की स्थिति में लिख रही हूँ। हमारे शरीर पर आज जो घटनाएं घटी हैं, वे उन लोगों के शांत स्वभाव को परेशान करने के लिए पर्याप्त हैं जिन्होंने इस शासन की क्रूरता के ख़िलाफ़ बाड़ पर बैठना चुना है”।

श्रेया ने आगे बताया कि आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ता ने अमित शाह के आवास के सामने एक विरोध मार्च निकालने का फैसला किया था, हमारी मांगें सीधी थीं, वे मांगें थीं जो इस देश में उन लोगों द्वारा की गई हैं जिनके पास अभी भी नागरिक विवेक है उनके दिल में छोड़ दिया। हमने लखीमपुर खीरी हत्याकांड में किसानों की हत्या के लिए मारे गए आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी और उनके पिता अजय मिश्रा को बर्खास्त करने की मांग की, जो वर्तमान केंद्रीय मंत्रिमंडल में गृह राज्य मंत्री हैं।

विरोध दोपहर करीब 1 बजे शुरू हुआ जब 15-17 छात्रों ने, निहत्थे और शांतिपूर्ण, तख्तियों और पोस्टरों के साथ विरोध शुरू कर दिया। धरना स्थल पर कोई महिला पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं थी। पुरुष साथियों को बेरहमी से पीटा गया और एक बस में बंद कर दिया गया। मेरे साथ मौजूद महिला साथियों में से एक नेहा तिवारी पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रही थीं, तभी एक पुलिस कर्मी ने उनका फोन छीन लिया। मैंने नेहा (आइसा राज्य सचिव) के साथ मिलकर फैसला किया कि जब तक हमें नेहा का फोन वापस नहीं मिलेगा, हम किसी भी कीमत पर हिरासत में लिए जाने से इनकार करेंगे। हम दोनों (मुझे और नेहा तिवारी) को पहले सड़क के विपरीत दिशा में ले जाया गया और फिर उन्हें 300-400 मीटर की दूरी तक सड़क पर घसीटा गया। ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों ने मुझे शर्मसार करने के लिए पहले मेरा कुर्ता उतार दिया, मुझे बस के अंदर फेंक दिया और फिर 20 मिनट तक मेरे गुप्तांगों पर बार-बार लात मारी।

श्रेया आगे बताती हैं कि “उन्होंने नेहा के साथ भी ऐसा ही किया और तेज दर्द देने के लिए बार-बार उसके दाहिने पैर पर वार किए। वे तभी रुके जब मैं अपनी योनि के अंदर अत्यधिक दर्द महसूस करने के कारण जोर-जोर से रोने लगी। पुरुष पुलिसकर्मी बस खड़े होकर यह सब होता देख रहे थे। महिला कर्मियों ने शर्म और दर्द पैदा करने के लिए विशेष रूप से कपड़ों के साथ-साथ निजी अंगों को भी निशाना बनाया, दिल्ली पुलिस ने अन्य विरोध प्रदर्शनों में भी इस रणनीति का पालन किया है। फिर हमने अस्पताल ले जाने के लिए कहा, क्योंकि मैं और कॉमरेड नेहा दोनों गंभीर दर्द में थे, मेरे प्राइवेट पार्ट में दर्द हो रहा था और मेरे बाएं हाथ में सूजन आ गई थी।

प्राइवेट पॉर्ट्स पर बूट से मारने के बाद उनके अस्पताल ले जाने से इन्कार करने की घटना का उल्लेख करते हुये श्रेया अपने बयान में आगे लिखती हैं – “नेहा को भी इसी तरह निशाना बनाया गया था और लगातार पिटाई से उसके पैर सूज गए थे। हमारी चोटों को देखते हुए हमें तत्काल चिकित्सा सहायता लेने के अधिकार से वंचित कर दिया गया और बाद में हमें धमकी दी गई कि अगर हमने प्राथमिकी दर्ज करने की हिम्मत की तो परिणाम भुगतने होंगे।

श्रेया महिला यौनहिंसा का दिल्ली पुलिस टूलकिट के तौर पर रेखांकित करके लिखती हैं कि – “महिला प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाना दिल्ली पुलिस के टूलकिट में अक्सर इस्तेमाल किया जाने वाला हथियार बन गया है, मुखर महिलाओं को विशेष रूप से उन्हें अपनी जगह दिखाने के लिए लक्षित किया जाता है, जैसा कि मेरे निजी अंगों को निशाना बनाने से पहले महिला पुलिस कर्मियों में से एक ने उद्धृत किया था, ‘हम तुम्हें तुम्हारी औकात दिखाएंगी। “
श्रेया आगे लिखती हैं कि ” अगर कोई हम पर विश्वास करना चाहे और हमें रोते हुए और मदद मांगते हुए सुनना चाहे तो हमारे पास पूरी घटना की वॉयस रिकॉर्डिंग है। मेरे क्लिटोरिस क्षेत्र पर खरोंच हैं और हर बार जब मैं पेशाब करती हूं तो जलन की तरह महसूस होती है। महिलाओं को परेशान करने वाले सड़क किनारे लुम्पेन को अक्सर टीवी पर दिखाया जाता है, लेकिन पुलिस जैसे राज्य समर्थित बलों को इस संबंध में पूरी छूट का आनंद मिलता है, वे महिलाओं के शरीर पर गंभीर और दर्दनाक हिंसा को कायम रख सकते हैं और अभी भी न्यायिक और सार्वजनिक संस्थानों के समर्थन का आनंद ले सकते हैं”।

श्रेया आगे लिखती हैं कि “छात्रों से अक्सर पूछा जाता है कि वे करदाताओं के पैसे क्यों बर्बाद करते हैं, लेकिन एक पूरी तरह से भ्रष्ट, क्रूर पुलिस बल से शायद ही कभी पूछा जाता है कि यह जनता की जेब से प्राप्त होने वाले वेतन का क्या करता है, कई महिलाएं जो उत्पादों पर कर का भुगतान करती हैं। क्या पुलिस लोगों के प्रति वफादार है, क्या यह लोगों के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए है, या यह कोई और है जिसे उन्हें बचाने और बनाए रखने के लिए भुगतान किया जाता है। मैं केवल इतना कह सकता हूं कि इसने हमारे समाज के कमजोर लोगों के बजाय शासक वर्ग, सत्ता में राजनीतिक अभिजात वर्ग की सुरक्षा के लिए और अधिक किया है, जिन्हें पुलिस ‘उनके औकात में रखने’ का लक्ष्य रखती है।
फिर भी, हम यह भी स्पष्ट रूप से कहना चाहती हैं कि इस देश की महिलाएं अमित शाह और उनकी कठपुतली पुलिस से नहीं डरती हैं। हम तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक अजय मिश्रा इस्तीफा नहीं देते और सभी 3 कठोर कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेते।
(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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