Tuesday, December 7, 2021

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पटना: सरपंच बिंदु देवी के खिलाफ पुलिस उत्पीड़न की कार्रवाई को लेकर सामाजिक संगठनों में रोष

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पटना। बिहार की प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता व सरपंच बिंदु देवी की गिरफ्तारी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एनएपीएम समेत कई सामाजिक संगठनों ने पुलिस उत्पीड़न की इस घटना पर आक्रोश जताया है। इनका आरोप है कि सत्ता के संरक्षण में पंचायत चुनाव में विवाद उत्पन्न कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश के रूप में सारण जिले के सगुनी गांव की घटना है। एनएपीएम का आरोप है कि संगठन की वरिष्ठ कार्यकर्ता बिंदु देवी को रात के अंधेरे में पुलिस जबरन थाने में ले आई व फर्जी मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दी। इस मामले की संगठन ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर जांच की मांग की है।

मालूम हो कि सारण छपरा जिले के परसा प्रखण्ड के आदर्श पंचायत सगुनी की सरपंच बिंदु देवी प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो जनसंगठनों के राष्ट्रीय मंच (एनएपीएम) से जुड़ी हैं। जिन्हें परसा थाने की पुलिस, 24 अक्टूबर की देर शाम अंधेरे में गिरफ्तार कर, बाद में फर्जी मुकदमा दर्ज करते हुए जेल भेज दी। जबकि इस मामले में ग्रामीणों का कहना है कि बिंदु के दो पट्टीदारों (देयाद) के बीच उसी दिन आपसी झगड़ा हुआ था। मारपीट होते देख बिंदु ने बीच -बचाव करते हुए झगड़े को समाप्त कराया। इस पर पंचायत चुनाव में बिंदु की भागीदारी से वंचित करने के लिए एक पक्ष ने उन्हें मुकदमे में फंसाने की साजिश रचने लगा। इसकी जानकारी हो जाने पर सरपंच बिंदु ने तत्काल थाना प्रभारी को पूरे प्रकरण से लिखित रूप से अवगत करा दी।

खास बात है कि इसके बाद शाम में अंधेरा होने पर थाने की पुलिस आयी और मारपीट करने वाले दोनों पक्षों को पकड़ने के बजाय, किसी से पूछताछ किए बिना बिंदु से दुर्व्यवहार करने लगी व अपशब्द बोलते हुए घसीटने लगी। इसका प्रतिरोध करने पर उनका बांह मरोड़कर जबरदस्ती जीप में बैठा कर थाने ले गयी। जब बिंदु ने बिना किसी वारंट के रात के अंधेरे में एक महिला सरपंच के साथ गैरकानूनी तरीके से थाने ले जाने की घटना पर प्रतिवाद की और उनके पति पुलिस अधीक्षक सारण सहित वरिष्ठ पदाधिकारियों को सूचित किए तो पहले थाना प्रभारी बोले की उनको छोड़ रहे हैं। फिर पुलिस अपने को फंसता देख, उनकी गिरफ्तारी के घंटों बाद अपने गैरकानूनी, महिला विरोधी कार्रवाई पर पर्दा डालने के लिए इनका नाम भी एफआईआर में शामिल कर दिया। इतना ही नहीं, इस मामले में उनके पति मणिलाल सहित पूरे परिवार के सभी सदस्यों पर जिसमें अधिकांश लोग दिल्ली में रहते हैं, के नाम भी प्राथमिकी में फर्जी तरीके से शामिल कर दिया।

एनएपीएम के राष्ट्रीय समन्वयक महेन्द्र यादव ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि बिंदु देवी बिहार में उन महिला सरपंच का दायित्व निभाने वाली चुनिन्दा महिलाओं में एक हैं जो आदर्श ग्राम कचहरी की अवधारणा को धरातल पर उतारने में पारदर्शिता व जवाबदेह तरीके से आदर्श स्थापित किया है। पटना विश्विद्यालय से अर्थशास्त्र व ग्रामीण विकास विषय में स्नातकोतर की पढ़ाई करने के बाद गांवों में लोगों की सेवा करने के लिए बिना लाभ वाला पद सरपंच पद पर कार्य करना शुरू किया। साथ ही राज्य के महिला आंदोलनों में व अन्य सामाजिक कार्य में उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण रही है। न्याय के साथ विकास एवं महिला सशक्तिकरण के नारे की वे सशक्त उदाहरण बन गयी हैं। उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए तो उन्हें पुरस्कार मिलना चाहिए परन्तु दुर्भाग्य है कि उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे कर पुलिस जेल भेज दी। उनके पति मणिलाल समाजिक कार्यकर्ता व एनएपीएम के वरिष्ठ साथी हैं। अनेक आंदोलनों से जुड़े हैं। वे पटना उच्च न्यायालय के ऐसे अधिवक्ता हैं जो गरीब गुरुबा के केस बिना फीस के भी लड़ते रहे हैं।

छपरा पुलिस की मनमानी व गैर कानूनी कार्रवाई राज्य के पुलिस के माथे पर कलंक लगा दिया है। यह भ्रष्ट लोगों के प्रभाव में अच्छे कार्य करने वाले लोगों के दिल में डर फैलाने वाली घटना है इसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा है कि बिंदु देवी सरपंच पर फर्जी तरीके से किए गये मुकदमे की समीक्षा करते हुए उन्हें तत्काल रिहा किया जाए, उनके साथ दुर्व्यवहार करने वाली पुलिसकर्मी रूपम कुमारी और थाना प्रभारी अमरेन्द्र कुमार को तत्काल निलम्बित किया जाए, पुलिस अधीक्षक सारण को जब सभी सूचना मिली उसके बाद बिंदु देवी को छोड़ने के बजाए उनके ऊपर मुकदमा दर्ज कराया गया यह उनके पद के प्रतिकूल आचरण है इसलिए इस मामले की जांच कराकर वरीय पुलिस पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

इंडियन कम्युनिटी एक्टिविस्ट नेटवर्क के राष्ट्रीय संयोजक दीपक धोलकिया ने भी पुलिस उत्पीड़न की कारवाई की निंदा की है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में धोलकिया ने कहा है कि रात के अंधेरे में बिना किसी वारंट के बिंदु देवी की गिरफ्तारी गैरकानूनी है। ऐसे कृत्य के दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी ने बिंदु देवी के प्रकरण में मुख्यमंत्री से जांच कर कारवाई की मांग की है। संगठन के प्रियदर्शी ने कहा कि इसको लेकर संगठन की 28 अक्टूबर को पटना में प्रांतीय बैठक बुलाई है। जिसमें आंदोलन की रूप रेखा तय की जाएगी।

बिहार महिला समाज की कार्यकारी अध्यक्ष निवेदिता झा ने सामाजिक कार्यकर्ता बिंदु देवी के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कर की गई पुलिस उत्पीड़न की कारवाई की निंदा की है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूरे प्रकरण की जांच कराकर दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

निवेदिता ने कहा कि जिले के परसा प्रखण्ड के सगुनी की आदर्श सरपंच, प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता बिंदु देवी को गिरफ्तार कर, फर्जी मुकदमा दर्ज करने की घटना पुलिस के गुंडाराज का परिचायक है। सामाजिक जीवन में महिला अधिकारों की रक्षा व गैर बराबरी के खिलाफ हमेशा बिंदु आवाज उठाती रही हैं। जिसे दबाने की कोई भी कोशिश कामयाब नहीं होगी। बिंदु देवी को बिना शर्त रिहा नहीं किया गया तो संगठन सड़क पर उतरने को बाध्य होगा।

उधर मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए जांच टीम मौके पर भेजने का निर्णय लिया है। जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर संगठन आगे का निर्णय लेगा।
(पटना से पत्रकार जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट।)

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