Saturday, January 22, 2022

Add News

जौनपुर के 5 हजार करोड़ घोटाला मामले में हाईकोर्ट ने डीजीपी से पूछा- जांच क्यों न ईडी या आर्थिक अपराध शाखा को सौंपी जाए

ज़रूर पढ़े

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर की विभिन्न योजनाओं में 5 हजार करोड़ के फ्रॉड की जांच पर डीजीपी से सवाल पूछा है। कोर्ट ने कहा कि क्यों न जांच ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) या आर्थिक अपराध शाखा को सौंपी जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार के सालीसीटर जनरल ऑफ इंडिया से भी संबंधित विभागों से जानकारी मांगी है। यह आदेश जस्टिस वीके बिड़ला और जस्टिस एसपी सिंह की खंडपीठ ने कुमारी बाबा बेटी की याचिका पर दिया है।

खंडपीठ का मानना है कि स्थानीय पुलिस इतने बड़े घोटाले की विवेचना करने में सक्षम नहीं है। कोर्ट ने DGPको निर्देश दिया है कि निश्चित तारीख तय कर व्हिसल ब्लोवर याची को सुनकर उसके प्रत्यावेदन को निर्णीत करें। कोर्ट ने मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव गृह को भी इस मामले में विचार करने को कहा है। साथ ही अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका की सुनवाई 17 जनवरी को होगी।

याची का कहना है कि जौनपुर की विभिन्न योजनाओं में हुए पांच हजार करोड़ के फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराई है। उसे इस घोटाले में लिप्त लोग धमकी दे रहे हैं। विवेचना अधिकारी याची पर समझौते का दबाव डाल रहा है। इसलिए केस की विवेचना अन्यत्र स्थानांतरित की जाए। हालांकि कोर्ट ने स्थानांतरित करने की मांग अस्वीकार कर दी। साथ ही DGPको इस पर निर्णय लेने को कहा है।

सरकारी वकील का कहना था कि विवेचना हो रही है। याची बयान दर्ज कराने के लिए हाजिर नहीं हो रही है। कोर्ट ने कहा कि याची को धमकी मिल रही है। ऐसे में उसे डीजीपी से मिलने जाते समय सुरक्षा दी जाए। यदि डीजीपी केस स्थानांतरण नहीं करते, तो याची को विवेचना अधिकारी के समक्ष पेश होने के लिए सुरक्षा दी जाए।

खंडपीठ का मानना है कि स्थानीय पुलिस इतने बड़े घोटाले की विवेचना करने में सक्षम नहीं है। कोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया कि निश्चित समय व तिथि तय कर याची को सुनकर उसके प्रत्यावेदन को निर्णीत करें। कोर्ट ने मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव गृह को भी इस मामले में विचार करने को कहा है और अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश खंडपीठ ने कुमारी बाबा बेटी की याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि जौनपुर की विभिन्न योजनाओं में पांच हजार करोड़ के घोटाले की शिकायत दर्ज कराई है। उसे इस घोटाले में लिप्त लोगों की ओर से धमकी दी जा रही है और विवेचना अधिकारी याची पर समझौते का दबाव डाल रहा है इसलिए केस की विवेचना अन्यत्र स्थानांतरित की जाए। याची ने मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार के साथ-साथ पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश को भी 21अक्टूबर 2021 को अभ्यावेदन दिया है, लेकिन जब तक जांच को स्थानांतरित करने के लिए कुछ भी नहीं किया गया है।

खंडपीठ ने विवेचना स्थानांतरित करने की मांग अस्वीकार कर दी और डीजीपी को इस पर निर्णय लेने को कहा। हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से कहा है कि याची को सुनवाई का मौका देते हुए उसे पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाए। खंडपीठ ने याची को डीजीपी के समक्ष फिर से आवेदन करने का निर्देश दिया। साथ ही डीजीपी को भी आवेदन को स्वीकार कर सुनवाई का मौका दे कर सकारन आदेश पारित करने को कहा है।

याचिकाकर्ता के विद्वान अधिवक्ता ने दलील दी है कि याचिकाकर्ता एक व्हिसल ब्लोअर है और उसने 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी/घोटाले को उजागर किया है। याचिकाकर्ता को धोखाधड़ी में शामिल व्यक्तियों/हितों से लगातार धमकी मिल रही है। उन्होंने यह भी तर्क दिया है कि धोखाधड़ी में देश के बाहर सुरक्षित स्वर्ग (टैक्स हैवेन) में धन का हस्तांतरण शामिल है और बड़ी मछलियां धोखाधड़ी में शामिल हैं, जिनके पते / पूरे देश में हैं और वे रहते हैं।

सरकारी वकील का कहना था कि विवेचना हो रही है। याची बयान दर्ज कराने के लिए हाजिर नहीं हो रही है। कोर्ट ने कहा कि याची को धमकी मिल रही है। ऐसे में उसे डीजीपी से मिलने जाते समय सुरक्षा दी जाए। यदि डीजीपी केस स्थानांतरण नहीं करते तो याची को विवेचना अधिकारी के समक्ष पेश होने के लिए सुरक्षा दी जाए। कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को भी याची के आरोपों पर विचार करने का निर्देश दिया है।

खंडपीठ ने मामले को राष्ट्रीय हित से जुड़ा बताते हुए केंद्र सरकार को भी पार्टी बनाने का निर्देश दिया और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया से संबंधित विभाग के सचिव से जवाब दाखिल करने को कहा है।

खंडपीठ ने यह निर्देश भी दिया है कि भले ही याचिकाकर्ता द्वारा आवश्यक काम नहीं किया गया हो या वह उपस्थित नहीं होती है, प्राथमिकी में आरोपों को देखते हुए, प्रतिवादी नं 2, पुलिस महानिदेशक, लखनऊ, उत्तर प्रदेश मामले को देखेंगे और राष्ट्रहित में उचित आदेश पारित करेंगे।प्रतिवादी नं1, उत्तर प्रदेश राज्य प्रमुख सचिव (गृह) सरकार के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार को यह भी निर्देश दिया जाता है कि वह प्रथम सूचना रिपोर्ट के साथ-साथ वर्तमान याचिका में लगाए गए आरोपों के आलोक में ऐसे सभी पहलुओं पर गौर करे।अगली तारीख को ए.जी.ए. पुलिस महानिदेशक, लखनऊ, उत्तर प्रदेश की रिपोर्ट/निर्णय के अलावा, वह प्रतिवादी संख्या के निर्देशों को भी रिकॉर्ड में रखेंगे।

मामला जौनपुर जिले के जाफराबाद पुलिस स्टेशन के अंतर्गत है। मामले में याची बाबा-बेटी ने पांच हजार करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप में कंपनी के प्रमोटर्स और अलग-अलग बैंक के अधिकारियों के साथ कुल 28 लोगों के खिलाफ जाफराबाद पुलिस स्टेशन में 26सितम्बर 2021 को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 467, 468, 471, 474, 476, 506, 507 और 511 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले में विवेचना कर रही है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

पुरानी पेंशन बहाली योजना के वादे को ठोस रूप दें अखिलेश

कर्मचारियों को पुरानी पेंशन के रूप में सेवानिवृत्ति के समय प्राप्त वेतन का 50 प्रतिशत सरकार द्वारा मिलता था।...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -