Saturday, January 22, 2022

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4 को हल न निकला तो किसान आंदोलन होगा और तेज, भाजपा छोड़ो अभियान के साथ बंद कराए जाएंगे पेट्रोल पंप

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भीषण शीत लहर के कहर और तापमान के 1.1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचने के बावजूद दिल्ली से लगी सीमाओं पर किसान आंदोलन आज 38वें दिन भी जारी है। इस बीच ख़बर है कि किसानों की सात सदस्यीय कमेटी आज दिल्ली प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत करेगी। इसमें किसान यूनियनों द्वारा आंदोलन की अगली रणनीति का खुलासा किया जाएगा। किसान यूनियनों का कहना है कि 30 दिसंबर को हुई पिछली बैठक में किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दे का सिर्फ़ पांच फीसदी ही हल निकला है, जबकि सरकार और कॉरपोरेट मीडिया किसानों की 50 प्रतिशत समस्याओं के हल होने के दावे कर रहे हैं। इस संदर्भ में किसान यूनियन के नेताओं का कहना है कि 4 जनवरी को होने वाली बैठक में यदि सरकार किसानों के पक्ष में कोई फैसला नहीं लेती है तो हम कड़ा कदम उठाएंगे।

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सुखविंदर सिंह सभरा ने मीडिया में कहा, “तीन कृषि कानून रद्द होने चाहिए। अगर 4 जनवरी को इसका कोई हल नहीं निकलता तो आने वाले दिनों में संघर्ष तेज होगा।”

दूसरी ओर हरियाणा के किसान नेताओं ने कहा है कि चार जनवरी को सरकार के साथ होने वाली बैठक यदि बेनतीजा रहती है तो फिर हम हरियाणा के सारे शॉपिंग मॉल और पेट्रोल पंप बंद करने की तारीख घोषित करेंगे।

किसान यूनियनों ने कहा है कि अगर 4 जनवरी की बातचीत में परिणाम संतोषजनक न निकला तो 30 दिसंबर को जो मार्च रद्द हुआ है, फिर 6 जनवरी को मार्च होगा। वहीं राजस्थान के शाहजहांपुर बॉर्डर से किसान अगले हफ़्ते (6, 7 जनवरी को) आगे बढ़ेंगे। 6 जनवरी से 20 जनवरी के बीच पूरे देश में किसान जन जागृति अभियान चलाएंगे और 23 जनवरी को नेता सुभाषचंद्र बोस की जयंती को किसान विशेष चेतना दिवस का आयोजन होगा। किसान भाजपा नेताओं के खिलाफ देश भर में पार्टी छोड़ो अभियान चलाएंगे। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा के टोल आगे भी फ्री रहेंगे।

वहीं पिछली बैठक में केंद्रीय मंत्रियों के साथ सेल्फी लेने वाले सिख नौजवान का किसान यूनियनों द्वारा विरोध किया गया है। किसान नेताओं ने कहा कि ऐसे लोग संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं। सरकार को एक किसान सेल्फी वाला नहीं मिलता। बता दें कि पिछली मीटिंग के दौरान एक नौजवान ने सेल्फी ली थी, जिसे सरकार और कॉरपोरेट मीडिया ने वायरल कर दिया।

कल प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान नेताओं ने कहा है कि बीजेपी और जेजेपी के विधायकों, सांसदों का गांव-गांव विरोध होगा और तक तक होगा जब तक हरियाणा में इन दोनों की सरकार गिर नहीं जाती।

सिर्फ़ पूछ निकली है, हाथी अभी बाक़ी है
30 दिसंबर को हुई बैठक के बाद सरकार का बयान और कार्पोरेट मीडिया में चल रही ख़बरों के बीच किसान यूनियनों का कहना है कि सरकार किसानों को हल्के में ले रही है। युवा किसान संयम खो रहा है। सरकार इस धरने को शाहीन बाग बनाने की कोशिश कर रही है। पहली और दूसरी मांग हमारी कृषि कानून और MSP गारंटी को कानूनन बनाना है। तीसरी और चौथी मांग मानकर सरकार गुमराह कर रही है। सरकार बड़ी कामयाबी का दावा कर रही है, लेकिन अभी पूछ निकली है हाथी बाकी है। सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार ने MSP पर सैद्धांतिक कमिटमेंट देने से भी इनकार किया। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी और नए कृषि कानूनों को रद्द करने का कोई विकल्प नहीं है।

बता दें कि किसानों के 41 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि चार विषयों में से दो मुद्दों पर पारस्परिक सहमति के बाद 50 प्रतिशत समाधान हो गया है और शेष दो मुद्दों पर चार जनवरी को चर्चा होगी। इसके बाद से ही मीडिया में ख़बरें चल रही हैं क किसानों की 50 प्रतिशत मांगे पूरी हो गई हैं।

बता दें कि सिंघु बॉर्डर पर कल दोपहर दो बजे किसानों की बैठक हुई थी। इस बैठक में सरकार से अगले दौर की बातचीत और आंदोलन को लेकर रणनीति पर चर्चा हुई। इसके बाद किसान संगठनों के नेताओं ने प्रेस कांफ्रेंस की।

वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने बिहार की राजधानी पटना में किसानों पर लाठीचार्ज को प्रदेश सरकार की असंवेदनशीलता बताई है। मोर्चा ने एक बयान में कहा कि पटना में प्रदर्शन कर रहे किसानों पर हुए लाठीचार्ज की वह कड़े शब्दों में निंदा करता है। बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा लागू नए कृषि कानूनों के विरोध में मंगलवार को पटना में प्रदर्शन कर रहे किसानों को रोकने के दौरान हुई झड़प में पुलिस ने लाठियां भांजी थीं।

अब तक 53 किसानों की मौत
पंजाब सरकार के मुताबिक किसान आंदोलन के दौरान अब तक 53 किसानों की मौत हुई है। इसमें 20 की जान पंजाब में और 33 किसानों की मौत दिल्ली बॉर्डर पर हुई है। इन 53 मौंतों के लिए ठंड, हर्ट अटैक, दुर्घटना और खुदकुशी और सबसे बढ़कर केंद्र सरकार जिम्मेदार है।

नए साल के पहले दिन दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर ठंड से 57 साल के किसान गलतान सिंह की मौत हो गई। गलतान सिंह यूपी के बागपत जिले के नांगल भावनपुर गांव के  रहने वाले थे। भारतीय किसान यूनियन के शमशेर राणा ने ये जानकारी मीडिया को दी है।

भाजपा के पूर्व मंत्री के घर के सामने फेंका एक ट्रॉली गोबर
होशियारपुर में शुक्रवार को कुछ लोगों ने पंजाब के पूर्व मंत्री तीक्ष्ण सूद के घर के बाहर ट्रॉली में भरा गोबर पलट दिया। कहा जा रहा है कि गुस्साए किसानों ने ये काम किया है। इसके बाद तीक्ष्ण सूद के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने राय बहादुर जोधमल रोड पर धरना दिया और गोबर फेंकने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस बीच पंजाब भाजपा प्रमुख अश्विनी कुमार शर्मा ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि किसानों के रूप में आए कुछ शरारती लोगों ने सूद के आवास पर हमला  कर दिया है और ऐसा सिर्फ़ राज्य की शांति और भाईचारे को बाधित करने के लिए किया गया है।

वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने घटना का संज्ञान लेते हुए कहा कि निजता पर हमले से किसानों के आंदोलन का नाम और मकसद खराब होगा। हालांकि इसके लिए उन्होंने किसानों के प्रति केंद्र के कथित उदासीन रवैये को जिम्मेदार ठहराया है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों से संयम की अपील करते हुए कहा है, “किसान अधिकारों के लिए अपनी लड़ाई में कानून को हाथ में न लें। ऐसी हरकतों से विविध जातियों, धर्मों और समुदायों के बीच बना शांति और सद्भावना का माहौल खराब होगा। ऐसी हरकतों और राजनीतिक नेताओं या कार्यकर्ताओं के परिवार को परेशान करने से पंजाब में कानून एवं व्यवस्था में समस्या की स्थिति बन सकती है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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