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जयंत ने हाथरस पुलिस की लाठी का जवाब दिया रैली से, कहा- हर कीमत पर लड़ेंगे बहन-बेटियों और किसानों की लड़ाई

राष्ट्रीय लोक दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह के पौत्र जयंत चौधरी ने चार दिन पहले हाथरस में अपने ऊपर हुए लाठीचार्ज का जवाब आज गुरुवार को मुज़फ़्फ़रनगर में विशाल रैली के जरिये दिया। `लोकतंत्र बचाओ रैली` के नाम से किए गए इस जमावड़े में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र यादव और हरियाणा से अभय चौटाला, दीपेंद्र हुड्डा और जयप्रकाश जेपी जैसे नेताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जयंत पर चली लाठी को रैली में चौधरी चरण सिंह की विरासत पर चली लाठी बताया गया।

जयंत ने 12 अक्तूबर को मथुरा में पंचायत का एलान करते हुए कहा कि बहन-बेटियों पर अत्याचार के मसले पर वे चुप नहीं बैठेंगे और न ही किसानों की समस्याओं पर आंदोलन रोका जाएगा। जयंत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर रेपिस्टों के संरक्षण का आरोप लगाया। उन्होंने कैराना लोकसभा चुनाव में योगी को लेकर अपने एक तीखे भाषण का ज़िक्र करते हुए हाथरस लाठीचार्ज को बदले की कार्रवाई करार दिया। धर्मेंद्र यादव ने एलान किया कि लोकसभा चुनाव की तरह विधनासभा चुनाव भी सपा और रालोद मिलकर लड़ेंगी।

पूर्व सांसद जयंत चौधरी रेप और हत्या की वारदात के विरोध में 4 अक्तूबर को अपने समर्थकों के साथ हाथरस पहुंचे थे। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन पर अचानक लाठीचार्ज करा दिया गया था। उनके समर्थकों ने उन्हें अपने घेरे में लेकर लाठियां खाते हुए किसी तरह उनकी जान बचाई थी। राजनीतिक रूप से गर्दिश में चल रहे चौ. चरण सिंह के उत्तराधिकारी चौ. अजित सिंह और जयंत चौधरी के समर्थकों के लिए यह घटना मनोबल ध्वस्त कर देने वाली साबित हो सकती थी। मुज़फ़्फ़रनगर के गवर्नमेंट इंटर कॉलेज के मैदान में गुरुवार को बड़ी रैली आयोजित कर जयंत राजनीतिक रूप से जवाब देने और अपने समर्थकों में हौसला भरने में कामयाब रहे। मुज़फ़्फ़रनगर जिला चौ. चरण सिंह की राजनीति में हमेशा महत्वपूर्ण रहा है।

अविभाजित मुज़फ्फ़रनगर जिले का ही हिस्सा रहे शामली-कैराना इलाके भी बागपत से लगते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा ने इसी जाट बेल्ट में सेंध लगाकर अजित और उनके बेटे के लिए मुश्किलें खड़ी की हैं। इस तरह की कई वजहों के चलते रैली के लिए मुज़फ्फरनगर का चुनाव किया गया था। रैली में जुटी भीड़ और ख़ासकर जाटों की संख्या से उत्साहित जयंत ने `घर लौट आने` की भावुक अपील भी की। उन्होंने कहा कि आज वे लोग भी आए हैं, जिन्होंने हमें वोट नहीं दिया था। जो दूसरे दलों में हैं, वे भी आहत हैं। उन्होंने कहा कि फ़िलहाल वोट का मसला नहीं है, लेकिन अपने भाई की, अपने खून की पुकार सुन लो, घर लौट आओ। उन्होंने कहा कि मैंने दो लठ खाए हैं, लेकिन आपके हित के लिए सौ लठ खाने से भी नहीं हटूंगा।

जयंत चौधरी ने कहा कि चौ. चरण सिंह और अजित सिंह ने मुज़फ़्फ़रनगर से बहुत से आंदोलनों की शुरुआत की, लेकिन कभी आंदोलन को हिंसक नहीं होने दिया। नेता का दिल बड़ा होना चाहिए, लेकिन सत्ता की बागडोर ऐसे लोगों के हाथ में है जो चाहते हैं कि किसान उठने न पाएं। उन्होंने कहा कि कैराना लोकसभा उपचुनाव में उन्होंने तोड़-मरोड़ की बात कही थी, क्योंकि पूरब में कोई घटना हुई थी और योगी पीड़ित लोगों को ही उंगली दिखाकर धमका रहे थे। इससे आवेश में आकर उन्होंने कहा था कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश है, यहां के लोग ऐसा सहन नहीं करेंगे। उंगली तोड़ देने की उनकी बात की वजह से उंगली नहीं जाने क्या-क्या तोड़ देने की सुनियोजित साजिश रची गई थी।

जयंत ने कहा कि वे हाथरस गए थे, क्योंकि चौ. चरण सिंह ने गरीब के साथ अन्याय न सहना और उसके साथ खड़ा होना सिखाया था। हाथरस में विभिन्न विपक्षी नेताओं के साथ हुए दुर्व्यवहार का ज़िक्र करते हुए उन्होंने अपने साथ हुए बर्ताव की बात दोहराई। अपनी बुआ डॉ. ज्ञानवती की भी याद दिलाते हुए जयंत ने बहनों-बेटियों का हवाला दिया और कहा कि उनके भीतर खून नहीं, अगर इस प्रदेश-देश की किसी बहन-बेटी के साथ दुराचार हो और वे वहां न जाएं। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को लेकर सरकार और सरकार के गुर्गे तरह-तरह की बातें कर रहे हैं, साजिश बता रहे हैं। जयंत ने कहा कि उस बेहद गरीब परिवार के पास खोने-पाने को कुछ नहीं था, जो था, जिसे वे प्यार करते थे, वह छीन लिया गया।

जयंत चौधरी ने हाथरस की पीड़िता का शव रात में परिजनों की अनुपस्थिति में जला दिए जाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आलोचना की और हिंदू मान्यता का हवाला देकर उनके धार्मिक होने को लेकर भी सवाल उठाए। जयंत ने आरोप लगाया कि सच्चाई पर परदा डालने और मामले को रफा-दफ़ा करने के लिए शव को रात में जलाया गया। चौ. चरण सिंह के नेतृत्व में किसी ज़माने में माया त्यागी कांड को लेकर चले चर्चित आंदोलन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हाथरस की घटना वैसी ही है। हम लोगों को वहां जाने से इसीलिए रोक गया, ताकि आंदोलन न हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि योगी को रेप से दिक्कत नहीं, रेप की चर्चा से दिक्कत है। उन्होंने एक विधायक से जुड़े केस का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रेपिस्टों को मंचों पर सुशोभित करते हैं। सरकारी आंकड़ों का हवाला देकर जयंत ने उत्तर प्रदेश को महिलाओं के विरुद्ध आपराधों में अव्वल करार दिया।

जयंत चौधरी ने कहा कि आंदोलन का कारवां रुकने नहीं दिया जाएगा। 12 अक्तूबर को मथुरा में पंचायत की जाएगी। सामाजिक और किसानों के मसलों पर आंदोलन को राजनीतिक आंदोलन में बदलना होगा। आपके ऊपर जो लाठी पड़ी है, उसका जवाब ईवीएम पर चोट से देना होगा और ऐसे लोगों को सत्ता से बाहर करना होगा। जयंत चौधरी ने हरियाणा से आए नेताओं का स्वागत करते हुए हरियाणा और पंजाब में चल रहे किसान आंदोलनों से सीख लेने का आह्वान किया। उन्होंने नए कृषि कानूनों को अडानी और अंबानी को फायदा पहुंचाने वाले कानून करार दिया और कहा कि किसानों के लिए एमएसपी पाना मुमकिन नहीं रहेगा।

उन्होंने किसानों को मुंज्जी (धान) की फसल पिटने का हवाला देकर इस गन्ना बेल्ट में गन्ने के बकाया भुगतान को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि एक साल में गन्ना किसानों का बकाया चार हजार 942 करोड़ रुपये से बढ़कर साढ़े आठ हजार करोड़ रुपये हो गया है, जबकि वादा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कर किसानों की आय दोगुनी करने का किया गया था। उन्होंने कहा कि रेलवे, एयर इंडिया, एलआईसी वगैराह बेचे जा चुके हैं, अब किसानों की बारी है।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि हाथरस में हमला जयंत चौधरी पर नहीं बल्कि चौ. चरण सिंह की विरासत और किसानों-नौजवानों पर हुआ है। अखिलेश यादव की तरफ़ से उन्होंने एलान किया कि दोनों पार्टियां अगले चुनाव भी साथ लड़ेंगी। इस बार बदलाव पूरब के बजाय पश्चिम से होगा। पूर्व उप प्रधानमंत्री चौ. देवीलाल के पौत्र और पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के बेट अभय चौटाला ने कहा कि चौधरी देवीलाल और चौधरी चरण सिंह ने देश में किसानों को एकजुट किया था।

उन्होंने विपक्षी नेताओं के पार्टी लाइन से ऊपर उठकर एकजुट होने पर ज़ोर दिया। उन्होंने सरकार पर हाथरस के आरोपियों को बचाने की कोशिश का आरोप लगाया। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे और पूर्व सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि एकजुट होकर संघर्ष न किया गया तो किसान सड़कों पर पिटेगा और फसल मंडी में। रैली में आसपास के जिलों से शामली के पूर्व विधायक पंकज मलिक, सहारनपुर से वरिष्ठ कांग्रेसी नेता इमरान मसूद, सपा के विधायक नाहीद हसन आदि भी उपस्थित थे।

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This post was last modified on October 8, 2020 8:27 pm

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