Wed. Oct 28th, 2020

जिग्नेश और हार्दिक ने अहमदाबाद के डीएम को लिखा खत, कहा- प्रशासन रिक्शा चालकों को तत्काल मुहैया कराए 21 हजार रुपये

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जिग्नेश और हार्दिक।

अहमदाबाद। 19 जून को गुजरात की चार राज्य सभा सीटों के लिए चुनाव है। कांग्रेस अपने विधायकों को टूटने से बचाने में लगी है। वहीं भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लग रहा है कि वह कांग्रेस के विधायकों को पैसे के बल पर तोड़ रही है। गुजरात सरकार ने राज्य की जनता को कोरोना मामले में आत्म निर्भर कर दिया है। जनता खुद कोरोना से बचे और कोरोना से लड़े। एक तरफ राजनैतिक दल राज्य सभा चुनाव की गुणा गणित में लगे हुए हैं तो दूसरी तरफ राज्य के दो आंदोलनकारी नेताओं ने अहमदाबाद के ज़िला मजिस्ट्रेट केके निराला को पत्र लिखकर रिक्शा चालकों की समस्याओं के निदान की मांग की है। विधायक जिग्नेश मेवानी और कांग्रेस के युवा नेता हार्दिक पटेल ने संयुक्त पत्र में सरकार को बताया कि “70 दिनों के लॉक डाउन के कारण असंगठित मजदूरों और आठ लाख से अधिक रिक्शा चालकों की परिस्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। राज्य के रिक्शा चालक रोज़ कमाते हैं और रोज़ खाते हैं। अधिकतर रिक्शा चालकों के रिक्शे लोन पर हैं। 

लॉक डाउन के चलते इनमें से ज्यादातर लोन भरने में भी असमर्थ रहे। सहायता के नाम पर राज्य सरकार ने इन लोगों को ठेंगा दिखा दिया। जबकि केरल, दिल्ली, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सरकारें रिक्शा चालकों को हर महीने 5000/- दे रही हैं। रिक्शा यूनियनों द्वारा 24 अप्रैल को भी एक आवेदन दिया गया था जिसमें रिक्शा चालकों के लिए राहत पैकेज की मांग की गई थी।”

आत्म निर्भर योजना में रिक्शा चालक भी आते हैं। केंद्र सरकार द्वारा बगैर किसी गारंटी के 1 लाख का लोन देने को कहा गया था। लेकिन इसकी जमीनी सच्चाई यह है कि राज्य द्वारा दो जमानतदार, एफिडेविट और बहुत से दस्तावेज़ मांगे जा रहे हैं। इन दोनों नेताओं ने ज़िला मजिस्ट्रेट के माध्यम से सरकार से मांग की है: 

• सरकार तुरंत 21000/- रुपये की नकद सहाय दे।

• इसी महीने के अंत तक सभी रिक्शा चालकों को 50000/- रुपए का बिना गारंटी लोन दे।

• बैंक और पढ़ी वाले पिछले तीन महीने की किश्त अभी न वसूलें।

  • रिक्शा चालकों से पुलिस किसी तरह का हफ्ता न वसूले।
  • आत्म निर्भरता के नाम पर मिलने वाले में शर्तों को और सरल बनाया जाए। 

जिग्नेश मेवानी सरकार की आत्म निर्भर योजना पर कहते हैं कि 50 लाख से अधिक मजदूर रिक्शा चालक, रेहड़ी, फुटपाथ के धंधेदार हैं और सरकार ने केवल 10 लाख को अपनी गिनती में ले रही है। राज्य को 3000 करोड़ दिया गया है जिससे केवल 3 लाख लोगों को आत्म निर्भरता का लाभ मिलेगा। 

अहमदाबाद रिक्शा चालक एकता यूनियन के अध्यक्ष विजय कुमार ने जन चौक से बातचीत में बताया कि ” राज्य की सभी रिक्शा यूनियन मिलकर पूरे राज्य के आटो रिक्शा चालकों की समस्याओं को उठा रही हैं। सरकार ने हमें संकट के समय किसी प्रकार का सहयोग नहीं दिया। लोन के फार्म बैंक बाँट रहे हैं। कुछ लोगों ने भरा भी है। लेकिन बैंक वह कागज़ मांग रहे हैं। जो हम दे ही नहीं सकते। बैंक बैच (ड्राइवर बिल्ला) मांग रहे हैं। अहमदाबाद सहित राज्य के सभी आरटीओ बिल्ला देना बंद कर दिये हैं। दो ज़मानत भी चाहिए वह भी आसान नहीं।” 

विजय आगे बताते हैं, ” अधिकतर लोगों ने ऑटो रिक्शा लोन पर खरीद रखा है। बैंक और पेढ़ी वाले EMI के लिए दबाव भी बना रहे हैं। धंधे पर निकलो तो पुलिस के कई पॉइंट पर अब भी हफ्ता देना पड़ता है।”

हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी पर पूरा विश्वास दिखाते हुए विजय ने भी रिक्शा चालकों की अनदेखी पर आंदोलन की बात कही। उन्होंने कहा कि “अहमदाबाद में सबसे अधिक ऑटो रिक्शा चालक हैं। राज्य के अन्य शहरों की यूनियन भी हमारे संपर्क में है। आने वाले समय में हम सब मिलकर सरकार की नीतियों के विरोध में आंदोलन करेंगे जिसमें हार्दिक और जिग्नेश भी शामिल होंगे। “

हार्दिक और जिग्नेश ने पत्र में भी लिख है कि “भूखे पेट भगवान भी परेशान रहते हैं। इसलिए सरकार सभी माँगों को मान ले वरना आंदोलन के सिवाय हमारे पास कोई रास्ता नहीं बचता है।”

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

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