Friday, March 1, 2024

दिल्ली में आयोजित कन्वेंशन में बजट सत्र के दौरान मजदूर संगठनों का दो दिवसीय हड़ताल का ऐलान

केंद्रीय श्रमिक संगठन तथा स्वतंत्र फेडरेशन/एसोसिएशन्स की ओर से कल जंतर-मंतर पर मजदूरों का राष्ट्रीय कन्वेंशन आयोजित किया गया। कन्वेंशन के अध्यक्ष मंडल में संजय सिंह (इंटक), सुकुमार दामले (एटक), राजा श्रीधर (हिंद मजदूर सभा), हेमलता (सीटू), आर। पराशर (एआईयूटीयूसी), शिवशंकर (टीयूसीसी), फरीदा जलीस (सेवा), शैलेंद्र के शर्मा (एआईसीसीटीयू), आरके मौर्य (एलपीएफ), नजीर हुसेन(यूटीयूसी) शामिल थे।

कन्वेंशन की शुरुआत उन साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई जिनका पिछले कन्वेंशन के बाद देहांत हो गया था। इसमें करीब-करीब 800 किसान हैं जो उनके जारी आंदोलन के दौरान शहीद हो गये। कई लोग जो करोना काल में या बाढ़ या पहाड़ के स्खलन की घटनाओं में गुजर गये और तमाम लिंचिंग जैसी घटनाओं के बेवजह शिकार हुए।

कन्वेंशन में मुख्य रूप से कहा गया कि भारत सरकार द्वारा मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी, जन-विरोधी और कार्पोरेट की पक्षधर पॉलिसी अपनाई जा रही है और इनकी बदौलत जनता का अधिकांश हिस्सा गरीबी और भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। इससे न केवल देश की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है बल्कि अभी तक की जो उपलब्धियां थीं वह भी खत्म होती जा रही हैं। कन्वेंशन में सरकार के इस रवैये की कड़ी निंदा की गई। इस बात को विशेष तौर पर कहा गया कि संघर्ष का दायरा जनता की रोजी रोटी तक सीमित नहीं रह गया, अब तो पूरी अर्थव्यवस्था को ध्वस्त होने से रोकना, देश की लोकशाही व्यवस्था का संरक्षण करना तथा देशी-विदेशी निजी कॉर्पोरेट कंपनियों के हवाले देश जाने से रोकने के लिए भी करना होगा।

अशोक सिंह (इंटक), अमरजीत कौर (एटक), हरभजन सिंह सिंधु (हिंद मजदूर सभा), तपन सेन (सीटू), सत्यवान (एआययूटीयूसी), जी. देवराजन (टीयूसीसी), सोनिया जॉर्ज (सेवा), राजीव डिमरी (एआईसीसीटीयू), जेपी सिंह (एलपीएफ), शत्रुजीत सिंह (यूटीयूसी) ने कहा कि केंद्र सरकार ने जो लापरवाही कोरोना महामारी में बरती, जनता जब उस संकट से जूझ रही थी तब मौकापरस्ती से लेबर कोड और कृषि कानून, बिना चर्चा के, लोकसभा में पास कर दिए और अब निजीकरण की ऐसी होड़ लगाई है – जिसमें जनता के पैसों से पिछले सत्तर साल मे खड़े किए, सरकार को मुनाफा देने वाले सार्वजनिक उद्योग बेचे जा रहे हैं, या नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाईन के नाम पर, निजी उद्योगों को भाड़े पर दिए जा रहे हैं। इसका बहुत बुरा असर आम जनता पर होगा। एक तो महंगाई बेतहाशा बढ़ेगी और नौकरियों के अवसर पिछड़े जातिवर्ग समेत तमाम नौजवानों के लिए कम हो जायेंगे।

अब कई राज्यों में चुनाव आ रहे हैं, तो भाजपा अपनी “उपलब्धियों” की डींग मारने में लगी है। जब कि जमीनी स्तर की वास्तविकता छुपाना उनके लिये नामुमकिन है – जैसे भुखमरी के मामले में ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 106 देशों की सूची मे 101 नंबर पर है। आज देश मे जाति-धर्म के नाम पर गुंडागर्दी की जा रही है और सरकार जानबूझ कर उसे अनदेखा करती है। यह हमारे देश के लिए एक नया संकट है, जो हमने इससे पहले अनुभव नहीं किया था।

कन्वेंशन में उन मांगों को दोहराया गया जो इससे पहले भी की गई थीं, लेकिन जनता के लिए अहमियत रखती हैं। जैसे – 4 लेबर कोड समाप्त करना, कृषि कानून और बिजली संशोधन विधेयक को निरस्त करना, किसी भी रूप मे निजीकरण के खिलाफ और एनएमपी को समाप्त करना, आयकर भुगतान के दायरे से बाहर वाले परिवारों को प्रतिमाह 7500 रुपये की आय और खाद्य सहायता, मनरेगा के लिए आवंटन में वृद्धि और शहरी क्षेत्रों मे रोजगार गारंटी योजना का विस्तार, सभी अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा, आंगनवाड़ी, आशा, मध्यान्न भोजन योजना कार्यकर्ताओं के लिए वैधानिक न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा, महामारी के दौरान लोगों की सेवा करने वाले फ्रन्टलाइन कार्यकर्ताओं के लिए सुरक्षा बीमा सुविधाएं, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और सुधारने के लिए संपत्ति कर आदि के माध्यम से अमीरों पर टैक्स लगा कर कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक उपयोगिताओं में सार्वजनिक निवेश में वृद्धि, पेट्रोलियम उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कमी और मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए ठोस उपचारात्मक उपाय आदि।

कन्वेंशन में देश के मजदूरों से आह्वान किया कि इस कन्वेंशन का संदेश नीचे तक, हर गांव कस्बे में जनता तक मेहनत और लगन से पहुंचाएं। “जनता को बचाओ, देश को बचाओ” के नारे को
बुलंद करने के लिए वर्ष 2022 मे लोकसभा का जो बजट सैशन चलेगा तब दो दिवसीय मुकम्मल हड़ताल की तैयारी करें।
इंटक, एटक, हिंद मजदूर सभा, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ, यूटीयूसी

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