Wednesday, October 27, 2021

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सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ लेफ्ट का जनता से एक से सात जनवरी तक लगातार सड़कों पर बने रहने की अपील

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वामपंथी संगठनों ने सीएए, एनसीआर और एनपीआर के खिलाफ एक सप्ताह तक लगातार विरोध-प्रदर्शन करने का एलान किया है। उनका यह प्रदर्शन एक जनवरी से शुरू होकर सात जनवरी तक चलेगा। इसके बाद आठ जनवरी को देशव्यापी बंद का आह्वान किया गया है। देशव्यापी इस आंदोलन में आर्थिक मंदी से लोगों को हो रही समस्याओं को भी बंद के कारणों में शामिल किया गया है।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर सियासी हमला किया है। उन्होंने पीएम के देश में कहीं भी डिटेंश सेंटर नहीं होने के बयान को लेकर ट्विट किया है कि आरएसएस के प्रधानमंत्री भारत माता से झूठ बोलते हैं। दरअसल मोदी ने दिल्ली के राम लीला मैदान से भाषण करते हुए दावा किया था कि डिटेंशन सेंटर देश में कहीं भी नहीं है और यह अफवाह है। राहुल ने अपने ट्विट में बीबीसी का एक वीडियो भी शेयर किया है, जो बताता है कि असम में डिटेंशन सेंटर बनाया जा रहा है।  

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा है कि जब तक सीएए वापस नहीं लिया जाता है, तब तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेंगे। ममता ने मध्य कोलकाता में राजा बाजार से मलिक बाजार तक विरोध मार्च का नेतृत्व भी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएए के खिलाफ बोल रहे छात्रों को भाजपा डरा रही है। उन्होंने कहा, “किसी से डरें नहीं। मैं भाजपा को आगाह कर रही हूं कि वह आग से नहीं खेलें।”

उधर, कांग्रेस अभी भी भाजपा पर हमलावर बनी हुई है। बीजेपी के एक वीडियो जारी करने के बाद पूर्व गृह मंत्री ने कई ट्विट कर उसका जवाब दिया है। उन्होंने एक ट्विट में कहा है, “मैं खुश हूं कि 2010 में कांग्रेस के एनपीआर लांच करने के वीडियो को बीजेपी ने शेयर किया है। कृपया उस वीडियो को आप सब ध्यान से सुनें। हम देश के सामान्य नागरिकों की बात कर रहे हैं। देश में रहने वाले निवासियों पर हमारा जोर है और इसमें कहीं नागरिकता का जिक्र नहीं किया गया है। सभी सामान्य नागरिकों को इसमें शामिल किया गया है। जाति, धर्म, जन्म आदि पर बिना भेदभाव के। एनपीआर सिर्फ 2011 जनगणना की तैयारी भर थी। उसमें एनसीआर का कोई जिक्र नहीं था।”

अपने एक बयान को लेकर सेना प्रमुख विपिन रावत विवादों में घिर गए हैं। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि नेता वह नहीं हैं जो गलत दिशा में लोगों का नेतृत्व करते हैं। जैसा कि हम लोग गवाह रहे हैं कि बड़ी संख्या में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्रों ने शहरों और कस्बों में आगजनी और हिंसा करने के लिए जन और भीड़ का नेतृत्व कर रहे हैं। यह नेतृत्व नहीं है। इसके जवाब में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने ट्विट किया है, “मैं जनरल साहब से सहमत हूं, लेकिन लीडर्स वे भी नहीं होते हैं जो अपने समर्थकों को सांप्रदायिक हिंसा के लिए नरसंहार में शामिल करते हैं। क्या आप मुझसे सहमत हैं जनरल साहब?” असदुद्दीन ओवैसी ने भी रावत के बयान पर आपत्ति जताई है।

प्रसिद्ध इतिहासकार इरफान हबीब ने देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई पर कहा कि औपनिवेशिक काल मे भी हमने विरोध का इस तरह दमन नहीं देखा। विरोध को इस तरह कुचलने के प्रयासों को लेकर लोग काफी चिंतित हैं, क्योंकि विरोध करने का अधिकार लोकतांत्रिक समाज का हिस्सा है।

सीएए और एनआरसी के विरोध में मुंबई के दादर में वंचित बहुजन आघाड़ी ने विरोध-प्रदर्शन किया। अघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि सीएए और एनआरसी देश की लोकतांत्रिक परंपरा के खिलाफ हैं और उनका विरोध होना चाहिए।

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