Thursday, October 21, 2021

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प्रयागराज: पोस्टमार्टम में विलम्ब करके संदिग्ध मौत के सच को क्यों छिपाना चाहती है पुलिस

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एक बार हत्या और आत्महत्या के बीच एफआईआर दर्ज़ हो जाने ,पुलिस द्वारा संज्ञान ले लिए जाने के बाद सीआरपीसी के किस प्रावधान के तहत बाघंबरी गद्दी मठ के महंत नरेंद्र गिरि के शव को सील करके पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने के बजाय मठ परिसर में दर्शनार्थ रखा गया है और मौत के तीसरे दिन पोस्टमार्टम की बात पुलिस कह रही है?प्रयागराज में चर्चा है और कानोंकान यह अफवाह फैली है कि महंत नरेंद्र गिरि को पहले मठ में जहर दिया गया और फिर आत्महत्या दिखने के लिए फांसी पर लटकना बताया गया, जिसे किसी बाहरी व्यक्ति (इंडिपेंडेंट विटनेस) ने नहीं देखा बल्कि ऐसा आश्रम में रहनेवालों का दावा है।सवाल है कि क्या पोस्टमार्टम में विलम्ब करके जहर का प्रभाव नगण्य करने की कोशिश तो नहीं हो रही है?

प्रयागराज में बाघंबरी गद्दी मठ के गेस्ट हाउस में मंगलवार को महंत नरेंद्र गिरि का शव मिला था। उनके शिष्यों के मुताबिक, महंत का शव फंदे पर लटका मिला था। एक दिन बाद उनका लिखा 11 पेज का सुसाइड नोट सामने आया है। सुसाइड नोट देखकर लगता है कि इसे लिखने में दो अलग-अलग पेन का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, 11 में से 10 पन्नों में तो उन्होंने आखिर में ‘महंत नरेन्द्र गिरि’ लिखकर दस्तखत किए हैं, लेकिन एक पन्ने के आखिर में उन्होंने ‘म नरेन्द्र गिरि’ लिखा है। पुलिस इस सुसाइड नोट की लिखावट की जांच कर रही है।

अपनी आत्महत्या के एक दिन पहले उन्होंने अपने लिए रस्सी का मंगाना। इसके साथ ही पुलिस के पहुंचने के पहले ही उनके शव को रस्सी काटकर उतार लेना। ये घटनाक्रम इस ओर भी इशारा करता है कि कहीं कोई अंदर का आदमी तो इसमें शामिल नहीं था। सवाल है कि नरेंद्र गिरि लिखना नहीं जानते थे तो सुसाइड नोट कैसे लिखा?मीडिया रिपोर्ट के हवाले से ऐसी खबरें आ रही हैं महंत नरेंद्र गिरि लिखना नहीं जानते थे तो वो इतना लंबा सुसाइड नोट कैसे लिख सकते हैं।

महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद से सबसे ज्यादा चर्चा में अगर कोई है तो वो हैं आनंद गिरि। अगर आनंद गिरि ने इस घटनाक्रम को अंजाम दिया है तो वो उन्हें हरिद्वार की जगह प्रयागराज में होना चाहिए।

नरेंद्र गिरि की पहुंच सरकारों तक थी तो उन पर कौन दबाव बना सकता है?महंत नरेंद्र गिरि एक ऐेसी शख्सियत थे जिनकी सरकारों तक पहुंच थी। अगर उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी थी तो वो इसके लिए सीधे सूबे के मुख्यमंत्री से भी बात कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बाद से ही यह सवाल उठ रहा है कि कौन है जा उनपर दबाव बना सकता था।

उन्हें कोई परेशानी थी तो उन्होंने प्रशासन की मदद क्यों नहीं ली?उनके मौत के पीछे के कारणों में एक वीडियो की बात भी सामने आ रही है। अगर वीडियो के कारण वो इतना परेशान थे तो इसकी शिकायत प्रशासन से कर सकते थे। सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर महंत नरेंद्र गिरि जैसे बड़े और प्रभावशाली व्यक्ति का अपमान कौन कर सकता है। सत्ता के गलियारें की बड़ी से बड़ी हस्तियां उनके दर पर आती थीं तो आखिर उन्हें अपमानित कौन करेगा। आखिर किस अपमान से वो आहत थे।

उनके नोट को सच माने तो उनकी कोई सेक्स सीडी थी।अब ये जाँच का विषय है कि सेक्स सीडी यदि कोई है तो असली है या कापी पेस्ट और फोटो शॉप है?  

सवाल यह है कि जब उनके शिष्यों ने बिना पुलिस के आये उनके कमरे का दरवाजा क्यों तोड़ा ?उनके शरीर को रस्सी के फंदे से क्यों उतारा?क्या यह सबूत मिटने की कोशिश नहीं है?

सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी हत्या के लिए सीधे तौर पर अपने शिष्य आनंद गिरि और पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनके पुत्र संदीप तिवारी को जिम्मेदार ठहराया है। नरेंद्र गिरि ने लिखा है कि आनंद गिरि की वजह से आत्महत्या करने जा रहा हूं। वह किसी महिला या लड़की के साथ गलत काम करते हुए मेरी वीडियो वायरल करने वाला है। बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनाया है।

मैं महंत नरेंद्र गिरि मठ बाघंबरी गद्दी बड़े हनुमान मंदिर (लेटे हनुमानजी) वर्तमान में अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अपने होशो हवास में बगैर किसी दबाव में यह पत्र लिख रहा हूं। जब से आनंद गिरि ने मेरे ऊपर असत्य, मिथ्या, मनगढ़ंत आरोप लगाए हैं. तब से मैं मानसिक दबाव में जी रहा हूं। जब भी मैं एकांत में रहता हूं, मर जाने की इच्छा होती है। आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और उनके लड़के संदीप तिवारी ने मिलकर मेरे साथ विश्वासघात किया है।

 सोशल मीडिया, फेसबुक एवं समाचार पत्रों में आनंद गिरि ने मेरे चरित्र पर मनगढ़ंत आरोप लगाए। मैं मरने जा रहा हूं। सत्य बोलूंगा। मेरा घर से कोई संबंध नहीं है। मैंने एक भी पैसा घर पर नहीं दिया। मैंने एक-एक पैसा मंदिर व मठ में लगाया। 2004 में मैं महंत बना। 2004 से अभी जो मठ एवं मंदिर का विकास किया, सभी भक्त जानते हैं। आनंद गिरि द्वारा जो आरोप लगाए गए उससे मेरी और मठ मंदिर की बदनामी हुई।

मैं बहुत आहत हूं। मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं। मेरे मरने की संपूर्ण जिम्मेदारी आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी जो मंदिर में पुजारी हैं और आद्या प्रसाद तिवारी के बेटा संदीप तिवारी की होगी। मैं समाज में हमेशा शान से जिया। आनंद गिरि ने मुझे गलत तरीके से बदनाम किया।

मुझे जान से मारने का प्रयास किया गया। इससे मैं बहुत दुखी होकर आत्महत्या करने जा रहा हूं। मेरी मौत के जिम्मेदार आनंद गिरिआद्या प्रसाद तिवारीसंदीप तिवारी पुत्र आद्या प्रसाद तिवारी की होगी। प्रयागराज के सभी पुलिस अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारियों से अनुरोध करता हूं मेरी आत्महत्या के जिम्मेदार उपरोक्त लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाए जिससे मेरी आत्मा को शांति मिले।

प्रिय बलवीर गिरि मठ, मंदिर की व्यवस्था का प्रयास करना, जिस तरह से मैंने किया। इसी तरह से करना। नितेश गिरि एवं मणि की सभी महात्मा बलवीर गिरि का सहयोग करना। परमपूज्य महंत हरिगोविंद गिरि एवं सभी से निवेदन है कि मढ़ी का महंत बलवीर गिरि को बनाना। महंत रविंद्र पुरी जी (सजावट मढ़ी) आपने हमेशा साथ दिया। मेरे मरने के बाद बलवीर गिरि का ध्यान दीजिएगा। सभी को ओम नमो नारायण।

मैं महंत नरेंद्र गिरि वैसे तो 13 सितंबर को ही आत्महत्या करने जा रहा था, लेकिन हिम्मत नहीं कर पाया। आज हरिद्वार से सूचना मिली कि एक दो दिन में आनंद गिरि कंप्यूटर के माध्यम से मोबाइल से किसी लड़की या महिला के साथ मेरी फोटो लगा कर गलत कार्य करते हुए फोटो वायरल कर देगा। मैंने सोचा कहां-कहां सफाई दूंगा। एक बार तो बदनाम हो जाउंगा। मैं जिस पद पर हूं, वह पद गरिमामयी पद है। सच्चाई तो लोगों को बाद में पता चल जाएगी, लेकिन मैं तो बदनाम हो जाऊंगा। इसलिए मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं। इसकी जिम्मेदारी आनंद गिरी, आद्या प्रसाद तिवारी एवं उनके लड़के संदीप तिवारी की होगी।

मैं महंत नरेंद्र गिरिआज मेरा मन आनंद गिरि के कारण विचलित हो गया है। हरिद्वार से ऐसी सूचना मिली कि आनंद गिरि कंप्यूटर के माध्यम से एक लड़की के साथ मेरी फोटो जोड़कर गलत काम करते हुए बदनाम करेगा। आनंद गिरि का कहना है महाराज कहां तक सफाई देते रहेंगे। मैं जिस सम्मान के साथ जी रहा हूं अगर मेरी बदनामी हो गई तो मैं समाज में कैसे रहूंगा। इससे अच्छा मर जाना है।

आज मैं आत्महत्या कर रहा हूं, जिसकी पूरी जम्मेदारी आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी जो पहले पुजारी थे, उनको मैने निकाल दिया और संदीप तिवारी पुत्र आद्या प्रसाद तिवारी की होगी। वैसे मैं पहले ही आत्महत्या करने जा रहा था लेकिन हिम्मत नहीं कर पा रहा था। एक आडियो आनंद गिरि ने जारी किया था, जिसमें मेरी बदनामी हुई। आज मैं हिम्मत हार गया और आत्महत्या कर रहा हूं। 25 लाख रुपया आदित्य मिश्रा से एवं 25 लाख रुपया शैलेश सिंह सेंगर रियल स्टेट से मांगता हूं।

मेरी समाधि पार्क में नीम के पेड़ के पास दिया जाए। यही मेरी अंतिम इच्छा है। धनंजय विद्यार्थी मेरे कमरे की चाभी बलवीर महाराज को देना। बलवीर गिरि एवं पंच परमेश्वर निवेदन कर रहा हूं मेरी समाधि पार्क में नीम के पेड़ के पास लगा देना। प्रिय बलवीर गिरि ओम नमो नारायण। मैंने तुम्हारे नाम एक रजिस्टर्ड वसीयत की है। जिसमें मेरे ब्रह्मलीन (मरने के बाद) हो जाने के बाद तुम बड़े हनुमान मंदिर एवं मठ बाघंबरी गद्दी का महंत बनोगे।

तुमसे मेरा एक अनुरोध है कि मेरी सेवा में लगे विद्यार्थी जैसे मिथिलेश पांडेय, रामकृष्ण पांडेय, मनीष शुक्ला, शिवेश कुमार मिश्रा, अभिषेक कुमार मिश्र, उज्ज्वल द्विवेदी, प्रज्ज्वल द्विवेदी, अभय द्विवेदी, निर्भय द्विवेदी, सुमित तिवारी का ध्यान देना। जिस तरह मेरे समय में रह रहे हैं, उसी तरह तुम्हारे समय में रहेंगे। इन सभी का ध्यान देना। उपरोक्त सभी जिनका मैंने नाम लिखा है तुम लोग भी हमेशा बलवीर गिरि महाराज का सम्मान करना। जिस तरह से हमेशा मेरी सेवा एवं मठ की सेवा की, उसी तरह से बलवीर गिरी महाराज एवं मठ मंदिर की सेवा करना।

वैसे हमें सभी विद्यार्थी प्रिय हैंलेकिन मनीष शुक्लाशिवम मिश्राअभिषेक मिश्रा मेरे अति प्रिय हैं। कोरोना काल में जब मुझे कोरोना हुआ तब मेरी सेवा सुमित तिवारी ने की। मंदिर में मालाफूल की दुकान मैंने सुमित तिवारी को किरायानामा रजिस्टर किया है। मिथिलेश पांडेय को बड़े हनुमान रुद्राक्ष इंपोरियम की दुकान किराये पर दी है। मनीष शुक्लाशिवेश मिश्राअभिषेक को लड्डू की दुकान किराये पर दी है।

सुसाइड नोट में सात बार आत्महत्या शब्द का जिक्र है। इस सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरि ने आनंद गिरि के साथ आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी का जिक्र किया है। हालांकि, आनंद गिरि का जिक्र सबसे ज्यादा 14 बार किया है। उन्होंने लिखा है कि जबसे आनंद गिरि ने मेरे ऊपर असत्य, मिथ्या, मनगढ़ंत आरोप लगाया, तब से मैं मानसिक दबाव में जी रहा हूं। जब भी मैं एकांत में रहता हूं, मर जाने की इच्छा होती है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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