विधायक राजू पाल हत्याकांड के गवाह की हत्या, कौन दे रहा है अतीक के गुर्गों को संरक्षण?

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बीएसपी विधायक राजू पाल हत्याकांड में गवाह उमेश पाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। इससे एक बार फिर उत्तर प्रदेश के कानून और व्यवस्था पर गम्भीर प्रश्नचिन्ह लग गया है और स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या उसे उमेश पाल की हत्या की भनक लगी थी या नहीं।

इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि अतीक, उसके भाई अशरफ के जेल में निरुद्ध होने के बावजूद यदि उसके गुर्गे आपराधिक कृत्यों को बेख़ौफ़ होकर अंजाम दे रहे हैं तो उन्हें सत्ता पक्ष के किन बड़े नेताओं का संरक्षण प्राप्त है और पुलिस से उनकी किस तरह की सांठगांठ है?

उमेश पाल को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई। स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल की इमरजेंसी में उमेश को करीब दो घंटे तक रखा गया था। इसी दौरान इमरजेंसी कक्ष को भारी पुलिस बल ने घेर रखा था। उमेश के परिजन चीख-चीख कर अतीक अहमद पर आरोप लगाते रहे कि उसी ने उमेश को मरवा दिया।

बेसुध पत्नी ने कहा कि यहां इतने पुलिस वाले क्यों है, जब गोली मारी तो कहां थे ये पुलिस वाले। उन्हें समझाने वाले रिश्तेदारों की आंखें भी उनका हाल देखकर भीग जा रही थीं। उमेश की पत्नी जया और उनकी बहन ने चीख चीख कर आरोप लगाए। उमेश के भतीजों तथा अन्य रिश्तेदारों ने भी एक स्वर में अतीक और उसके गैंग पर आरोप लगाए। वह जेल में बैठकर वारदात करा रहा है। सब कुछ जानते हुए भी पुलिस वालों ने कुछ नहीं किया।

इलाहाबाद पश्चिमी सीट से बसपा विधायक रहे राजू पाल की 25 जनवरी 2005 को सुलेमसराय में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी माफिया डॉन अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ है। मामले में पूर्व सांसद अतीक अहमद व उनके छोटे भाई पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ समेत अन्य लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी।

घटना के मुख्य गवाह उमेश पाल ही हैं जो पूजा पाल के करीबी हैं। अतीक के गुर्गों ने उमेश पाल का भी अपहरण कर लिया था। इसकी भी रिपोर्ट दर्ज है। राजू पाल हत्याकांड की जांच सीबीआई ने की थी, जिसमें उमेश पाल मुख्य गवाह था। यही कारण है कि उसे कई बार जान से मारने की धमकी दी जा चुकी है। हमलावरों ने कुल 16 राउंड गोलियां चलाई। आज शाम 4 बजे उमेश पाल कचहरी परिसर में मौजूद थे और शुक्रवार को ही इस हत्याकांड मामले में उनकी गवाही थी।

राजू पाल की पत्नी पूर्व विधायक पूजा पाल ने भी कई बार आशंका जताई थी कि गवाही को प्रभावित करने के लिए उमेश पाल की हत्या हो सकती है। उमेश पाल ने भी खुद को जान का खतरा बताया था। बार-बार मिल रही धमकी के कारण ही सरकार ने उमेश को दो गनर दिये थे।

दरअसल बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल और पूर्व बाहुबली सांसद अतीक अहमद के बीच अदावत करीब 17 साल पुरानी है। राजू पाल हत्याकांड में गवाह बनते ही अतीक गिरोह उन्हें दुश्मन की नजर से देखने लगा। कई बार हमले का प्रयास हुआ लेकिन वे बच निकले। 28 फरवरी, 2008 को उमेश का अपहरण कर लिया गया। उनके साथ मारपीट की गई, धमकी दी गई, गवाही दी तो मार दिया जाएगा और बाद में उन्हें छोड़ा गया तो उन्होंने अतीक, अशरफ समेत गिरोह के खिलाफ कई रिपोर्ट दर्ज कराई।

इसके बाद भी अतीक गिरोह उमेश के पीछे पड़ा रहा। 11 जुलाई 2016 को उमेश गवाही देने कचहरी गए थे। उस दौरान कचहरी परिसर में ही जानलेवा हमला किया गया। उमेश ने अतीक, अशरफ समेत गिरोह के तमाम लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। दोनों मामले अब कोर्ट में चल रहे हैं। उमेश ने अतीक गिरोह के खिलाफ तीसरी एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके अलावा 2022 में जान से मारने की धमकी और एक अन्य मामले में एफआईआर लिखाई गई थी।

अतीक गिरोह ने उमेश पर न सिर्फ हमले कराए और धमकियां दीं बल्कि 2016 में धूमनगंज में जीतेंद्र पटेल की हत्या के मुकदमे में नामजद भी करवा दिया। हालांकि जांच में उमेश को बरी कर दिया गया।

इलाहाबाद पश्चिमी से बसपा विधायक रहे राजू पाल की 25 जनवरी 2005 को हत्या कर दी गई थी। यह वारदात सुलेम सराय में दिनदहाड़े हुई थी। इसके बाद बसपा ने उनकी पत्नी पूजा पाल को टिकट दिया था और वह चुनाव जीत गई थी। वर्तमान में पूजा पाल कौशांबी की चायल सीट से समाजवादी पार्टी की विधायक है राजू पाल हत्याकांड में पूर्व सांसद अतीक अहमद और उनके छोटे भाई अशरफ समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

हमलावरों ने उमेश पाल के गनर संदीप मिश्रा पर भी गोली चला दी और उनकी भी अस्पताल में मृत्यु हो गई है। वहीं दूसरा गनर राघवेंद्र सिंह भी गंभीर रूप से घायल हो गया है। बता दें कि राजू पाल अतीक अहमद से दुश्मनी को लेकर भी विख्यात थे और उनकी हत्या के बाद दुश्मनी काफी बढ़ गई थी।

उमेश पाल जो इस मामले में मुख्य गवाह थे। वह राजू पाल की पत्नी पूजा पाल की सगी बुआ का लड़का था। राजू पाल हत्याकांड की जांच सीबीआई ने की थी और उमेश पाल को पहले भी जान से मारने की धमकी दी गई थी। पूजा पाल भी कई बार शिकायत कर चुकी है कि उमेश पाल की हत्या की जा सकती है।

राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल और उनके गनर की हत्या की वारदात जिस तरीके से अंजाम दी गई, उससे यह तय है कि इसके लिए फुलप्रूफ प्लानिंग की गई थी। यह भी कहा जा रहा है कि जिस तरह से उमेश के कार से घर के बाहर पहुंचने पर यह वारदात की गई, उससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि शायद हत्यारे कचहरी से ही उनके पीछे लगे थे।

इस हत्याकांड के पीछे फुलप्रूफ प्लानिंग की बात कही जा रही है तो इसकी अपनी वजहें भी हैं। पहली वजह यह है कि उमेश के गाड़ी से उतरते ही हत्यारों ने उन पर हमला बोल दिया। यानी उन्हें यह पता था कि उमेश घर कब आने वाले हैं और इसके लिए वह पहले से ही तैयार थे। यही वजह थी कि उन्हें संभलने का भी मौका नहीं मिला। दूसरी वजह यह है कि हत्यारों को यह पता था कि गाड़ी से उतरते वक्त सुरक्षाकर्मियों को भी पोजीशन लेने में कुछ वक्त जरूर लगेगा और हुआ भी ठीक ऐसा ही।

जब तक उमेश के गनर पोजीशन ले पाते, हमलावर उन्हें भी निशाना बना चुके थे। तीसरी वजह यह है कि बदमाश पिस्टल ही नहीं बल्कि बमों का जखीरा लेकर भी पहुंचे थे। यानी उनकी प्लानिंग यह भी थी कि फायरिंग में किसी तरह उमेश बच भी गए तो बम के हमले से वह ना बच सकें। यही वजह है कि अन्य बदमाशों के ताबड़तोड़ फायरिंग करने के साथ ही एक बदमाश लगातार बम चलाता रहा।

वारदात से करीब आधे घंटे पहले ही उमेश कोर्ट से निकले थे। वहां से सीधे वह निकलकर घर ही पहुंचे थे। ऐसे में इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि हत्या से पहले न सिर्फ उनकी रेकी हुई बल्कि घटना के दौरान एक -एक पल की लोकेशन भी शूटरों को दी जा रही थी। यानी कोई ऐसा जरूर था तो कचहरी से ही उमेश पर लगातार नजर बनाए रखे हुए था।

घटना के बाद एसओजी ने सुलेमसराय से लेकर कचहरी तक लगे दो दर्जन से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। इस घटना के बाद हत्यारों की तलाश में एसओजी की 10 टीमें लगा दी गई हैं। इसके साथ ही इस मामले में एसटीएफ को भी लगाया गया है। एसटीएफ प्रयागराज के साथ ही वाराणसी इकाई की भी मदद ली जा रही है। उधर प्रयागराज से सटे जनपदों मसलन कौशाम्बी, प्रतापगढ़ जौनपुर, मिर्जापुर आदि की भी पुलिस को अलर्ट किया गया है।

उमेश पाल हत्याकांड में घटना के कुछ देर बाद ही अतीक अहमद के दो बेटों असद व अहजम को पुलिस ने उठा लिया। उन्हें गोपनीय स्थान पर ले जाकर पूछताछ चलती रही। इसके अलावा उनके दो दोस्तों और इलाके के तीन अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जाती रही। पुलिस ने शाइस्ता परवीन से भी पूछताछ की। घटना के बाद जो सीसीटीवी फुटेज जारी हुआ, उसमें एक हमलावर को देखकर इस हत्याकांड में शक की सुई सबसे ज्यादा अतीक अहमद पर है।

उमेश पाल की हत्या जिस तरीके से की गई, उससे साफ था कि हत्यारों का मकसद सिर्फ उसे खत्म करना नहीं, बल्कि दहशत फैलाना भी था। हत्यारों ने सरेशाम बम व गोलियां चलाईं, यही नहीं घर में घुसकर उमेश को मौत के घाट उतारा। जिस जगह यह वारदात हुई, वह प्रयागराज-कानपुर हाईवे पर स्थित है। 24 घंटे यहां भीड़भाड़ रहती है। फिर शाम को पांच बजे तो निकलना भी मुश्किल होता है। ऐसे में माना जा रहा है कि भीड़भाड़ वाले इलाके में दुस्साहसिक वारदात का मकसद हत्या के अलावा भी कुछ और था।

उमेश पाल की हत्या के बाद माफिया अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन ने इस वारदात के पीछे अपने शौहर और बेटों का हाथ होने के इन्कार किया है। हाल में ही बसपा में शामिल हुईं शाइस्ता ने कहा कि शहर में कोई भी वारदात होती है तो उनके शौहर का ही नाम उछाल दिया जाता है। इस मामले में भी यही किया जा रहा है। जबकि, जग जाहिर है कि उनके शौहर, देवर और दो बेटे इस समय जेल में हैं।

25 जनवरी 2005 को राजू पाल की सुलेम सराय क्षेत्र में स्वचालित हथियारों से हत्या कर दी गई थी। शूटआउट में राजू के साथ संदीप यादव और देवी लाल भी मारे गए थे। राजू के गनर समेत कई लोग घायल हुए थे। इस मामले में राजू की पत्नी पूजा पाल ने तत्कालीन सांसद अतीक अहमद, अशरफ, फरहान, आबिद, रंजीत पाल और गुफरान समेत नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मुकदमे के मुख्य गवाह राजू पाल के बाल सखा और रिश्तेदार उमेश पाल बने थे।

विधायक राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल की हत्या के मामले को शासन ने गंभीरता से लिया है। डीजीपी डीएस चौहान ने प्रयागराज कमिश्नरेट से वारदात की विस्तृत रिपोर्ट तलब करके शासन भेजी है।

You May Also Like

More From Author

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments