राजद के यादव वोट को साधने के लिए बिहार में उतरेंगे बीजेपी के मोहन यादव

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मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव जल्द ही बिहार के दौरे पर जाने वाले हैं। बिहार में बीजेपी इसकी बड़ी तैयारी कर रही है। बीजेपी को मोहन यादव से बड़ी आस है। आस यह है कि जब वे बिहार आएंगे तो बिहार के यादवों को अपने पाले में ला सकेंगे। बीजेपी मान रही है कि मोहन यादव के जरिये बिहार के यादव वोट में सेंध लग गया तो बेड़ा पार हो जाएगा और लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हालत पहले से बेहतर होगी।

बीजेपी से ज्यादा बिहार बीजेपी के यादव नेता कुछ ज्यादा ही उत्साहित हैं। मोहन यादव को सम्मानित करने की तैयारी की जा रही है। खबर है कि जब मोहन यादव बिहार पहुंचेंगे तो बिहार के सभी जिलों के बड़े यादव नेताओं को कार्यक्रम में शामिल कराया जायेगा। एक-एक यादव नेता से उनका परिचय होगा। बिहार की सियासत से उन्हें रूबरू कराया जायेगा और लालू यादव के खेल को भी समझाया जायेगा। याद रहे मध्य प्रदेश के सीएम बनने के बाद मोहन यादव का यह पहला बिहार दौरा होगा। बीजेपी को लग रहा है कि मोहन यादव जब बिहार में जायेंगे तो यादव समाज के लोग उन्हें अपना मानेंगे। यादवों का गौरव समझेंगे और बिहार के सभी यादव मिलकर बीजेपी में बड़े यादव नेता पर कोई बड़ा दांव लगाएंगे।

बिहार में यादवों का बड़ा वोट बैंक है। लेकिन बिहार का बड़ा सच तो यही है कि जब से लालू यादव की राजनीति बिहार में शुरू हुई बिहार के यादव लालू यादव के ही होकर रह गए। कह सकते हैं कि बिहार में यादव वोट बैंक पर लालू यादव का कब्ज़ा है और यादवों के इस वोट बैंक को आज तक कोई भी पार्टी लालू यादव से अलग करने में सफल नहीं हुई है। बीजेपी ने तो कई बार इसकी कोशिश भी की।

लालू यादव के कभी हनुमान कहे जाने वाले राम कृपाल यादव जब बीजेपी के साथ जुड़े थे तो बीजेपी को लगा था कि बिहार के अधिकतर यादव बीजेपी के साथ जुड़ जायेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीजेपी ने रामकृपाल यादव के जरिए कई बार इस तरह की कोशिश भी की लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में बीजेपी को पता लगा कि रामकृपाल यादव केवल अपनी ही सीट जीत सकते हैं, वह यादवों के नेता नहीं हो सकते। बाद में बीजेपी ने रामकृपाल को आगे बढ़ाने का काम रोक ही दिया। उन्हें मंत्री तक नहीं बनाया गया। रामकृपाल को कई बार लगा कि बीजेपी उनके साथ जो कर रही है वह ठीक नहीं है। कई बार यह भी लगा कि रामकृपाल बीजेपी का साथ छोड़ भी सकते हैं। लेकिन लालू यादव ने उनके लिए अपने दरवाजे को बंद कर दिया था। अब रामकृपाल यादव को कोई नहीं पूछता।

रामकृपाल यादव के बाद बीजेपी ने एक और यादव नेता को सामने लाया। नाम है नित्यानंद राय। नित्यानंद राय को केंद्र में मंत्री भी बनाया गया। उन्हें गृह राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया। बहुत दिन तक नित्यानंद राय को लेकर बीजेपी इस प्रयास में लगी हुई थी कि उन्हें सीएम बनाया जा सकता है। कई बार प्रयास भी किये गए। लेकिन बीजेपी का यह खेल भी ख़राब ही हुआ। नित्यानंद राय की भी चाहत थी कि वे मुख्यमंत्री बनें। लेकिन लालू यादव के सामने उनकी कोई नहीं चली। नित्यानंद राय हार गए। नित्यानंद राय को लालू के खिलाफ बोलने के लिए कई बार खड़ा भी किया गया लेकिन बिहार के यादव नेताओं की उनमें कोई रुचि नहीं देखी गई। कई मंचों पर तो नित्यानंद राय का बिहार के यादव नेताओं ने अपमान भी किया। अंत में बीजेपी को लग गया कि नित्यानंद राय भी लालू यादव का मुकाबला नहीं कर सकते हैं।

अब बीजेपी को लग रहा है कि मध्यप्रदेश के मोहन यादव को बिहार में उतारकर यादवों के वोट बैंक में सेंध लगायी जा सकती है। बीजेपी की मुश्किल बिहार में सबसे ज्यादा यादव वोट बैंक को लेकर ही है। और जातियां जहां बीजेपी के बहकावे में आ कर पाला बदल लेती हैं वहीं बिहार के यादव नेता राजद को छोड़कर कहीं जाने को तैयार नहीं हैं। बीजेपी को लग रहा है कि यादवों का कुछ वोट बैंक बीजेपी के साथ हो जाए तो राजद को टक्कर दी जा सकती है।

बिहार में लालू यादव के साथ जो जातियां जुड़ी हुई हैं उसमें यादव और मुस्लिम समाज सबसे अधिक है। बिहार में हालिया जातीय गणना के मुताबिक यादवों की कुल आबादी करीब 15 फीसद है। इसके साथ ही मुसलमानों की आबादी करीब 18 फीसद है। यानी कुल 33 फीसदी आबादी अभी तक राजद के साथ है। यह बात और है कि पिछले कुछ वर्षों में यादवों का एक वर्ग बीजेपी के साथ गया है लेकिन इसका राजद के वोट बैंक पर कोई असर नहीं पड़ा है। माना जा रहा है कि बिहार के कोई दो फीसदी यादव दूसरे दलों को वोट करते हैं। इन्हीं दूसरे दलों में बीजेपी भी शामिल है। ऐसे में बीजेपी की समझ यही है कि अगर चार से पांच फीसदी यादव वोट बीजेपी के साथ जुड़ जाता है तो बीजेपी आगामी चुनाव में बेहतर परिणाम ला सकती है। बीजेपी की यही सोच मोहन यादव के आमंत्रण से जुड़ा हुआ है।

बीजेपी को लग रहा है कि मोहन यादव बिहार का दौरा करेंगे तो यादवों में एक सन्देश जायेगा कि अगर बिहार के यादव भी किसी ईमानदार यादव नेता को आगे बढ़ाते हैं तो बिहार में भी कोई यादव सीएम बन सकता है। लेकिन जिस तरह से राजद और लालू यादव ने बिहार की जनता और यादव समुदाय को बीजेपी के खिलाफ खड़ा कर रखा है, ऐसी हालत में बीजेपी का यादव समाज में सेंध लगाना बेहद मुश्किल है। मोहन यादव आएं या फिर कोई और बिहार का यादव लालू यादव से अभी मुंह मोड़ने के लिए तैयार नहीं है। और ऐसा अगर हुआ तो राजद की राजनीति भी जमींदोज हो सकती है।

कहा जा रहा है कि मोहन यादव बिहार में लालू यादव और उनके परिवार पर हमला कर सकते हैं लेकिन क्या यह सब संभव है ? और ऐसा संभव हुआ तो इस बात की बड़ी आशंका है कि मोहन यादव की राजनीति भी घेरे में आ सकती है। फिर लालू यादव का खेल बड़ा होगा और वह खेल बीजेपी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

(अखिलेश अखिल वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)

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