42 प्रतिशत लोगों ने गैस सिलिंडर का इस्तेमाल छोड़ दिया, खाना बनाने के लिये जंगल की लकड़ी पर निर्भर

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उज्ज्वला योजना के तहत लोगों को मुफ्त गैस सिलिंडर देकर गांव के लोगों की ज़िंदगी बदलने की केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकर के दावों के उलट एक सर्वे में सामने आया है कि खास क्षेत्र में क़रीब 42 फीसदी लोगों ने गैस सिलिंडर का इस्तेमाल करना छोड़ दिया है और वे फिर से लकड़ी से खाना बनाने लगे हैं।

‘द टेलिग्राफ’ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक झारग्राम और वेस्ट मिदनापुर के लगभग 100 दूरदराज के गावों में 42 फीसदी लोगों ने गैस सिलिंडर को उठाकर किनारे रख दिया है। महामारी के दौरान वे गैस सिलिंडर का ख़र्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। सर्वे में सामने आया कि झारग्राम और वेस्ट मिदनापुर के 13 ब्लॉक के 100 गांवों में 560 घरों का सर्वे किया। इसमें सामने आया कि लोग तेजी से गैस सिलिंडर पर खाना बनाना छोड़ रहे हैं।

सर्वे के प्रमुख प्रवत कुमार ने मीडिया को बताया कि उन्होंने झारग्राम और वेस्ट मिदनापुर के 13 ब्लॉक के 100 गांवों में 560 घरों का सर्वे किया। इसमें सामने आया कि लोग तेजी से गैस सिलिंडर पर खाना बनाना छोड़ रहे हैं। सर्वे में एलपीजी गैस के इस्तेमाल में कमी के तीन अहम कारण बताये गये हैं।

1- पहला गैस की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि,

2- दूसरा उपलब्धता

3 तीसरा लॉकडाउन के दौरान लोगों की आय में कमी।

सर्वे में बताया गया है एलपीजी गैस का खर्च न वहन कर पाने की वजह से वे एक बार फिर लोग खाना पकाने के लिये जंगल की लकड़ी पर ही निर्भर हो रहे हैं। और बहुत सारे लोगों ने गैस सिलिंडर को स्टोर रूम में रख दिया है। बता दें कि केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना की शुरुआत साल 2016 में की थी। 30 जुलाई 2021 तक इस योजना के माध्यम से 79995022 लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने का दावा किया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के साथ ही मोदी सरकार ने ढिंढोरा पीटा था कि इस योजना के साथ लोगों को प्रदूषण से भी छुटकारा तथा महिलाओं के स्वास्थ्य में भी सुधार आयेगा। लेकिन मोदीजी भूल गये कि खाना गैस सिलेंडर से नहीं उसके भीतर भरी जाने वाली एलपीजी गैस से बनाया जाता है जिसके दामों में उन्होंने बेतहाशा वृद्धि की है।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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