Tuesday, December 7, 2021

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टैक्स और शुल्क घटाने से सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल प्रधानमन्त्री जी !

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हमारे यशस्वी प्रधानमन्त्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी की कार्यप्रणाली कि चाहे कोई कितनी भी आलोचना करे लेकिन वे वास्तव में जादूगर हैं।अब देशभर के अर्थशास्त्री और पेट्रोलियम विशेषज्ञ भले यह तथ्य जानते रहें कि भारत में मंहगे पेट्रोल और डीजल के लिए दुनियाभर के तेल कंपनियों द्वारा वसूले जा रहे कच्चे तेल का मूल्य जिम्मेदार नहीं है बल्कि मोदी सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की उच्च कीमतों में इस पर लगने वाले टैक्स और शुल्कों का बहुत बड़ा हाथ है। पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्य सरकार दोनों टैक्स वसूलते हैं। इसके अलावा फ्रेट, डीलर चार्ज और डीलर कमीशन भी रहता है। लेकिन  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को एक हाईलेवल मीटिंग की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस मीटिंग में दुनियाभर की तेल कंपनियों के सीईओऔर एक्सपर्ट्स शामिल हुए,जिसमें प्रधानमंत्री ने पिछले 7 साल में तेल और गैस क्षेत्र में सुधारों पर चर्चा की और देश को प्रकारांतर से यह संदेश दिया कि महंगे पेट्रोल-डीजल के लिए निर्यातक देश जिम्मेदार हैं।अब यह जादूगरी नहीं तो क्या है अपनी कमी दूसरों पर सफलतापूर्वक थोप दी जाय?

इस बैठक के बाद गोदी मीडिया की इस तरह की सुर्खियां 

‘पेट्रोल-डीजल सस्ते होने के आसार, पीएम मोदी ने की दुनिया भर की तेल कंपनियों के सीईओ से हाई लेवल मीटिंग’ छाप रहा है कि बस दाम गिरने वाले हैं ।जबकि हकीकत है कि सरकार टैक्स और शुल्क को यूपीए 2 के स्तर पर ला दे तो पेट्रोल डीजल के दाम तत्काल कम हो जाएंगे।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में लाइसेंस नीति, गैस मार्केटिंग, कोल बेड मीथेन पर नीतियां, कोयला गैसीकरण और भारतीय गैस एक्सचेंज के हालिया सुधार पर बातचीत हुई। बता दें कि ये बैठक 2016 में शुरू की गई थी, जो हर साल होती है।तेल क्षेत्र पर बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री ने रेवेन्यू के साथ प्रोडक्शन बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कच्चे तेल के लिए भंडारण सुविधाओं को बढ़ाने की आवश्यकता के बारे में भी बताया। उन्होंने आगे कहा कि देश को प्राकृतिक गैस की सख्त जरूरत है। उन्होंने पाइपलाइनों, शहरी गैस वितरण और एलएनजी रीगैसीफिकेशन टर्मिनलों सहित वर्तमान और संभावित गैस बुनियादी ढांचे के विकास पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री ने बताया है कि तेल और गैस क्षेत्र की चुनौतियों का सामना करने के लिए इस मीटिंग के सुझाव सभी देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि भारत खुलेपन, आशावाद और अवसरों, नए विचारों, दृष्टिकोणों और नवाचारों से भरा हुआ देश है। उन्होंने सीईओ और विशेषज्ञों को तेल और गैस क्षेत्र में भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित किया।

प्रधानमंत्री के साथ इस बैठक में रूस की रोसनेफ्ट के चेयरमैन और सीईओ डॉ. आइगोर सेचिन, सऊदी अरब की सऊदी अरामको के प्रेसिडेंट और CEO अमीन नासिर, ब्रिटेन की ब्रिटिश पेट्रोलियम के CEO बर्नार्ड लूनी, अमेरिका की श्लमबर्जर लिमिटेड के सीईओ ओलिवर ली पेच, यूओपी  की हनीवैल के प्रेसिडेंट और सीईओ ब्रायन ग्लोवर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और एमडी मुकेश अंबानी और वेदांता लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अग्रवाल शामिल हुए। सभी ने तेल और गैस क्षेत्र में खासकर नवीनीकरण ऊर्जा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किए गए प्रयासों की सराहना की।

अब प्रधानमन्त्री से भला पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी क्यों पीछे रहते। हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को कहा कि तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक आर्थिक रिकवरी पर प्रतिकूल असर डालेंगी। उन्होंने सऊदी अरब और ओपेक (तेल निर्यातक देशों के संगठन) के अन्य सदस्य देशों से सस्ती और भरोसेमंद आपूर्ति की दिशा में काम करने को कहा। इस साल मई से कीमतों में वृद्धि के साथ देशभर में पेट्रोल और डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गये हैं। पेट्रोलियम मंत्री ने सेरा वीक के ‘इंडिया एनर्जी फोरम’ में कहा कि अगर ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो वैश्विक आर्थिक पुनरुद्धार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

पिछले साल अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का दाम टूटकर 19 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। इसका कारण कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये विभिन्न देशों में लगाया गया ‘लॉकडाउन’ था। इससे मांग काफी निचले स्तर पर पहुंच गयी थी। भारत ने कच्चे तेल उत्पादक देशों से कहा कि तेल की ऊंची कीमत से वैकल्पिक ईंधन अपनाने की गति तेज होगी और यह ऊंची दर उत्पादकों के लिये नुकसादायक साबित होगी। पुरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव से न केवल भारत बल्कि औद्योगिक देश भी प्रभावित होंगे।

दरअसल पेट्रोल और डीजल की कीमतें घटने का नाम नहीं ले रही हैं।पेट्रोल और डीजल की उच्च कीमतों में इस पर लगने वाले टैक्स और चार्जेज का बहुत बड़ा हाथ है। पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्य सरकार दोनों टैक्स वसूलते हैं। इसके अलावा फ्रेट, डीलर चार्ज और डीलर कमीशन भी रहता है। इन सब को पेट्रोल और डीजल के बेस प्राइस में जोड़ देने के बाद रिटेल कीमत सामने आती है। पेट्रोल और डीजल पर टैक्स और चार्जेज का स्ट्रक्चर इस तरह है-44.06 रुपये के पेट्रोल पर 57.24 रुपये का टैक्स और 45.75 रुपये के डीजल पर 45.57 रुपये का टैक्स।पेट्रोल और डीजल पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क की दर पूरे भारत में समान है। लेकिन वैट की दर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होती है। भारत में पेट्रोल-डीजल पर सबसे ज्यादा वैट राजस्थान में लगता है।

भारत में पेट्रोल और डीजल की जितनी खपत है, उसके मुकाबले कच्चे तेल का उत्पादन  काफी कम है। देश में इस समय करीब 70 फीसदी क्रूड ऑयल विदेशों से आता है। फिर उसे देश में स्थित रिफाइनरी में साफ किया जाता है और उससे पेट्रोल, डीजल, एलपीजी आदि निकाला जाता है। इस समय कच्चे तेल की कीमतें 85 डॉलर के आसपास चल रही हैं।

कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) द्वारा तय की जाती है। भारत को भी ओपेक द्वारा तय दर पर कच्चा तेल खरीदना पड़ता है। लेकिन जब कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं, तब भी भारत में उपभोक्ता पेट्रोल और डीजल के लिए ऊंची कीमत चुकाते हैं

पंपों पर ग्राहकों को बेचे जाने वाले तेल की कीमत ट्रेड पैरिटी प्राइसिंग (टीपीपी) फॉर्मूले से तय होती है। इसका 80:20 का अनुपात रहता है। यानी देश में बेचे जाने वाले पेट्रोल-डीजल के मूल्य का 80 प्रतिशत हिस्सा विश्व बाजार में वर्तमान में बेचे जा रहे ईंधन के दामों से जुड़ा होता है। शेष 20 फीसदी हिस्सा अनुमानित मूल्य के अनुसार जोड़ा जाता है। भारत में कच्चे तेल के शोधन और मार्केटिंग की लागत का पंपों पर ईंधन के असल दामों से कोई लेना-देना नहीं है।

पेट्रोलियम पदार्थों पर प्रत्येक राज्य अपनी दरों के अनुसार कर वसूलता है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क के अलावा राज्यों के कर व स्थानीय कर शहरों द्वारा वसूले जाते हैं। देश में बीते छह सालों में केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल से कमाई 307 फीसदी तक बढ़ा ली है। सरकार की कमाई का यह बड़ा जरिया बना हुआ है।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन सालों में पेट्रोल-डीजल से सरकार को टैक्स से कमाई तीन गुना से ज्यादा तक बढ़ चुकी है। अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 के बीच सरकार ने तेल पर टैक्स के माध्यम से 2.94 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है।

गौरतलब है कि कि केंद्र और राज्य सरकारों के भारी टैक्स की वजह से ही पेट्रोल-डीजल की कीमत काफी ज्यादा है।. पेट्रोल कीमत में करीब 55 फीसदी और डीजल की कीमत में करीब 50 फीसदी हिस्सा टैक्स का ही होता है। इन टैक्सेज को घटाने की काफी समय से मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक केंद्र के कानों में जूं तक नहीं रेंगी है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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