मध्य प्रदेश में मेधा पाटकर समेत महिलाओं पर पुलिसिया कहर

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बिरला समूह के खरगोन जिले में स्थित सेंचुरी रेयान और डेनिम मिल के आंदोलनरत मजदूरों के सत्याग्रह आंदोलन के कल 1387 दिन पूर्ण हो चुके हैं। जहां मिल प्रबंधन जबरिया तरीके से मजदूरों और कर्मचारियों को वीआरएस दे रहा है, जो न तो नियमानुसार है और न ही जनहित में। मजदूर श्रमिक जनता संघ के नेतृत्व में लगातार सन् 2017 से आंदोलन चल रहा है। इस बीच कोरोनाकाल में श्रमिक दाना पानी को मोहताज रहे वे श्रमिक सिर्फ रोजगार चाहते हैं। गत कुछ दिवस जनता श्रमिक संघ की अध्यक्ष सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने भी श्रमिकों के समर्थन में भूख हड़ताल की थी जिसका कोई असर शिवराज सरकार पर नहीं देखा गया। 19 जुलाई को पूरे मध्य प्रदेश में विभिन्न तीस किसान और मजदूर संगठनों ने जिला मुख्यालयों पर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर मांग भी की थी कि श्रमिक और प्रबंधन विवाद में मध्य प्रदेश सरकार तत्काल हस्तक्षेप करें और बहुसंख्यक मजदूरों की मांग को पूरा करते हुए मिल चलाएं और जबरिया तरीके से प्रबंधन द्वारा वीआरएस देने और नियम विरुद्ध मजदूरों के खातों में पैसे डालने पर रोक लगायें।। श्रमिकों के हकों के लिए चल रहा यह संघर्ष संवैधानिक एवं न्यायसंगत है।

किंतु गत दिवस शिवराज सरकार ने इन तमाम सत्याग्रही आंदोलनकारियों के बीच अचानक बड़ी तादाद में पुलिस पहुंचाकर आंदोलन को तहस नहस कर दिया तथा टेंट वगैरह के साथ वहां मौजूद सभी सामान जब्त कर लिया गया। इस अलोकतांत्रिक कुचेष्टा के साथ ही मेधा पाटकर और साथी महिलाओं के साथ जो बदतमीजी और हिंसात्मक व्यवहार अपनाया गया वह शर्मनाक और घोर आपत्तिजनक है। इसके साथ मेधा पाटकर सहित 700 लोगों को यहां गिरफ्तार किया गया। जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी थीं। उन्हें जानवरों की तरह बिना स्त्री-पुरुष का भेद किए गाड़ियों में लादा गया। इतना ही नहीं उन्हें वारिश के बीच, कुछ लोगों को कसरावद में उतारा गया। इस कार्य में चार जिलों की पुलिस की सेवाएं ली गईं । इस निर्लज्ज घटनाक्रम में 20 श्रमिकों को गंभीर चोटें भी आई हैं।

लगता है, शिवराज को इस बात की भनक लग गई थी कि मोदी सरकार इस तरह का कानून बनाने जा रही है। जैसा कि ज़ाहिर है लोकसभा ने विपक्षी सदस्यों के गतिरोध के बीच मंगलवार को ‘अनिवार्य रक्षा सेवा विधेयक, 2021’ को संख्या बल के बूते मंजूरी दे दी। बता दें कि यह विधेयक संबंधित ‘अनिवार्य रक्षा सेवा अध्यादेश, 2021’ की जगह लेगा। ‘आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक 2021’ आंदोलन और हड़ताल किये जाने पर पूरी तरह रोक लगाता है। अधिसूचना में ये बताया गया है कि कोई भी व्यक्ति, जो अध्यादेश के तहत अवैध हड़ताल का आयोजन करता है अथवा इसमें हिस्सा लेता है, उसे एक साल जेल या 10,000 रुपए तक जुर्माना या फिर दोनों सजा दी जा सकती है। एन के प्रेमचंद्रन ने सदन में आगे कहा कि यह विधेयक कामगार वर्ग के लोकतांत्रिक अधिकारों को समाप्त करने वाला है और सदन में व्यवस्था नहीं होने पर इस विधेयक को पेश नहीं कराया जाना चाहिए मोदी सरकार ने इसे राज्यसभा में पास करा लिया। यह मूलतः रक्षा से सम्बंधित कारखानों के लिए बनाया गया है पर इससे सरकार की मंशा स्पष्ट झलकती है।

इस घटना पर किसान संघर्ष समिति के नेता और जुझारू साथी डा.सुनीलम ने विशेष तौर पर कहा कि यह मुद्दा जब उच्च न्यायालय में लंबित है। मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिए गए हैं तब श्रमिकों को बिना किसी तरह से सूचित किए न्याय की जगह सरकार ने जो पुलिस दमन का रास्ता चुना, वह पूरी तरह ना केवल गलत है, बल्कि अलोकतांत्रिक भी है।

डॉ. सुनीलम ने उस दिन की घटना के बारे में बताया कि रोज की तरह सेंचुरी सत्याग्रह पंडाल में सेंचुरी के श्रमिक, महिलाएं और बच्चे पंडाल में बैठे हुए थे। अचानक अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार और सैकड़ों की संख्या में पुलिस और महिला पुलिस ने आंदोलनकारियों पर हमला बोल दिया। जबरदस्ती घसीटकर सबको गाड़ियों में ठूस दिया। सेंचुरी सत्याग्रह पंडाल से लगभग 700 से अधिक श्रमिकों और महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। जिसमें से 200 से अधिक को कसरावद फाटे के पास उतार दिया गया। कुछ को रास्ते में जबरदस्ती भी उतारा गया।

पुरुष पुलिसवालों ने महिलाओं को डंडों से मारा। सैकड़ों श्रमिकों के कपड़े फाड़ दिए। महिला और पुरुषों को एक ही गाड़ी में जानवरों की तरह ठूंसा गया। तकरीबन 350 से अधिक श्रमिकों को आईटीआई स्कूल कसरावद में दिनभर भूखे  रखा गया। 100 से अधिक महिलाओं को शासकीय महाविद्यालय कसरावद ले जाया गया। कुछ महिलाओं के साथ मेधा पाटकर जी के साथ एनवीडीए रेस्ट हाउस में रखा गया। शाम को 5:00 बजे भोजन के पैकेट लाये गए। श्रमिकों ने गिरफ्तार महिलाओं और श्रमिक जनता संघ की अध्य्क्ष मेधा पाटकर को श्रमिकों के बीच पहले लाने की मांग की जिसे प्रशासन के द्वारा नहीं माने जाने पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया गया। पुलिस द्वारा बल प्रयोग के कारण 20 से अधिक महिलाओं और पुरुषों को गंभीर चोट आई, जिसमें 05 महिलाओं को खरगोन अस्पताल रेफर किया गया। शेष का इलाज कसरावद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों द्वारा किया गया। गिरफ्तारी के बाद श्रमिकों के बच्चों के द्वारा मिल गेट के सामने धरना दिया गया।

डॉ. सुनीलम ने कहा कि कुमार मंगलम ने 450 करोड़ रुपये का मुनाफा कोरोना काल में कमाया है। लेकिन पहले 426 करोड़ की मिल को ढाई करोड़ में बेचने का नाटक किया गया। रजिस्ट्री फर्जी साबित हुई। अब 62 करोड़ में मनजीत ग्लोबल को रजिस्ट्री का दावा किया जा रहा है।

डॉ. सुनीलम ने कहा कि पहले धारा 144 की आड़ में श्रमिकों को हटाने का प्रयास किया गया। फिर कहा गया कि श्रमिकों ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है, इसलिए अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई है। देर रात श्रमिकों पर 107, 109, 151 की धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए तथा 20 हज़ार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया।

किसान संघर्ष समिति, जन आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वय ने श्रमिकों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने, फर्जी रजिस्ट्री को रद्द करने, 1000 श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने की मांग की है।

कुल मिलाकर शिवराज सरकार ने इस शांतिपूर्वक चल रहे सेंचुरी सत्याग्रह आंदोलन को कुचलने की जो निंदनीय और अमानवीय हरकत की है उसका खामियाजा उसे जल्द होने जा रहे मध्यप्रदेश चुनावों में तो भुगतना ही होगा साथ ही साथ महिलाओं के भाई और बच्चों के मामा की जो छवि दिखाई जाती थी उसकी भी पोल खुल गई है। देखना यह है कि शिवराज सरकार अगला कदम क्या उठाती हैं। जबकि सत्याग्रहियों को संपूर्ण देश के सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन तेजी से मिलना शुरू हो गया है।

(सुसंस्कृति परिहार स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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