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17 हजार रुपए में नाबालिग को जमानत, बालिग युवक की जमानत के लिए 50 हजार मांग रही मुज़फ्फरनगर की पुलिस

मुज़फ्फरनगर/ दिल्ली। मुज़फ्फरनगर के अल्तमस बताते हैं कि –“यूपी पुलिस ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल उनके छोटे भाई सावेज (17 वर्ष) और फुफेरे भाई सलमान (22 वर्ष) को अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ उठा लिया था। इससे पहले पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया था। अल्तमस बताते हैं कि पुलिस उनके दोनों भाईयों को उठाकर ले गई और तीन दिन तक अंडरग्राउंड रखा। हम थाने जाते तो पता चलता यहां नहीं हैं। जेल जाते तो वहां पता चलता कि यहां नहीं हैं। हमें पूछने पर धमकी देकर भगा दिया जाता था। तीन दिन बाद उसे मुजफ़्फरनगर जेल भेज दिया गया। तीन दिन बाद सर्टीफिकेट वगैरह दिखाने पर 17 हजार रुपए लेकर छोड़ा गया।” अल्तमस का मुजफ्फरनगर में ही फर्नीचर का छोटा सा कारोबार है और वो जामिया प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने दिल्ली आए हुए हैं।

अल्तमस बताते हैं कि – “जबकि फुफेरे भाई सलमान की जमानत अभी नहीं हुई वो जेल में ही हैं। वो बालिग हैं और उनकी आयु 22 वर्ष है। पुलिस उनकी जमानत के लिए 50 हजार रुपए की मांग कर रही है। अल्तमस बताते हैं कि सलमान के अब्बा बहुत पहले गुजर गए थे। अब मेरी निर्धन बेवा बुआ अपने बेटे सलमान की रिहाई के लिए कहां से लाए 50 हजार रुपए।”

अल्तमस बताते हैं कि और भी कई लोग उनके आस पड़ोस में पीड़ित हैं लेकिन वो डरते हैं कि किसके पास जाएं। मीडिया और पुलिस और कोर्ट सब तो उनके लिए काम कर रहे हैं। हम अपने साथ हुए अन्याय के लिए कहां गुहार लगाने जाएं। 

जो प्रोटेस्ट में शामिल ही नहीं थे उन्हें भी बेवजह गिरफ्तार करके रखा गया जेलों में

20 दिसंबर को यूपी पुलिस ने मुजफ्फरनगर में सीएए-एनआरसी के खिलाफ़ प्रोटेस्ट कर रहे 73 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से कई लोग तो ऐसे भी थे जोकि प्रोटेस्ट में शामिल भी नहीं थे।

रोज़गार दफ्तर के क्लर्क मोहम्मद फारुक को ड्यूटी से लौटते वक्त शाम के समय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उन्हें 11 दिन बेवजह जेल में रखा। बाद में उनके परिवार ने पुलिस के सामने इस बात के सबूत दिए कि फारुक़ साहेब उस दिन अपने सरकारी दफ्तर में थे और वो किसी प्रोटेस्ट का हिस्सा नहीं थे। तब जाकर उन्हें 11 वें दिन छोड़ा गया। इसी तरह अपने बीमार रिश्तेदार को मेरठ अस्पताल ले जाते वक्त अतीक अहमद, शोएब और खालिद को भी सड़क से गिरफ्तार कर लिया गया था और उनकी कोई दलील नहीं मानी गई थी। इसी तरह कारगिल से मुजफ्फरनगर पढ़ने आए मोहम्मद अली को भी हॉस्टल के गेट से गिरफ्तार कर लिया गया था। मोहम्मद अली के रिहाई के लिए लद्दाख के जमयंग सेरिंग नामग्याल ने मुजफ्फरनगर के सांसद संजीव बालियान से निजी तौर पर दर्ख्वास्त दी है।

(जनचौक संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)        

This post was last modified on January 3, 2020 10:48 am

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