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यूपी में कारनामाः 2011 में समाप्त पद पर 28 अफसरों की प्रोन्नति!

क्या आप मानेंगे कि सरकारी महकमे में जो पद वर्ष 2011 में समाप्त कर दिए गए हों उन पर वर्ष 2019 में लगभग ढाई दर्जन अधिकारियों की प्रोन्नति हो सकती है। नहीं न! लेकिन यह कारनामा उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम विभाग के कर्मचारी राज्य बीमा योजना श्रम चिकित्सा सेवायें में किया गया है। प्रमुख सचिव द्वारा श्रम कर्मचारी राज्य बीमा योजना श्रम चिकित्सा सेवा, उप्र के 28 चिकित्साधिकारियों की पदोन्नति वर्ष 2011 में समाप्त कर दिए गए प्रथम श्रेणी प्रमुख सचिव के पदों पर कर दिया है!

उप्र शासन, श्रम अनुभाग-6 के कार्यालय-आदेश सं.-1777/36-6-2019-6(सा०)/19 दि.04 नवंबर.2019 के द्वारा कर्मचारी राज्य बीमा  योजना श्रम चिकित्सा सेवायें, उप्र के क्रमशः 4, 2 एवं 22 एलोपैथिक चिकित्सा अधिकारियों को क्रमशः सहायक निदेशक, चिकित्सा अधीक्षक एवं विशेषज्ञ पदनाम के पद पर प्रोन्नति किया गया है, जबकि महामहिम राज्यपाल की स्वीकृति से जारी शासनादेश सं. 973/36-6-2011-4(18)/11 दि. 23 दिसम्बर.2011 द्वारा सहायक निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक का पद समाप्त कर दिया गया है और विशेषज्ञ के पद को प्रोन्नति के बजाय सीधी भर्ती का पद रखा गया है।

कर्मचारी राज्य बीमा श्रम चिकित्सा सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली-1996 के द्वारा चिकित्सा अधिकारियों के प्रोन्नति के लिए प्रथम श्रेणी संवर्ग में सहायक निदेशक के चार, चिकित्सा अधीक्षक के तीन और विशेषज्ञ के कुल 72 पद स्वीकृत थे, जिसे संवर्ग संरचना संबंधित उपरोक्त शासनादेश दि.23 दिसंबर 2011 द्वारा समाप्त/ संशोधित करके प्रथम श्रेणी संवर्ग में वरिष्ट चिकित्सा अधिकारी के 40 और वरिष्ठ विशेषज्ञ के 65 पद स्वीकृत किए गए। इस प्रकार पैरवी/ प्रलोभन के बल पर बिना वरिष्ठता को कोई महत्व दिए कुछ विशेष चिकित्सा अधिकारियों को प्रोन्नति देने के लिए उपरोक्त अति-महत्वपूर्ण/नीतिगत शासनादेश दि. 23 दिसंबर 2011 की पूर्ण उपेक्षा की गई।

श्रम अनुभाग-6 द्वारा निर्गत शासनादेश संख्या-862/छत्तीस-6-2017-5(171)/92 टीसी दिनांक 29 जून 2017 (छायाप्रति संलग्नक-1) के द्वारा कर्मचारी राज्य बीमा योजना श्रम चिकित्सा सेवायें, उप्र के चिकिसा अधिकारीयों कि अधिवर्षता आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई थी। शासनादेश संख्या-2047/36-6-2019-5(171)/92  दि. 17 जनवरी 2020 द्वारा उपरोक्त शासनादेश का स्पष्टीकरण जारी करते हुए अवगत कराया गया कि उक्त अधिवर्षता आयु में वृद्धि को न तो नियमित सेवा में जोड़ा जाएगा और न ही उक्त अतिरिक्त सेवा का लाभ भविष्य में पेंशन आदि के लिए अनुमन्य होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि सेवानिवृति लाभ 60 वर्ष की अधिवर्षता आयु तक ही देय होगा।

इससे यह स्पष्ट है कि उक्त अधिवर्षता आयु 60 वर्ष से 62 वर्ष किए जाने का आशय संबंधित चिकित्साधिकारियों को मात्र नियत वेतन पर सेवा विस्तार देना था। सेवानिवृति लाभों के लिए उनकी अधिवर्षता आयु 60 वर्ष ही रहेगी। शासकीय नियमों के तहत विस्तारित सेवा पर कार्यरत कर्मी को नियमित सेवक के भांति प्रोन्नति नहीं दिया जा सकता।

उपरोक्त नियम/व्यवस्था का उल्लंघन करते हुए प्रमुख सचिव,श्रम ने शासनादेश संख्या-1777/36-6-2019-6(सा०)/19 दि. 4 नव.2019 के द्वारा 60 वर्ष कि अधिवर्षता (सेवानिवृति) उम्र पूर्व में ही पार कर चुके कराबी योजना के निम्न 8 चिकित्साधिकारियों को प्रथम श्रेणी के विभिन्न पदों पर पदोन्नति कर दिया, जिसमें डॉ. अब्दुल न सिद्दीकी, डॉ. जगदीश, डॉ. जेडी बोस, डॉ. एसपीएस भाटिया, डॉ. बलवीर सिंह, डॉ. विद्या भा अग्रवाल, डॉ. अनिल श्रीवास्तव और डॉ. अतुल च गुप्ता का नाम शामिल है। इस संबंध में विभाग को गंभीर अनियमितताओं के बारे में अवगत कराया गया, लेकिन प्रोन्नति आदेश रद्द नहीं किया गया।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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This post was last modified on October 7, 2020 11:50 am

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