पुणे: कोरेगांव स्थित ओशो आश्रम में बड़ा घोटाला, विदेशियों ने हड़पे करोड़ों रुपये

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पुणे के कोरेगांव पार्क स्थित मुख्यालय वाले ओशो फाउंडेशन और ओशो समाधि के समर्थकों और फंडर्स ने आरोप लगाया है कि ट्रस्ट को नियंत्रित करने वाले कुछ विदेशी ओशो कम्यून की संपत्तियों को बेचकर और इसे अपने व्यक्तिगत खातों में भेजकर पैसा ले रहे हैं। उक्त शिकायत 7 जुलाई 2021 को कोरेगांव थाने में दर्ज़ कराई गई थी। उक्त प्राथमिकी में उल्लेख किया गया है कि अभी तक 107 करोड़ रुपये की धनराशि की हेराफेरी की गयी है।

शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा कि यह आंकड़ा तो बहुत तुच्छ है, और हेराफेरी के कुल आंकड़ों का हिसाब लगाया जाना चाहिए। शिकायतकर्ताओं में से एक, योगेश ठक्कर जिन्हें कोरेगांव में स्वामी प्रेमगीत के नाम से जाना जाता है ने कहा है कि- “हम भगवान रजनीश या ओशो की विरासत को क्षय या सड़न से बचाना चाहते हैं, क्योंकि विदेशी मूल के कुछ ट्रस्टी ओशो आश्रम की संपत्तियों की बिक्री में लिप्त हैं और बिक्री की आय हांगकांग में अपने निजी खातों में जमा करा रहे हैं।

योगेश ठक्कर ने अपनी शिकायत में ट्रस्टी माइकल बर्न जिन्हें स्वामी आनंद जयेश के नाम से जाना जाता है, डॉ. जॉन एंड्रयूज को जिन्हें डॉ. जॉर्ज मेरेडिथ के नाम से भी जाना जाता है, डार्सी ओबिरने उर्फ स्वामी योगेंद्र और पांच अन्य, जिनमें से कुछ ओशो आश्रम में रहते हैं को नामजद किया है। शिकायत में पहले एक घटना का उल्लेख किया गया था जिसमें उक्त आरोपी द्वारा 3,70,000 अमरीकी डालर की हेराफेरी की गई थी। शिक़ायतकर्ता योगेश ठक्कर ने मीडिया को जानकारी दी है कि विसंगति पाने वाली एक जर्मन महिला के आधार पर शिक़ायत की गई है। उन्होंने यह भी विस्तार से बताया कि आरोपी व्यक्ति कोरेगांव पार्क में संपत्ति खरीदने वाले लोगों की सहूलियत के लिये और बहुत कुछ करते हैं ताकि जब भी वे ओशो कम्यून के मुख्यालय का दौरा करने का फैसला करें तो परेशानी से मुक्त रहें। लेकिन उनमें से कई इस डर से शिकायत नहीं कर रहे थे कि इन शक्तिशाली ट्रस्टियों द्वारा कोरेगांव पार्क में उनके ठहरने पर प्रतिबंध लगा दिया जा सकता है।”

योगेश ठक्कर के मुताबिक ओशो इंटरनेशनल फंड (OIF) के तत्वावधान में शामिल ट्रस्ट मानविकी, विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में कौशल के विकास के लिए ज्ञान और शिक्षा प्रदान करता है जिसमें दिमाग को इंगेज करके चरित्र का विकास करना शामिल है। भारत में ट्रस्ट, जिनके राजस्व और आय में हेराफेरी किया गया है, उनमें रजनीश फाउंडेशन और ओआईएफ शामिल हैं।

योगेश ठक्कर के मुताबिक आरोपी, माइकल बर्न वर्तमान में एक आयरिश नागरिक है और ज्यूरिख में ओआईएफ का नियंत्रक भी है। पुलिस को दी गई प्राथमिकी में यह भी कहा गया है कि माइकल बर्न विदेशी गंतव्यों से लाखों डॉलर में मिलने वाली रॉयल्टी आय के अलावा 1500 करोड़ रुपये का नियंत्रक है। उन्हें भारत से यूएस, यूके, स्विटजरलैंड और आयरलैंड जैसे गंतव्यों में धन की हेराफेरी करने के मुख्य आरोपी के रूप में भी नामित किया गया है। जैसे-जैसे आरोप बढ़ते जा रहे हैं, योगेश और दोस्तों का एक समूह, जो भारत में ओआईएफ और अन्य संबद्ध निकायों की रक्षा और संरक्षण के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, न्याय के लिए त्वरित कार्रवाई की गुहार लगा रहे हैं।

ओशो की बहन बहनोई ने 3 एकड़ ज़मीन बेचे जाने के ख़िलाफ़ अनुयायियों को लिखा था पत्र

बता दें कि महाराष्ट्र के पुणे में ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिजॉर्ट है। जिसका संचालन ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा किया जाता है। इससे पहले मार्च 2021 में ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिजॉर्ट की करीब 3 एकड़ ज़मीन को बेचे जाने के ख़िलाफ़ इंदौर में रहने वाली ओशो की बहन मां प्रेम नीरू और बहनोई स्वामी अमित चैतन्य ने दुनियाभर में फैले ओशो अनुयायियों को पत्र लिखा था। साथ ही उन्होंने एक पत्र ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन और महाराष्ट्र सरकार को भी भेजा था। इस चिट्ठी में ओशो की बहन और बहनोई ने आश्रम की करोड़ों रुपए की ज़मीन बेचे जाने का विरोध किया था। चिट्ठी में उन्होंने आरोप लगाया था कि ओशो फाउंडेशन औने-पौने दामों पर ट्रस्ट की ज़मीन बेचने में जुटा है।

बता दें कि ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिजॉर्ट करीब 10 एकड़ ज़मीन में फैला है। पुणे वीआईपी इलाके कोरेगांव पार्क में स्थित इस रिजॉर्ट के 3 एकड़ का दो प्लॉट बेचा जा रहा था जिसकी अनुमानित कीमत 100 करोड़ से ज्यादा आँकी गई है। इस बाबत फाउंडेशन का कहना था कि कोरोना काल में आश्रम में श्रद्धालु कम आए हैं, जिससे कमाई प्रभावित हुई है। आश्रम को चलाने के लिए पैसे की कमी हो गई है। जिसके लिए आश्रम की ज़मीन बेची जा रही है।

जबकि पुणे स्थित ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिजॉर्ट और ओशो की बौद्धिक संपदा, जिसमें उनके वीडियो, प्रवचन, किताबें आदि शामिल हैं, की कीमत अरबों रुपए आंकी जाती है। इस पूरी संपत्ति पर ओशो फाउंडेशन का कब्जा है। ओशो रजनीश के नाम पर चलाई जा रही फाउंडेशन पर विदेशियों का कब्जा है। इनमें माइकल ओ ब्रायन (उर्फ स्वामी जयेश) ओशो फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं। बता दें कि 19 जनवरी 1990 को ओशो की मौत के बाद उनकी वसीयत सामने आई थी। जिसमें ओशो की संपत्ति और प्रकाशन के सारे अधिकार ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन को ट्रांसफर करने की बात कही गई थी।

सीबीआई जांच की मांग

पुणे स्थित सदगुरु ओशो के आश्रम को नष्ट करने की साजिश का आरोप लगाते हुए ओशो ब्लेसिंग मेडिटेशन कम्यून के प्रवक्ता डॉ. अजय गव्हाणे उर्फ स्वामी बोधि जागरण ने मीडिया से कहा है कि समाज को सक्रिय होकर ओशो की विरासत और समाधि बचानी होगी। उन्होंने ओशो आश्रम नष्ट करने या उसे बेचने से बचाने के साथ-साथ सभी संबंधित मामलों की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है।

डॉ. अजय गव्हाणे ने आगे कहा है कि ओशो की विरासत को लेकर जागरूकता कार्यक्रम हो रहे हैं। उनकी विरासत भारत ही नहीं, समस्त विश्व की है। उन्हें मानने वालों के लिए उनकी समाधि प्रिय है। फिर भी धार्मिक अधिकारों से वंचित कर उन्हें समाधि पर जाने से रोका जा रहा है। ओशो के कई बयानों और तस्वीरों को भी जनसामान्य में विरूपित कर फैलाया जा रहा है।

वहीं कम्यून के सचिव महेंद्र देशमुख ने सवाल उठाया कि ओशो की किताब में 60 भाषाओं में पूरे विश्व में प्रकाशित हो रही हैं, लेकिन इनकी रॉयल्टी की किसे मिल रही है ? इसकी जांच की जानी चाहिए।

प्रधानमंत्री और राज्यपाल से मदद की मांग

प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को भी पत्र लिखकर ओशो आश्रम की विरासत को बचाने की गुहार लगाई लगायी गई है। कुछ समय पूर्व मुंबई और पुणे के ओशो के अनुयायियों ने इस संदर्भ में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी से भी मुलाकात कर मदद मांगी थी।

ओशो फाउंडेशन चलाने वाले लोग पुणे में कोरेगांव पार्क स्थित ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन के आश्रम का करीब 10,000 वर्ग मीटर हिस्सा 107 करोड़ रुपये में बेचने की कोशिश कर रहे हैं। आश्रम बेचने की वजह महामारी से हुआ नुकसान बताया गया है। वहीं, विरोध करने वालों का कहना है कि आश्रम का घाटा करीब पौने चार करोड़ रुपए का है, इसके लिए 107 करोड़ रुपये की संपत्ति बेचना तर्कसंगत नहीं है। यह भी आरोप लगाए गए कि आश्रम को बेचने का समर्थन करने वाले फाउंडेशन के कुछ ट्रस्टी ओशो के नाम पर प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां बना चुके हैं। वे इन्हीं को आश्रम की कीमत पर आगे बढ़ाना चाहते हैं।

सोशल मीडिया पर मुहिम

‘Save Osho Samadhi and Osho Ashram’ नाम से सोशल मीडिया पर पेज बनाकर आश्रम को बचाने के लिए लोगों को संबंधित ऑथोरिटी को पत्र लिखने की अपील किया जा रहा है।

पुणे और महाराष्ट्र के अलावा देश के तमामा राज्यों की राजधानियों में जगह-जगह होर्डिंग्स और बैनर लगाये जा रहे हैं। जिसमें ओशो आश्रम और ओशो की विरासत को बचाने की गुहार लगायी जा रही है।

ओशो आश्रम की जो ज़मीन बेची जा रही है उसे बजाज द्वारा ख़रीदने की ख़बर के बीच सोशल मीडिया पर बजाज के ख़िलाफ़ भी मुहिम चलायी जा रही है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)