Tue. Nov 19th, 2019

यूपी की जेलों में बंद 300 से ज्यादा कश्मीरियों से मिलने का उनके परिजन कर रहे हैं इंतजार

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आगरा। पिछले शुक्रवार, पुलवामा निवासी ग़ुलाम अपने बेटे, एक 35 वर्षीय धर्मोपदेशक से मिलने आगरा पहुंचे, जो अगस्त के पहले सप्ताह से वहां के सेंट्रल जेल में बंद हैं। लेकिन श्रीनगर से शुरू होकर नई दिल्ली से होते हुए तय की गई लंबी यात्रा ग़ुलाम के लिए निराशाजनक रही क्योंकि उनके पास जम्मू-कश्मीर पुलिस की तरफ से सत्यापन पत्र नहीं था जो जेल अधिकारियों को दिखाना ज़रूरी था। ग़ुलाम का बेटा उन 285 व्यक्तियों में शामिल है, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा रद्द करने के बाद से कश्मीर घाटी से गिरफ्तार किया गया और यूपी में हिरासत में रखा गया है। अकेले आगरा में ही इसकी संख्या 85 है। 29 लोगों का नवीनतम बैच पिछले शुक्रवार को आगरा जेल में स्थानांतरित किया गया था। जेल अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश कैदियों की उम्र 18 से 45 के बीच है, उनमें से कुछ 50 से अधिक की उम्र के हैं। सूत्रों के मुताबिक वे विविध पृष्ठभूमि से हैं, उनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीडीपी राजनेता, कॉलेज के छात्र, पीएचडी उम्मीद्वार, धर्मोपदेशक, शिक्षक, बड़े व्यवसायी शामिल हैं और यहां तक कि एक सुप्रीम कोर्ट के वकील भी जो कश्मीरी युवाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए जाने जाते हैं। द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, आगरा जोन के डीआईजी (जेल) संजीव त्रिपाठी ने कहा: “कैदियों को कश्मीर से देश के विभिन्न जेलों में लाया जा रहा हैं। फिलहाल, 85 कैदी आगरा सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्हें उच्च-सुरक्षा इंतज़ाम और यातायात के रास्तों में डाइवर्जन करके स्थानांतरित किया गया था। यह संभव है कि अभी और अधिक कैदियों को लाया जाएगा। उनके परिवारों को, उचित जांच-पड़ताल के बाद, आने वाले हफ्तों में उनसे मिलने की अनुमति दी जाएगी। उन्हें रखने के लिए जेल में कोई अन्य परिवर्तन नहीं किया गया है।” जेल अधिकारियों ने बताया कि कश्मीरी कैदियों के बैरक अन्य हिस्सों से अलग हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवारों के साथ मुलाक़ात का इंतज़ाम भी‌ अन्य कैदियों से अलग समय और स्थान पर किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि कश्मीरी कैदियों की एक आम मांग अंग्रेज़ी अखबार हैं। "उन्हें अन्य कैदियों जैसा ही खाना दिया जा रहा है और वे उनके साथ ही खाते हैं। उनको जेल परिसर के अंदर मैदान में घूमने की अनुमति भी है, ” त्रिपाठी ने कहा। हालांकि, ग़ुलाम जैसे लोगों के लिए इतनी सी तसल्ली बहुत कम है। “हमने इतनी लंबी यात्रा की, यात्रा पर लगभग 20,000 रुपये खर्च किए, लेकिन किसी ने हमें इस (सत्यापन पत्र) के बारे में नहीं बताया। चूंकि फोन और इंटरनेट सेवाएं बंद हैं, हम कॉल करके पत्र को फैक्स करने के लिए भी नहीं कह सकते हैं। हमें उस कागज़ के टुकड़े को लेने वापस जाने के लिए हज़ारों रुपये खर्च करने होंगे," ग़ुलाम के साथ आए एक रिश्तेदार, रईस ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया। रईस के अनुसार, ग़ुलाम का बेटा राजनीतिक रूप से सक्रिय था, लेकिन "किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं था"। "उन्हें 5 अगस्त की शाम को दो पुलिस वाहनों में आए लोगों ने उठाया था। उन्होंने हमें बताया कि उन्हें सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पब्लिक सेफ्टी एक्ट) के तहत गिरफ्तार किया जा रहा था। हमने उसे तब से नहीं देखा है। उनकी एक दो महीने की बेटी है जो उनकी राह देख रही है।" पिछले शुक्रवार को आगरा जेल में, हिरासत में लिए गए एक छात्र के रिश्तेदार, हुसैन भी थे जिन्होंने कहा कि एसी यात्राओं को बनाए रखने के लिए उनका परिवार जल्द ही कर्ज़ में डूब जाएगा। “वह एक छात्र है और उसका ट्रैक रिकॉर्ड साफ है। उसके खिलाफ कोई केस नहीं है। हम जेल अधिकारियों का इंतज़ार कर रहे हैं ताकि हमें उससे मिलने की अनुमति मिल सके। हम गरीब लोग हैं और बार-बार आने का जोखिम नहीं उठा सकते। हमारे पास हमारे आधार कार्ड हैं, लेकिन अब हम सुन रहे हैं कि यह पर्याप्त नहीं है,” हुसैन ने कहा। रईस और हुसैन दोनों ने अपना पूरा नाम प्रदान करने या अपने हिरासत में लिए गए रिश्तेदारों की पहचान बताने से इंकार कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि आगरा सेंट्रल जेल में वर्तमान में कुल 1,933 कैदी हैं, जबकि स्वीकृत क्षमता केवल 1,350 है। जेल कर्मचारियों के अलावा, 92 पुलिसकर्मी यहां पर पहरा देते हैं। (12 सितंबर 2019 को 'द इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित अमिल भटनागर की रिपोर्ट का 'कश्मीर ख़बर' के लिए विदीशा द्वारा अनुवाद।) मूल लेख -https://indianexpress.com/article/india/nearly-300-from-valley-detained-in-up-jails-separate-barracks-families-wait-5987405/?fbclid=IwAR1ujeFnR7a7klZvtK1xh24_vaViFKdRRk8l2m4PZ2cbvd43jXxDW42mUkU कश्मीर ख़बर - https://www.facebook.com/kashmirkhabar1/ फोटो - कैद कश्मीरियों के रिश्तेदार रईस और ग़ुलाम, आगरा जेल में इंतज़ार करते हुए (फोटो साभार- गजेंद्र यादव, इंडियन एक्सप्रेस)

आगरा। पिछले शुक्रवार, पुलवामा निवासी ग़ुलाम अपने बेटे, एक 35 वर्षीय धर्मोपदेशक से मिलने आगरा पहुंचे, जो अगस्त के पहले सप्ताह से वहां के सेंट्रल जेल में बंद हैं। लेकिन श्रीनगर से शुरू होकर नई दिल्ली से होते हुए तय की गई लंबी यात्रा ग़ुलाम के लिए निराशाजनक रही क्योंकि उनके पास जम्मू-कश्मीर पुलिस की तरफ से सत्यापन पत्र नहीं था जो जेल अधिकारियों को दिखाना ज़रूरी था।

ग़ुलाम का बेटा उन 285 व्यक्तियों में शामिल है, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा रद्द करने के बाद से कश्मीर घाटी से गिरफ्तार किया गया और यूपी में हिरासत में रखा गया है। अकेले आगरा में ही इसकी संख्या 85 है। 29 लोगों का नवीनतम बैच पिछले शुक्रवार को आगरा जेल में स्थानांतरित किया गया था।

जेल अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश कैदियों की उम्र 18 से 45 के बीच है, उनमें से कुछ 50 से अधिक की उम्र के हैं। सूत्रों के मुताबिक वे विविध पृष्ठभूमि से हैं, उनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीडीपी राजनेता, कॉलेज के छात्र, पीएचडी उम्मीदवार, धर्मोपदेशक, शिक्षक, बड़े व्यवसायी शामिल हैं और यहां तक ​​कि एक सुप्रीम कोर्ट के वकील भी जो कश्मीरी युवाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए जाने जाते हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, आगरा जोन के डीआईजी (जेल) संजीव त्रिपाठी ने कहा: “कैदियों को कश्मीर से देश के विभिन्न जेलों में लाया जा रहा हैं। फिलहाल, 85 कैदी आगरा सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्हें उच्च-सुरक्षा इंतज़ाम और यातायात के रास्तों में डाइवर्जन करके स्थानांतरित किया गया था। यह संभव है कि अभी और अधिक कैदियों को लाया जाएगा। उनके परिवारों को, उचित जांच-पड़ताल के बाद, आने वाले हफ्तों में उनसे मिलने की अनुमति दी जाएगी। उन्हें रखने के लिए जेल में कोई अन्य परिवर्तन नहीं किया गया है।”

जेल अधिकारियों ने बताया कि कश्मीरी कैदियों के बैरक अन्य हिस्सों से अलग हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवारों के साथ मुलाक़ात का इंतज़ाम भी‌ अन्य कैदियों से अलग समय और स्थान पर किया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि कश्मीरी कैदियों की एक आम मांग अंग्रेज़ी अखबार हैं। “उन्हें अन्य कैदियों जैसा ही खाना दिया जा रहा है और वे उनके साथ ही खाते हैं। उनको जेल परिसर के अंदर मैदान में घूमने की अनुमति भी है, ” त्रिपाठी ने कहा।

हालांकि, ग़ुलाम जैसे लोगों के लिए इतनी सी तसल्ली बहुत कम है।

“हमने इतनी लंबी यात्रा की, यात्रा पर लगभग 20,000 रुपये खर्च किए, लेकिन किसी ने हमें इस (सत्यापन पत्र) के बारे में नहीं बताया। चूंकि फोन और इंटरनेट सेवाएं बंद हैं, हम कॉल करके पत्र को फैक्स करने के लिए भी नहीं कह सकते हैं। हमें उस कागज़ के टुकड़े को लेने वापस जाने के लिए हज़ारों रुपये खर्च करने होंगे,” ग़ुलाम के साथ आए एक रिश्तेदार, रईस ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया।

रईस के अनुसार, ग़ुलाम का बेटा राजनीतिक रूप से सक्रिय था, लेकिन “किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं था”। “उन्हें 5 अगस्त की शाम को दो पुलिस वाहनों में आए लोगों ने उठाया था। उन्होंने हमें बताया कि उन्हें सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पब्लिक सेफ्टी एक्ट) के तहत गिरफ्तार किया जा रहा था। हमने उसे तब से नहीं देखा है। उनकी एक दो महीने की बेटी है जो उनकी राह देख रही है।”

पिछले शुक्रवार को आगरा जेल में, हिरासत में लिए गए एक छात्र के रिश्तेदार, हुसैन भी थे जिन्होंने कहा कि एसी यात्राओं को बनाए रखने के लिए उनका परिवार जल्द ही कर्ज़ में डूब जाएगा। “वह एक छात्र है और उसका ट्रैक रिकॉर्ड साफ है। उसके खिलाफ कोई केस नहीं है। हम जेल अधिकारियों का इंतज़ार कर रहे हैं ताकि हमें उससे मिलने की अनुमति मिल सके। हम गरीब लोग हैं और बार-बार आने का जोखिम नहीं उठा सकते। हमारे पास हमारे आधार कार्ड हैं, लेकिन अब हम सुन रहे हैं कि यह पर्याप्त नहीं है,” हुसैन ने कहा।

रईस और हुसैन दोनों ने अपना पूरा नाम प्रदान करने या अपने हिरासत में लिए गए रिश्तेदारों की पहचान बताने से इंकार कर दिया।

अधिकारियों ने कहा कि आगरा सेंट्रल जेल में वर्तमान में कुल 1,933 कैदी हैं, जबकि स्वीकृत क्षमता केवल 1,350 है। जेल कर्मचारियों के अलावा, 92 पुलिसकर्मी यहां पर पहरा देते हैं।

(12 सितंबर 2019 को द इंडियन एक्सप्रेसमें प्रकाशित अमिल भटनागर की रिपोर्ट का कश्मीर ख़बरके लिए विदीशा द्वारा अनुवाद।)

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